दिनभर की भागदौड़ और कामकाज के बाद ज्यादातर लोग रात में कुछ समय आराम से बिताना चाहते हैं। ऐसे में कई लोगों की आदत सोने से पहले स्मार्टफोन चलाने की होती है। कोई सोशल मीडिया पर खबरें देखता है, तो कोई मनोरंजन के लिए रील्स स्क्रॉल करता रहता है। शुरुआत में कुछ मिनट के लिए फोन उठाया जाता है, लेकिन देखते ही देखते घंटों बीत जाते हैं और सोने का समय निकल जाता है।
देर रात तक फोन इस्तेमाल करने की यह आदत नींद की गुणवत्ता, दिनभर की एकाग्रता और मानसिक सेहत को प्रभावित कर सकती है। लगातार नकारात्मक खबरें या वीडियो देखते रहने से कुछ लोगों में तनाव और बेचैनी भी बढ़ सकती है। इस व्यवहार को समझना और समय रहते इसमें बदलाव करना जरूरी है।
क्या है डूमस्क्रॉलिंग और क्यों बन जाती है इसकी आदत?
इंटरनेट या सोशल मीडिया पर लगातार कंटेंट स्क्रॉल करते रहने, खासकर नकारात्मक खबरों और परेशान करने वाली जानकारियों को बार-बार देखते रहने की आदत को डूमस्क्रॉलिंग कहा जाता है। कई बार व्यक्ति जानता है कि उसे फोन बंद करके सो जाना चाहिए, लेकिन फिर भी वह अगली पोस्ट या वीडियो देखने के लिए स्क्रीन पर बना रहता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार नए वीडियो और पोस्ट सामने आते रहते हैं। इस वजह से उपयोगकर्ता के लिए फोन छोड़ना मुश्किल हो सकता है। यदि यह आदत रोजाना देर रात तक जारी रहती है, तो सोने का समय कम हो सकता है और अगले दिन थकान, चिड़चिड़ापन या ध्यान केंद्रित करने में परेशानी महसूस हो सकती है।
हालांकि, हर व्यक्ति पर इसका प्रभाव एक जैसा नहीं होता। मानसिक स्वास्थ्य पर असर इस्तेमाल की अवधि, कंटेंट की प्रकृति, नींद और व्यक्ति की परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है।
1. फोन की स्क्रीन को ग्रेस्केल मोड पर रखें
स्मार्टफोन की रंगीन स्क्रीन और लगातार बदलता कंटेंट लोगों का ध्यान खींच सकता है। ऐसे में रात के समय फोन इस्तेमाल करने की इच्छा कम करने के लिए ग्रेस्केल मोड उपयोगी उपाय हो सकता है।
ग्रेस्केल मोड में स्क्रीन के रंग हटकर डिस्प्ले ब्लैक एंड व्हाइट दिखाई देती है। इससे वीडियो और ऐप्स कुछ कम आकर्षक लग सकते हैं और फोन इस्तेमाल करने की इच्छा कम करने में मदद मिल सकती है।
इसके लिए फोन की सेटिंग में जाकर Accessibility या Digital Wellbeing विकल्प देखें। अलग-अलग मोबाइल में इसका नाम और तरीका अलग हो सकता है। सोने से लगभग एक घंटे पहले इस मोड को चालू करके देखें और इस दौरान फोन का इस्तेमाल भी सीमित रखें।
ध्यान रखें कि ग्रेस्केल मोड अपने आप नींद की समस्या दूर नहीं करता। इसका उद्देश्य फोन इस्तेमाल करने की आदत पर नियंत्रण रखने में मदद करना है।
2. अलार्म के लिए अलग घड़ी का इस्तेमाल करें
कई लोग सुबह समय पर उठने के लिए स्मार्टफोन को तकिए के पास या बिस्तर के ठीक बगल में रखकर सोते हैं। इससे रात में नींद खुलने पर नोटिफिकेशन देखने या सोशल मीडिया खोलने की आदत आसानी से दोबारा शुरू हो सकती है।
इससे बचने के लिए पारंपरिक अलार्म क्लॉक का इस्तेमाल किया जा सकता है। फोन को बिस्तर से कुछ दूरी पर या संभव हो तो दूसरे कमरे में रखें। इससे सोने से पहले और रात में बार-बार फोन उठाने की संभावना कम हो सकती है।
यदि सुबह उठने के लिए फोन का अलार्म जरूरी है, तो उसे इतनी दूरी पर रखें कि अलार्म सुनाई दे, लेकिन बिस्तर पर लेटे-लेटे उसे उठाकर स्क्रॉल करना आसान न हो।
3. सोने से पहले स्क्रीन इस्तेमाल करने का समय तय करें
फोन को पूरी तरह छोड़ना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। इसलिए शुरुआत में सोने से पहले स्क्रीन इस्तेमाल करने की एक निश्चित समय-सीमा तय करें।
उदाहरण के लिए, रात में एक समय के बाद सोशल मीडिया ऐप्स बंद कर दें और फोन में उपलब्ध ऐप टाइमर या स्लीप मोड का इस्तेमाल करें। गैर-जरूरी नोटिफिकेशन बंद करने से भी बार-बार फोन चेक करने की इच्छा कम हो सकती है।
अगर आप अक्सर एक वीडियो देखने के बाद दूसरा वीडियो खोल लेते हैं, तो ऑटो-प्ले बंद करना और सोशल मीडिया ऐप्स से लॉग आउट करना भी मददगार हो सकता है।
4. सोने से पहले अपनाएं आराम देने वाली दिनचर्या
रात में फोन चलाने की आदत को कम करने के लिए उसकी जगह कोई दूसरी गतिविधि अपनाना उपयोगी हो सकता है। सोने से पहले हल्की किताब पढ़ना, धीमा संगीत सुनना, कुछ देर ध्यान करना या अगले दिन की जरूरी चीजों की तैयारी करना बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
एक नियमित दिनचर्या शरीर को सोने के लिए तैयार होने में मदद करती है। कोशिश करें कि रोजाना लगभग एक ही समय पर सोएं और सुबह उठें। वयस्कों को आमतौर पर हर रात 7 से 9 घंटे की नींद लेने का लक्ष्य रखना चाहिए।
5. नकारात्मक खबरों और रील्स से बनाएं समयबद्ध दूरी
अगर सोशल मीडिया देखने के बाद मन बेचैन रहता है या बार-बार परेशान करने वाली खबरें देखने की इच्छा होती है, तो रात के समय ऐसे कंटेंट से दूरी बनाना फायदेमंद हो सकता है।
इसके लिए रात में सोशल मीडिया की जगह मनोरंजन के दूसरे तरीके चुनें। दिनभर में खबरें देखने का एक निश्चित समय तय करें और सोने से ठीक पहले लगातार अपडेट चेक करने से बचें।
यदि फोन इस्तेमाल करने की वजह से नींद लगातार खराब हो रही है, दिनभर थकान रहती है या चिंता और तनाव बढ़ रहा है, तो अपनी आदतों पर ध्यान देने के साथ जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
अच्छी नींद के लिए आज से अपनाएं ये छोटे बदलाव
देर रात तक रील्स देखने की आदत को बदलने के लिए एक साथ कई बड़े बदलाव करने की जरूरत नहीं है। शुरुआत में सोने से एक घंटा पहले फोन अलग रखना, ग्रेस्केल मोड चालू करना, नोटिफिकेशन बंद करना और अलार्म के लिए अलग घड़ी इस्तेमाल करना जैसे छोटे कदम अपनाए जा सकते हैं।
याद रखें: स्मार्टफोन का इस्तेमाल अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन जब यह आपकी नींद और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगे, तो इसकी आदत पर नियंत्रण रखना जरूरी है। नियमित नींद और संतुलित डिजिटल दिनचर्या मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। लगातार नींद की परेशानी या मानसिक तनाव होने पर योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें।
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