कोलंबो टेस्ट के ड्रॉ होने के बाद भारतीय टीम की रणनीति को लेकर पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने सवाल उठाए हैं। कैफ ने खासतौर पर कप्तान शुभमन गिल के गेंदबाजी बदलाव, फील्डिंग सेटअप और आखिरी दिन की रणनीति पर अपनी नाराजगी जाहिर की।
उनका कहना है कि मैच के पांचवें दिन पिच पर गेंद के टर्न होने की पर्याप्त गुंजाइश थी और भारत के पास श्रीलंकाई बल्लेबाजों पर दबाव बनाने का अच्छा मौका था। इसके बावजूद भारतीय टीम निर्णायक मौकों का फायदा नहीं उठा सकी।
गिल को कप्तानी में अभी करना होगा काफी सुधार
मोहम्मद कैफ ने अपने विश्लेषण में कहा कि शुभमन गिल ने कप्तान के तौर पर अभी लंबा सफर तय करना है। उनके मुताबिक गिल में क्षमता जरूर है, लेकिन फिलहाल उन्हें एक अनुभवी और पूरी तरह तैयार टेस्ट कप्तान मानना जल्दबाजी होगी।
कैफ को कोलंबो टेस्ट के दौरान भारत के गेंदबाजी बदलाव कई मौकों पर समझ से बाहर लगे। उन्होंने कहा कि गेंदबाज को केवल एक ओवर कराने के बाद बदलने से उसे लय हासिल करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलता। टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाज पर लगातार दबाव बनाने के लिए गेंदबाजों को लंबे और योजनाबद्ध स्पेल देना महत्वपूर्ण होता है।
फील्डिंग में आक्रामकता की कमी
कैफ ने भारतीय टीम की फील्ड प्लेसमेंट को भी निशाने पर लिया। उनके अनुसार पांचवें दिन पिच से स्पिनरों को मदद मिल रही थी, इसलिए भारत को ज्यादा आक्रामक फील्ड लगाकर विकेट हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए थी।
इसके बजाय फील्डिंग में ज्यादा रक्षात्मक रवैया दिखाई दिया। श्रीलंका की दूसरी पारी में भारतीय गेंदबाज केवल तीन विकेट हासिल कर सके और आखिरकार मुकाबला बराबरी पर समाप्त हो गया।
कैफ के मुताबिक भारत के पास मैच जीतने का मौका था, इसलिए आखिरी दिन की रणनीति और ज्यादा आक्रामक होनी चाहिए थी।
सोनल दिनुशा के खिलाफ गेंदबाजों की रणनीति पर सवाल
श्रीलंकाई बल्लेबाज सोनल दिनुशा के प्रदर्शन ने भी कैफ का ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि दिनुशा पहले भी शानदार बल्लेबाजी कर चुके थे, इसके बावजूद भारतीय गेंदबाज उनके खिलाफ कोई प्रभावी रणनीति नहीं बना सके।
दिनुशा ने कोलंबो टेस्ट की दोनों पारियों में शतक लगाए। कैफ के अनुसार ऐसे बल्लेबाज के खिलाफ गेंदबाजों को उसकी कमजोरी के मुताबिक योजना बनानी चाहिए थी।
उन्होंने सवाल उठाया कि भारतीय गेंदबाजों ने उन्हें लगातार शॉर्ट गेंदों से परेशान करने की कोशिश क्यों की, जबकि फुल लेंथ गेंदों से उन्हें ज्यादा मुश्किल में डाला जा सकता था। कैफ का मानना है कि किसी बल्लेबाज की पिछली पारियों का विश्लेषण करके उसके खिलाफ स्पष्ट प्लान तैयार करना जरूरी है।
फॉलोऑन का फैसला कैफ को लगा सही
कैफ ने शुभमन गिल के फॉलोऑन के फैसले को गलत नहीं बताया। उनका मानना है कि भारत के पास मुकाबला जीतने का मौका था और फॉलोऑन देकर टीम ने उसी इरादे को दिखाया।
हालांकि, इसके बाद पांचवें दिन जिस तरह गेंदबाजी की गई, उससे कैफ संतुष्ट नहीं दिखे। उनके अनुसार फॉलोऑन देने के बाद भारतीय टीम को लगातार विकेट लेने की कोशिश करनी चाहिए थी, लेकिन जरूरी दबाव कायम नहीं हो सका।
आखिरी दिन विराट कोहली की कमी महसूस हुई
कैफ ने भारतीय टीम की बॉडी लैंग्वेज का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब मैदान पर विकेट नहीं मिलते हैं, तब खिलाड़ियों की ऊर्जा और आक्रामक रवैया काफी अहम हो जाता है।
उनके मुताबिक कोलंबो टेस्ट के अंतिम दिन टीम में विराट कोहली जैसी ऊर्जा की कमी महसूस हुई। कैफ का मानना है कि कोहली जैसे खिलाड़ी मैदान पर लगातार खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाते हैं और मुश्किल समय में टीम की ऊर्जा बनाए रखते हैं।
ध्रुव जुरेल की पारी से मिला बड़ा पॉजिटिव
मोहम्मद कैफ ने मैच के सकारात्मक पहलुओं की भी चर्चा की। उन्होंने युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज ध्रुव जुरेल की बल्लेबाजी को भारतीय टीम के लिए अच्छी खबर बताया।
जुरेल ने कोलंबो टेस्ट में शतक लगाकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। कैफ के मुताबिक वह तकनीकी रूप से मजबूत बल्लेबाज हैं और उनके पास अलग-अलग परिस्थितियों में रन बनाने के लिए पर्याप्त शॉट्स हैं।
गॉल टेस्ट में बड़ी पारी नहीं खेल पाने के बाद जुरेल ने कोलंबो में दबाव के बीच शतक लगाकर शानदार वापसी की। कैफ ने इसे उनके आत्मविश्वास और परिस्थितियों के अनुसार बल्लेबाजी करने की क्षमता का संकेत बताया।
टीम इंडिया के लिए बड़ा सबक
कोलंबो टेस्ट का नतीजा भले ही ड्रॉ रहा, लेकिन मोहम्मद कैफ के मुताबिक भारतीय टीम को इससे कई महत्वपूर्ण सबक मिले हैं। कप्तानी के फैसलों, गेंदबाजों के स्पेल, फील्ड प्लेसमेंट और विपक्षी बल्लेबाजों के खिलाफ रणनीति पर टीम को और बेहतर काम करने की जरूरत है।
वहीं ध्रुव जुरेल की शतकीय पारी भारतीय टीम के लिए इस मुकाबले की सबसे बड़ी सकारात्मक खबरों में से एक रही।
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