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PCOS में राहत के लिए रोज करें ये 4 योगासन, अनियमित पीरियड्स और तनाव को मैनेज करने में मिल सकती है मदद

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानी PCOS महिलाओं में होने वाली एक सामान्य हार्मोनल और मेटाबॉलिक स्थिति है। इसमें पीरियड्स का अनियमित होना, वजन बढ़ना, मुंहासे, अत्यधिक बालों की समस्या और इंसुलिन से जुड़ी दिक्कतें जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। इसके लक्षण हर महिला में अलग-अलग हो सकते हैं।

नियमित शारीरिक गतिविधि और योग जैसी एक्सरसाइज शरीर को एक्टिव रखने, तनाव कम करने और ओवरऑल हेल्थ को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती हैं। हालांकि, केवल योग को PCOS का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। डॉक्टर की सलाह, संतुलित खानपान और जरूरत के अनुसार उपचार भी महत्वपूर्ण है।

अगर आप योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहती हैं, तो ये चार आसन उपयोगी हो सकते हैं।

1. उष्ट्रासन — Camel Pose

उष्ट्रासन को कैमल पोज भी कहा जाता है। इसमें शरीर को पीछे की ओर मोड़ा जाता है, जिससे छाती, पेट, कूल्हों और जांघों के आसपास स्ट्रेच महसूस होता है। यह शरीर की फ्लेक्सिबिलिटी और पोश्चर पर काम करने वाला आसन है।

कैसे करें उष्ट्रासन?

  • सबसे पहले योग मैट पर घुटनों के बल बैठ जाएं।
  • दोनों घुटनों के बीच आरामदायक दूरी रखें।
  • हाथों को कमर या हिप्स पर रखते हुए रीढ़ को सीधा रखें।
  • अब धीरे-धीरे छाती को ऊपर उठाते हुए शरीर को पीछे की ओर ले जाएं।
  • यदि संतुलन ठीक रहे तो दोनों हाथों से एड़ियों को पकड़ने की कोशिश करें।
  • गर्दन पर ज्यादा दबाव न डालें और अपनी क्षमता के अनुसार ही पीछे झुकें।
  • कुछ सेकेंड सामान्य रूप से सांस लेते हुए इसी स्थिति में रहें।
  • इसके बाद धीरे-धीरे शुरुआती स्थिति में वापस आ जाएं।

उष्ट्रासन से क्या फायदा हो सकता है?

यह आसन पीठ, कंधों और पैरों की मांसपेशियों को सक्रिय करने के साथ शरीर के सामने वाले हिस्से में स्ट्रेच देता है। नियमित अभ्यास से लचीलापन और पोश्चर बेहतर करने में मदद मिल सकती है। योग और नियमित शारीरिक गतिविधि तनाव प्रबंधन के लिए भी उपयोगी हो सकती है।

2. प्रसारित पादोत्तानासन — Wide-Legged Forward Bend

यह खड़े होकर किया जाने वाला फॉरवर्ड बेंड आसन है। इसमें पैरों को फैलाकर शरीर के ऊपरी हिस्से को आगे की ओर झुकाया जाता है। इससे पैरों, कूल्हों और जांघों की मांसपेशियों में खिंचाव आता है।

कैसे करें यह आसन?

  • सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों को सामान्य से थोड़ा अधिक फैलाएं।
  • रीढ़ को सीधा रखते हुए गहरी सांस लें।
  • अब सांस छोड़ते हुए हिप्स से आगे की ओर झुकना शुरू करें।
  • दोनों हाथों को जमीन पर टिकाने की कोशिश करें।
  • शुरुआत में जमीन तक हाथ न पहुंचे तो किसी योग ब्लॉक या ऊंचे सपोर्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • अपनी क्षमता के अनुसार कुछ समय इसी स्थिति में रहें।
  • धीरे-धीरे वापस खड़े हो जाएं।

इसके फायदे

यह आसन पैरों और जांघों की मांसपेशियों को स्ट्रेच करने में मदद करता है। नियमित अभ्यास से शरीर का लचीलापन और संतुलन बेहतर हो सकता है। आगे झुकने वाले आसनों के दौरान धीमी और नियंत्रित सांस लेने से रिलैक्सेशन में भी मदद मिल सकती है।

3. नौकासन — Boat Pose

नौकासन में शरीर का आकार नाव जैसा दिखाई देता है, इसलिए इसे बोट पोज भी कहा जाता है। यह मुख्य रूप से पेट और कोर की मांसपेशियों को सक्रिय करने वाला आसन है।

नौकासन करने का तरीका

  • सबसे पहले मैट पर बैठकर दोनों पैरों को सामने की ओर रखें।
  • घुटनों को मोड़ते हुए पैरों को जमीन पर टिकाएं।
  • अब रीढ़ को सीधा रखते हुए शरीर को थोड़ा पीछे की तरफ झुकाएं।
  • धीरे-धीरे दोनों पैरों को जमीन से ऊपर उठाएं।
  • अपनी क्षमता के अनुसार पैरों को सीधा करने की कोशिश करें।
  • दोनों हाथों को सामने की ओर फैलाएं।
  • इस दौरान पीठ को ज्यादा गोल न करें और सांस को सामान्य रखें।
  • कुछ सेकेंड रुकने के बाद धीरे-धीरे पैरों को नीचे रखें।

नौकासन के फायदे

नौकासन पेट और कोर की मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करता है। इससे शरीर का संतुलन और स्टेबिलिटी बेहतर करने में सहायता मिल सकती है। मजबूत कोर रोजमर्रा की गतिविधियों के दौरान शरीर को बेहतर सपोर्ट देता है।

4. परिवृत्त उत्कटासन — Revolved Chair Pose

परिवृत्त उत्कटासन को रिवॉल्व्ड चेयर पोज भी कहा जाता है। इसमें शरीर को चेयर पर बैठने जैसी मुद्रा में रखते हुए ऊपरी हिस्से को एक तरफ ट्विस्ट किया जाता है। यह पैरों, जांघों और कोर को सक्रिय करने वाला आसन है।

कैसे करें परिवृत्त उत्कटासन?

  • सबसे पहले पैरों को आरामदायक दूरी पर रखकर सीधे खड़े हो जाएं।
  • अब घुटनों को मोड़ते हुए हिप्स को पीछे की ओर ले जाएं, जैसे कुर्सी पर बैठने जा रहे हों।
  • दोनों हथेलियों को छाती के सामने जोड़ें।
  • रीढ़ को लंबा रखते हुए शरीर के ऊपरी हिस्से को धीरे-धीरे एक तरफ मोड़ें।
  • कोशिश करें कि घुटने एक-दूसरे के समानांतर रहें।
  • कुछ सेकेंड तक इसी स्थिति में सामान्य सांस लेते रहें।
  • धीरे-धीरे वापस शुरुआती मुद्रा में आएं और दूसरी तरफ भी अभ्यास कर सकते हैं।

इसके फायदे

यह आसन जांघों और पैरों की मांसपेशियों को सक्रिय करता है। साथ ही शरीर के संतुलन, कोर स्टेबिलिटी और ऊपरी शरीर की मोबिलिटी पर भी काम करता है। ट्विस्टिंग मूवमेंट रीढ़ और धड़ की गतिशीलता बढ़ाने में मदद कर सकता है।

PCOS में योग करते समय इन बातों का रखें ध्यान

PCOS के लक्षणों को केवल योग के जरिए खत्म करने का दावा सही नहीं है। योग को नियमित एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और डॉक्टर की सलाह के साथ अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाया जा सकता है।

अगर लंबे समय से पीरियड्स अनियमित हैं, बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती है, लगातार पेट या पेल्विक दर्द रहता है या PCOS के लक्षण बढ़ रहे हैं, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

योग शुरू करते समय अपनी क्षमता के अनुसार ही अभ्यास करें। किसी आसन के दौरान तेज दर्द, चक्कर या असहजता महसूस हो तो तुरंत रुक जाएं। गर्भावस्था, चोट या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में योग शुरू करने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

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