मानसून के दौरान जहां मौसम सुहावना हो जाता है, वहीं कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। इन दिनों देश के कई हिस्सों में कंजंक्टिवाइटिस, जिसे आम भाषा में आई फ्लू कहा जाता है, के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। यह संक्रमण तेजी से फैलता है, इसलिए समय रहते सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
कंजंक्टिवाइटिस आंख की बाहरी पारदर्शी झिल्ली (कंजंक्टाइवा) में होने वाली सूजन है। यह संक्रमण वायरस, बैक्टीरिया या एलर्जी के कारण हो सकता है। वायरल और बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस विशेष रूप से संक्रामक होते हैं और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने या उसकी इस्तेमाल की गई वस्तुओं से फैल सकते हैं।
आई फ्लू के प्रमुख लक्षण
- आंखों का लाल हो जाना।
- आंखों से लगातार पानी आना।
- जलन, खुजली या चुभन महसूस होना।
- आंखों से सफेद, पीला या चिपचिपा स्राव निकलना।
- सुबह उठने पर पलकों का चिपक जाना।
- तेज रोशनी में असहजता या आंखों में दर्द।
- आंखों के आसपास हल्की सूजन।
संक्रमण कैसे फैलता है?
विशेषज्ञों के अनुसार संक्रमित आंखों से निकलने वाला स्राव, दूषित हाथ, तौलिया, रूमाल, तकिया या अन्य व्यक्तिगत वस्तुओं के साझा उपयोग से संक्रमण आसानी से फैल सकता है। स्कूल, दफ्तर और सार्वजनिक परिवहन जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों पर इसका जोखिम अधिक रहता है।
डॉक्टरों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आंख लाल होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी आई ड्रॉप, खासकर स्टेरॉयड युक्त ड्रॉप, इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए। गलत दवा संक्रमण को और गंभीर बना सकती है।
डॉक्टर यह भी सलाह देते हैं कि:
- आंखों को बार-बार रगड़ने से बचें।
- कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले संक्रमण ठीक होने तक लेंस का उपयोग न करें।
- पुराने या पहले से खुले हुए आई ड्रॉप्स दोबारा इस्तेमाल न करें।
- आंखों की किसी भी दवा का उपयोग केवल चिकित्सकीय सलाह पर करें।
बचाव के आसान उपाय
- हाथों को साबुन और पानी से नियमित रूप से साफ करें।
- बिना जरूरत आंखों को हाथ न लगाएं।
- तौलिया, रूमाल, तकिया और मेकअप का सामान किसी के साथ साझा न करें।
- कॉन्टैक्ट लेंस और उनके केस की नियमित सफाई करें।
- संक्रमित व्यक्ति के बहुत करीब जाने से बचें।
- आंखों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
कब तुरंत डॉक्टर से मिलें?
यदि आंखों में तेज दर्द हो, धुंधला दिखाई दे, तेज रोशनी सहन न हो, आंखों से अधिक मात्रा में गाढ़ा स्राव निकल रहा हो या सूजन लगातार बढ़ रही हो, तो बिना देरी किए नेत्र रोग विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। समय पर इलाज कराने से संक्रमण को बढ़ने से रोका जा सकता है और आंखों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
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