डायबिटीज को अक्सर मीठा खाने या चावल-रोटी के सेवन से जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि ब्लड शुगर बढ़ने पर कई लोग अपनी डाइट से चावल और रोटी पूरी तरह हटा देते हैं। हालांकि, इसके बावजूद उनका शुगर लेवल सामान्य नहीं हो पाता। ऐसा इसलिए है क्योंकि ब्लड शुगर पर केवल एक या दो खाद्य पदार्थों का नहीं, बल्कि पूरे खानपान, शारीरिक गतिविधि, नींद, तनाव और शरीर में इंसुलिन के काम करने के तरीके का असर पड़ता है।
आज की बदलती जीवनशैली में कम उम्र के लोगों में भी टाइप-2 डायबिटीज और ब्लड शुगर से जुड़ी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि चावल-रोटी नहीं खाने के बावजूद ग्लूकोज का स्तर क्यों बढ़ सकता है और इसे नियंत्रित रखने के लिए किन आदतों में बदलाव करना चाहिए।
छोटी उम्र में डायबिटीज बढ़ने के पीछे क्या हैं कारण?
डायबिटीज होने के पीछे केवल मीठा खाना जिम्मेदार नहीं होता। टाइप-2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता या जरूरत के मुताबिक इंसुलिन नहीं बना पाता। इसके अलावा आनुवंशिक कारण, बढ़ता वजन, शारीरिक गतिविधियों की कमी और कुछ अन्य स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां भी जोखिम बढ़ा सकती हैं।
लंबे समय तक बैठे रहना, नियमित व्यायाम न करना, पर्याप्त नींद नहीं लेना और असंतुलित खानपान भी ब्लड शुगर के नियंत्रण को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं, टाइप-1 डायबिटीज एक अलग स्थिति है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है।
इसलिए यह मानना सही नहीं है कि चावल या गेहूं खाना छोड़ देने से डायबिटीज अपने आप ठीक हो जाएगी। जरूरी है कि बीमारी के कारण को समझकर सही खानपान और उपचार अपनाया जाए।
1. हेल्दी समझकर खाई जाने वाली चीजें भी बढ़ा सकती हैं शुगर
ओट्स, दलिया, क्विनोआ, बाजरा और दूसरे साबुत अनाज पोषक तत्वों और फाइबर के अच्छे स्रोत हो सकते हैं। लेकिन इन खाद्य पदार्थों में कार्बोहाइड्रेट भी मौजूद होते हैं, जो पचने के बाद ग्लूकोज में बदलते हैं।
उदाहरण के लिए, बाजरे की खिचड़ी या दलिया पौष्टिक होने के बावजूद ज्यादा मात्रा में खाने पर ब्लड शुगर बढ़ा सकता है। इसी तरह ओट्स में चीनी, शहद या मीठे फ्लेवर मिलाने से भी कुल कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ सकती है।
मखाने को भी कई लोग हेल्दी स्नैक मानकर बड़ी मात्रा में खाते हैं। इन्हें ज्यादा घी या अन्य कैलोरी से भरपूर सामग्री के साथ तैयार करने पर भोजन की कुल कैलोरी बढ़ जाती है।
इसलिए किसी भी खाद्य पदार्थ को केवल हेल्दी मानकर असीमित मात्रा में खाना सही नहीं है। उसकी मात्रा, बनाने का तरीका और उसके साथ खाए जाने वाले दूसरे खाद्य पदार्थों पर भी ध्यान देना चाहिए।
2. चाय-बिस्कुट और शाम का नाश्ता बन सकता है वजह
कई लोगों की दिनचर्या में सुबह चाय के साथ बिस्कुट, शाम को नमकीन और काम करते समय बार-बार कुछ खाते रहने की आदत शामिल होती है। इन छोटी-छोटी चीजों से पूरे दिन में कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी का सेवन काफी बढ़ सकता है।
मीठे बिस्कुट, नमकीन के कुछ प्रकार, बेकरी उत्पाद और पैकेट वाले स्नैक्स में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, नमक, वसा या अतिरिक्त चीनी हो सकती है। इनका बार-बार और अधिक मात्रा में सेवन ब्लड शुगर के प्रबंधन को मुश्किल बना सकता है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि हर तरह का स्नैक खाना बंद कर देना चाहिए। इसके बजाय खाने की मात्रा और समय पर ध्यान दें। जरूरत के अनुसार बिना अतिरिक्त चीनी वाला दही, थोड़ी मात्रा में मेवे या अन्य संतुलित स्नैक्स चुने जा सकते हैं।
3. जूस, मीठी लस्सी और फ्लेवर्ड ड्रिंक्स को न करें नजरअंदाज
ब्लड शुगर बढ़ने की वजह केवल ठोस भोजन नहीं होता। पेय पदार्थों से मिलने वाली चीनी और कार्बोहाइड्रेट भी ग्लूकोज के स्तर को प्रभावित कर सकते हैं।
इन चीजों का सेवन करते समय विशेष सावधानी रखें:
- चीनी वाली चाय और कॉफी
- फलों का जूस और पैकेट वाले मीठे पेय
- मीठी लस्सी और मिल्कशेक
- अतिरिक्त चीनी वाला फ्लेवर्ड दही
- शहद, गुड़ और ब्राउन शुगर से बने मीठे खाद्य पदार्थ
चीनी की जगह शहद या गुड़ का इस्तेमाल करने से भी कार्बोहाइड्रेट का असर खत्म नहीं होता। इसलिए डायबिटीज में इन्हें पूरी तरह सुरक्षित विकल्प नहीं मानना चाहिए।
फलों का जूस पीने के बजाय साबुत फल खाना अक्सर बेहतर विकल्प होता है, क्योंकि साबुत फल में फाइबर बना रहता है और उसे खाने से पेट भरा हुआ महसूस हो सकता है। हालांकि, फल का प्रकार और मात्रा भी व्यक्ति की जरूरत के अनुसार तय होनी चाहिए।
4. तनाव और नींद की कमी का भी पड़ता है असर
लगातार तनाव में रहने से शरीर में ऐसे हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है, जो ब्लड शुगर को प्रभावित करते हैं। इसी तरह नींद की कमी और अनियमित सोने-जागने की आदत भी इंसुलिन के प्रति शरीर की संवेदनशीलता पर असर डाल सकती है।
यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक बैठकर काम करता है और नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि नहीं करता, तो उसके लिए ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
इसके लिए रोजाना अपनी क्षमता के अनुसार चलना, नियमित व्यायाम करना, तनाव कम करने के उपाय अपनाना और पर्याप्त नींद लेना उपयोगी है। वयस्कों के लिए आमतौर पर 7 से 9 घंटे की नींद की सलाह दी जाती है।
5. कुछ बीमारियां और दवाइयां भी बढ़ा सकती हैं शुगर
अगर खानपान में बदलाव के बावजूद ब्लड शुगर लगातार बढ़ा हुआ है, तो इसके पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं। शरीर में इंसुलिन की कमी या इंसुलिन प्रतिरोध के अलावा संक्रमण, बीमारी के दौरान होने वाला शारीरिक तनाव और कुछ दवाइयां भी ग्लूकोज के स्तर को बढ़ा सकती हैं।
उदाहरण के लिए, स्टेरॉयड दवाओं से कुछ लोगों में ब्लड शुगर बढ़ सकता है। वहीं, सुबह खाली पेट शुगर अधिक होने का एक कारण रात के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव भी हो सकते हैं।
ऐसी स्थिति में केवल चावल-रोटी छोड़ना पर्याप्त नहीं है। डॉक्टर की सलाह से फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज और HbA1c जैसी जांचों के जरिए शुगर नियंत्रण का आकलन किया जा सकता है। डायबिटीज की दवाएं या इंसुलिन खुद से बंद या कम नहीं करना चाहिए।
6. कार्बोहाइड्रेट की मात्रा पर ध्यान देना भी जरूरी
चावल और गेहूं दोनों में कार्बोहाइड्रेट होते हैं, लेकिन इन्हें पूरी तरह बंद करना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है। ब्लड शुगर पर भोजन की कुल मात्रा, कार्बोहाइड्रेट के प्रकार और उसके साथ खाए जाने वाले प्रोटीन, फाइबर तथा वसा का भी असर पड़ता है।
यदि कोई व्यक्ति चावल-रोटी छोड़कर उनकी जगह बड़ी मात्रा में आलू, दूसरे अनाज या अन्य कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थ खाने लगता है, तो उसका ब्लड शुगर फिर भी बढ़ सकता है।
इसलिए संतुलित डाइट अपनाना और अपनी जरूरत के अनुसार भोजन की मात्रा तय करना अधिक महत्वपूर्ण है।
ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए कैसी होनी चाहिए थाली?
डायबिटीज के मरीज अपनी थाली को संतुलित रखने के लिए इस तरीके को अपना सकते हैं:
आधी थाली सब्जियों के लिए: लौकी, तोरई, भिंडी, फूलगोभी, पत्तागोभी और अन्य बिना स्टार्च वाली सब्जियां शामिल करें।
एक-चौथाई थाली प्रोटीन के लिए: अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार दाल, पनीर, बिना चीनी वाला दही, अंडे, मछली या चिकन ले सकते हैं।
एक-चौथाई थाली अनाज और कार्बोहाइड्रेट के लिए: रोटी, चावल या दूसरे अनाज उचित मात्रा में शामिल किए जा सकते हैं। सही मात्रा व्यक्ति की शारीरिक गतिविधि, दवाओं और ब्लड शुगर के स्तर के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
इसके साथ पर्याप्त पानी पिएं, नियमित शारीरिक गतिविधि करें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच कराते रहें।
कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?
यदि चावल-रोटी कम करने के बावजूद ब्लड शुगर बार-बार अधिक आ रहा है, तो इसे नजरअंदाज न करें। फास्टिंग और खाने के बाद की शुगर रीडिंग के साथ HbA1c की जांच की जरूरत हो सकती है। डॉक्टर आपकी रिपोर्ट, लक्षणों और दवाओं के आधार पर आगे की सलाह दे सकते हैं।
बहुत ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, बिना कारण वजन कम होना और लगातार थकान महसूस होना भी डायबिटीज के संभावित लक्षण हैं। यदि शुगर बहुत ज्यादा हो और साथ में उल्टी, पेट दर्द, तेज या गहरी सांस अथवा भ्रम जैसे लक्षण हों, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
निष्कर्ष: ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने के लिए केवल चावल और रोटी छोड़ना पर्याप्त नहीं है। संतुलित भोजन, उचित मात्रा, नियमित व्यायाम, अच्छी नींद, तनाव प्रबंधन और जरूरत के अनुसार दवाओं का सेवन महत्वपूर्ण है। सही कारण जानने और प्रभावी नियंत्रण के लिए डॉक्टर की सलाह लेना सबसे बेहतर कदम है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। यह डॉक्टर की जांच, निदान या व्यक्तिगत उपचार का विकल्प नहीं है।
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