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ओवैसी ने चीन सीमा के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा, पूछा- देश की सुरक्षा कितनी मजबूत?

भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था और अरुणाचल प्रदेश में कथित घुसपैठ को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने सवाल उठाया कि चीन से लगती सीमा पर मौजूदा हालात क्या हैं और सरकार देश की सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठा रही है।

ओवैसी ने कहा कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक की हालिया टिप्पणियों के बाद सरकार को सीमा से जुड़े मामलों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से अरुणाचल प्रदेश के उन इलाकों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की, जहां चीनी सैनिकों की गतिविधियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

ओवैसी ने सरकार से मांगा जवाब

असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सीमा पर गश्त और स्थानीय लोगों की आवाजाही से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने सवाल किया कि क्या ऐसे क्षेत्र हैं, जहां भारतीय जवानों की पेट्रोलिंग या आम नागरिकों को रोका गया है। साथ ही उन्होंने सरकार से इन घटनाओं की अवधि और परिस्थितियों के बारे में जानकारी देने की मांग की।

ओवैसी ने केंद्र सरकार की चीन नीति पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि देश के नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि सीमा पर किस तरह की स्थिति बनी हुई है और सरकार इस मामले में क्या रणनीति अपना रही है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार से पूछा कि क्या वह भारतीय सीमाओं की सुरक्षा करने में सक्षम है। ओवैसी ने यह भी आरोप लगाया कि सीमा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार की ओर से पर्याप्त जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों के बीच संबंधित इलाकों में चीनी सैनिकों की कथित गतिविधियों और उनके वास्तविक स्वरूप की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

ITBP ने सीमा सुरक्षा के लिए बढ़ाई आधुनिक तैयारियां

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस चीन से लगती सीमा पर अपनी परिचालन क्षमता को मजबूत करने के लिए तकनीक और प्रशिक्षण पर जोर दे रही है। इसी दिशा में सीमा पर तैनात इकाइयों के लिए ड्रोन प्लाटून गठित करने और जवानों को आधुनिक परिस्थितियों के अनुरूप प्रशिक्षित करने की पहल की गई है।

बल ने गलवान जैसी कठिन परिस्थितियों से निपटने की तैयारी के लिए ‘स्ट्राइक’ नाम से एक विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी तैयार किया है। इसके अलावा, सीमा पर तैनात जवानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बुनियादी ढांचे और भूमिगत सुविधाओं के विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

इन कदमों का उद्देश्य निगरानी व्यवस्था को बेहतर बनाना, चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में तेजी से प्रतिक्रिया देना और सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात जवानों की क्षमताओं को बढ़ाना है।

चीन की सैन्य ताकत और ड्रोन तकनीक बड़ी चुनौती

ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने चीन से लगती सीमा को बेहद चुनौतीपूर्ण बताया है। उनके मुताबिक, चीन की सैन्य क्षमता और उसकी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के आधुनिकीकरण को देखते हुए भारत के लिए अपनी तैयारियों को लगातार बेहतर बनाना जरूरी है।

उन्होंने आधुनिक युद्ध में ड्रोन तकनीक की बढ़ती भूमिका पर भी जोर दिया। ड्रोन के जरिए निगरानी, सूचना जुटाने और कुछ परिस्थितियों में सामरिक गतिविधियों को अंजाम देने की क्षमता ने सीमा सुरक्षा की चुनौतियों को नया रूप दिया है।

कपूर के अनुसार, ड्रोन एक ओर सुरक्षा बलों के सामने नई चुनौतियां पेश करते हैं, तो दूसरी ओर ये निगरानी और परिचालन क्षमता बढ़ाने का अवसर भी देते हैं। इसलिए ITBP अपने जवानों, हथियारों, वाहनों और सीमा चौकियों को आधुनिक बनाने पर ध्यान दे रही है।

पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक तकनीक पर जोर

चीन के साथ सीमा प्रबंधन में केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। आधुनिक निगरानी प्रणालियों, ड्रोन और बेहतर बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

ITBP की ओर से किए जा रहे आधुनिकीकरण के प्रयासों के बीच ओवैसी के सवालों ने सीमा सुरक्षा और सरकार की चीन नीति को लेकर राजनीतिक चर्चा को फिर तेज कर दिया है।

फिलहाल इस मुद्दे पर सरकार की ओर से ओवैसी द्वारा उठाए गए सभी सवालों के विस्तृत जवाब की आवश्यकता बनी हुई है। सीमा पर वास्तविक स्थिति, कथित घुसपैठ से जुड़े दावों और गश्त संबंधी परिस्थितियों पर स्पष्ट जानकारी सामने आने के बाद ही पूरे मामले का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।

 

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