ग़ाज़ा युद्ध का मुख्य दोषी अमेरिका है, जिसने इज़राइल के नाजायज़ अस्तित्व को जाएज़ ठहराया है: मौलाना कल्बे जवाद नक़वी
फ़िलिस्तीन की वर्तमान स्थिति और गाजा के मज़लूमों के समर्थन में कॉन्फ्रेंस का आयोजन हुआ,
यह कार्यक्रम मदरसातुज़-ज़हरा की ओर से मजलिसे उलमा-ए-हिन्द की निगरानी में मदसरे की छात्रों और महिलाओं के लिए आयोजित हुआ।
लखनऊ 8 अप्रैल: अंतराष्ट्रीय कुद्स दिवस के मौक़े पर मदरसातुज़ ज़हरा इमामबाड़ा ग़ुफ़रानमआब में एक कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न उलेमा ने फ़िलिस्तीन की वर्तमान स्थिति और औपनिवेशिक शक्तियों की आपराधिक गतिविधियों के बारे में अपनी राय व्यक्त की। कॉन्फ्रेंस की शुरूआत क़ारी अमीर हमज़ा ने क़ुरआन की तिलावत से की।
मौलाना हसनैन बाकरी ने तक़रीर करते हुए कहा कि ज़ायोनीवाद का पूरा इतिहास अत्याचार और अन्याय से भरा है। आज भी ज़ायोनी अपने ज़ुल्म का इतिहास दोहरा रहे हैं और मज़लूम फिलिस्तीनियों पर ज़ुल्म कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मानवता की शुरुआत से ही दुनिया में दो निज़ाम मौजूद रही हैं, एक इलाही निज़ाम और दूसरा शैतानी निज़ाम। शैतानी निज़ाम यानि वर्तमान समय में इजराइल और उपनिवेशवाद शक्तियों का निज़ाम, जिसने पूरे विश्व को आतंकित कर रखा है, जो मानवता की हत्यारी और नैतिक मूल्यों को नकारने वाला है। मौलाना ने कहा कि ज़ायोनीवादियों ने एक योजना बनाई जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने पूरी दुनिया को अपना गुलाम बना लिया। आज अमेरिका और अन्य देशों में हुकूमत चाहे जिसकी हो,लेकिन उस पर ज़ायोनीवादियों का नियंत्रण है। उन्होंने शिक्षा और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में इतनी प्रगति की कि आज वे पूरी दुनिया पर राज कर रहे हैं। यह काम मुसलमानो को करना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्य से मुसलमानों ने ज्ञान और अर्थव्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया। संपूर्ण इस्लामी जगत में ईरान अकेला ऐसा देश है जिसने शिक्षा और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में तरक़्क़ी की है, यही कारण है कि आज ईरान के खिलाफ इजराइल और औपनिवेशिक शक्तियां सबसे अधिक सक्रिय हैं।

कार्यक्रम के अंत में मजलिसे उलमा-ए-हिन्द के महासचिव मौलाना सै० कल्बे जवाद नक़वी ने अध्यक्षीय भाषण देते हुए कहा कि पैगम्बरे इस्लाम (स.अ.व.स) की एक हदीस है कि अगर कोई मुसलमान किसी मज़लूम की फरयाद सुनता है, भले ही फरयादी का धर्म और आस्था कुछ भी हो, और वह मज़लूम की फरयाद का जवाब नहीं देता है, तो वह मुसलमान नहीं है। इस हदीस के सन्दर्भ में मुस्लिम हुकूमतों को क्या कहा जाना चाहिए? क्योंकि मज़लूम फ़िलिस्तीनी लगातार फर्याद कर रहें हैं और वो मूकदर्शक बने हुए हैं। यह उनकी कायरता और गुलामी का सबसे बुरा उदाहरण है। ये मुस्लिम हुक्मरान फिलिस्तीन के मज़लूमो के खिलाफ इज़राइल की हर संभव मदद कर रहे हैं। लाल सागर में हौसियों के हमलों की वजह से अब सहायता सामग्री जॉर्डन की बंदरगाह से पहुंचाई जा रही है। सऊदी अरब और अन्य मुस्लिम देशों से सहायता सामग्री इज़रायल पहुंच रही है। यानी जो भूख से पीड़ित हैं उन्हें सहायता से वंचित किया जा रहा है और जो ज़ालिम हैं उन्हें पूरा समर्थन दिया जा रहा है।

मौलाना ने कहा कि अगर आप इज़राइल के लक्ष्यों को समझना चाहते हैं, तो उसके राष्ट्रीय ध्वज को देखें, इसमें दो नीली रेखाएं हैं, एक ऊपर और दूसरी नीचे, एक रेखा दरया-ए-नील को संदर्भित करती है और दूसरी नीली रेखा फरात नदी को संदर्भित करती है। उनका दावा है कि दरया-ए-नील से लेकर फ़रात तक की सारी ज़मीन पर इज़राइल का मालिकाना हक़ है। अब जो अरब देश इजराइल का समर्थन कर रहे हैं उन्हें जवाब देना चाहिए कि क्या वे इस दावे को सच मानते हैं? क्योंकि इस तरह इजराइल मक्का, मदीना, कर्बला, नजफ़ और अधिकांश अरब क्षेत्रों पर अपना अधिकार जताता है। मौलाना ने कहा कि गाजा में जो इजराइली जुल्म जारी है, उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। अगर अमेरिका हथियारों की आपूर्ति बंद कर दे, तो इज़राइल इस युद्ध में कहीं नहीं ठहरेगा, लेकिन एक ओर अमेरिका दिखावे के लिए इज़राइल की बर्बरता की निंदा कर रहा है, और दूसरी ओर उसे लगातार हथियारों की आपूर्ति किये जा रहा है। याद रखें इस युद्ध का असली दोषी अमेरिका है, जिसने इज़राइल को जन्म दिया और उसके नाजायज अस्तित्व को सही ठहराने के लिए हर संभव प्रयास किया।
कार्यक्रम में मौलाना मिनहाल हुसैन, मौलाना इस्तफ़ा रज़ा और मौलाना सरताज हैदर ज़ैदी ने भी ख़िताब किया। कार्यक्रम में मौलाना साबिर अली इमरानी ने ग़ाज़ा के मज़लूमों के समर्थन में शेर पेश किये और ग़ाज़ा की महिलाओं के सम्मान पेश किया। कार्यक्रम में मौलाना निसार अहमद ज़ैनपुरी, मौलाना डॉ. ज़फर नक़ी, आदिल फ़राज़ और अन्य लोग मौजूद थे। यह कार्यक्रम मदरसातुज़-ज़हरा की ओर से मजलिसे उलमा-ए-हिन्द की निगरानी में मदसरे की छात्रों और महिलाओं के लिए आयोजित हुआ। कार्यक्रम का संचालन मौलाना इस्तफ़ा रज़ा ने किया।
Global Express Live