आज की व्यस्त जीवनशैली में काम का दबाव, पढ़ाई, करियर और निजी जिम्मेदारियों के कारण तनाव बढ़ना आम बात हो गई है। कई लोगों में तनाव के दौरान बार-बार कुछ खाने की इच्छा होती है, जिसे स्ट्रेस ईटिंग या इमोशनल ईटिंग कहा जाता है। यदि यह आदत लंबे समय तक बनी रहे तो मोटापा और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, तनाव के समय शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे अधिक कैलोरी, मीठे और तले-भुने खाद्य पदार्थ खाने की इच्छा बढ़ सकती है। लगातार ऐसा होने पर वजन बढ़ने और अस्वस्थ खानपान की आदत विकसित होने की संभावना रहती है।
स्ट्रेस ईटिंग के सामान्य संकेत
- पेट भरा होने के बावजूद बार-बार कुछ खाने की इच्छा होना।
- तनाव या चिंता के समय मीठा, जंक फूड या अधिक वसा वाले खाद्य पदार्थ खाने का मन करना।
- भावनात्मक राहत पाने के लिए भोजन का सहारा लेना।
- बिना भूख के केवल तनाव या बोरियत के कारण खाना।
कैसे करें बचाव?
- खाने से पहले यह समझने की कोशिश करें कि आपको वास्तव में भूख लगी है या आप केवल तनाव महसूस कर रहे हैं।
- जंक फूड की जगह फल, दही, मेवे, भुने चने या अन्य पौष्टिक विकल्प चुनें।
- अपने तनाव के कारणों और ट्रिगर्स को पहचानें तथा उन्हें नियंत्रित करने का प्रयास करें।
- नियमित योग, ध्यान और व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करें, क्योंकि इससे तनाव कम करने और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है।
- यदि तनाव और अनियंत्रित खाने की आदत लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित रहेगा।
तनाव को समय रहते नियंत्रित करना न केवल मानसिक स्वास्थ्य बल्कि वजन और संपूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
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