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बच्चों के दांत काले पड़ने की वजह क्या है? रात में दूध पीने की आदत पर दें ध्यान

अगर 1 से 3 साल की उम्र के बच्चे के दांतों पर काले या भूरे निशान दिखाई देने लगे हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इस उम्र में दांतों में कैविटी और सड़न की समस्या कई कारणों से हो सकती है। इनमें रात के समय बार-बार दूध पीना और दूध पीने के बाद दांत साफ किए बिना सो जाना भी एक संभावित जोखिम माना जाता है।

दूध बच्चों के लिए पोषण का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है, लेकिन रात में बार-बार दूध पीने की आदत और उसके बाद ब्रश न करना दांतों की सेहत के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।

दूध नहीं, दूध पीने के बाद दांत साफ न करना बन सकता है समस्या

माता-पिता अक्सर मानते हैं कि दूध हेल्दी है, इसलिए इससे दांतों को नुकसान नहीं हो सकता। हालांकि, दूध में प्राकृतिक शर्करा मौजूद होती है। यदि बच्चा रात में बार-बार दूध पीता है और उसके बाद दांतों की सफाई नहीं होती, तो लंबे समय तक दांतों पर शर्करा का संपर्क कैविटी के जोखिम को बढ़ा सकता है।

खासकर तब समस्या बढ़ सकती है जब बच्चा दूध पीने के तुरंत बाद सो जाए और रातभर दांतों की सफाई न हो।

ब्रश करने के बाद दूध मांगता है बच्चा तो बदलें रूटीन

कई बच्चों में सोने से पहले ब्रश करने के बाद फिर दूध पीने की आदत होती है। ऐसे में ब्रश करने का फायदा कम हो सकता है, क्योंकि दूध पीने के बाद दांत दोबारा साफ नहीं किए जाते।

इसलिए कोशिश करें कि सोने की दिनचर्या में दूध को ब्रश से पहले रखा जाए। बच्चे को दूध पिलाने के बाद दांत साफ करवाएं और इसके बाद उसे कहानी सुनाकर, बातचीत करके या प्यार से सुलाने की आदत डालें।

यानी रात की रूटीन का बेहतर क्रम हो सकता है—दूध, ब्रश और फिर सोने की तैयारी।

रात में बच्चा दोबारा दूध मांगे तो क्या करें?

अगर बच्चा रात में उठकर दूध मांगता है, तो उसकी आदत अचानक बदलना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में धीरे-धीरे रात में दूध की मांग कम करने की कोशिश की जा सकती है।

रात में बच्चा जागने पर हर बार दूध देने के बजाय पानी देने की आदत डाली जा सकती है। हालांकि, छोटे बच्चों की पोषण संबंधी जरूरतें अलग होती हैं, इसलिए रात का दूध पूरी तरह बंद करने से पहले बच्चे के डॉक्टर या बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

1 से 3 साल की उम्र में दांतों की ऐसे करें देखभाल

इस उम्र में बच्चों के दांतों की नियमित सफाई बेहद जरूरी है। कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें:

  • बच्चे के दांत दिन में दो बार साफ करवाएं।
  • 3 साल से कम उम्र में फ्लोराइड टूथपेस्ट की बहुत थोड़ी मात्रा, लगभग चावल के दाने जितनी इस्तेमाल करें।
  • ब्रश करते समय माता-पिता बच्चे की मदद करें और निगरानी रखें।
  • रात में सोने से पहले होने वाली ब्रशिंग को विशेष रूप से नियमित रखें।
  • बार-बार मीठे पेय, टॉफी और मीठे स्नैक्स देने से बचें।
  • खाने-पीने के बीच बार-बार मीठी चीजें देने की आदत कम करें।

बच्चे की पहली डेंटल जांच कब होनी चाहिए?

बच्चे के दांत निकलने के बाद उनकी देखभाल शुरू कर देनी चाहिए। आमतौर पर बच्चे की पहली डेंटल जांच पहला जन्मदिन आने तक कराने की सलाह दी जाती है। इससे शुरुआती कैविटी या दांतों से जुड़ी दूसरी समस्याओं का समय रहते पता लगाया जा सकता है।

अगर बच्चे के दांत पहले से काले, भूरे या टूटते हुए दिखाई दे रहे हैं, मसूड़ों में सूजन है या बच्चे को दर्द हो रहा है, तो केवल रात में दूध की आदत को कारण मानने के बजाय बाल दंत चिकित्सक से जांच कराना जरूरी है।

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