देश में अगस्त और सितंबर के दौरान अच्छी बारिश की उम्मीद कर रहे लोगों के लिए मौसम से जुड़ा नया अनुमान चिंता बढ़ाने वाला हो सकता है। ताजा पूर्वानुमानों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दूसरे चरण में देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज होने की संभावना है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश हो सकती है, लेकिन अधिकांश इलाकों में बारिश का वितरण असमान रहने के संकेत हैं।
कई राज्यों में कम बारिश की संभावना
अनुमानों के मुताबिक अगस्त और सितंबर के दौरान देशभर में कुल वर्षा सामान्य स्तर से कम रह सकती है। इन दो महीनों के लिए दीर्घकालिक औसत (Long Period Average) 422.8 मिमी माना जाता है, लेकिन इस बार वर्षा इसके 94 प्रतिशत से भी कम रहने का अनुमान है। इसका असर खेती, जल संसाधनों और दैनिक जीवन पर पड़ सकता है।
कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश के आसार
दक्षिण भारत के कई हिस्सों, मध्य भारत, उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ क्षेत्रों तथा पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के चुनिंदा इलाकों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं देश के बड़े हिस्से में सामान्य से कम वर्षा होने के संकेत हैं। इसका मतलब है कि इस बार पूरे देश में मॉनसून का असर एक समान नहीं रहेगा।
अगस्त में भी कमजोर रह सकती है बारिश
अकेले अगस्त महीने के दौरान भी वर्षा सामान्य से कम रहने का अनुमान है। अगस्त का औसत वर्षा स्तर 254.9 मिमी माना जाता है, लेकिन इस बार इसके भी सामान्य से नीचे रहने की संभावना है। हालांकि पूर्वी प्रायद्वीपीय भारत, उत्तर-पश्चिम भारत, मध्य भारत के कुछ हिस्सों और पूर्वोत्तर के चुनिंदा क्षेत्रों में सामान्य या उससे अधिक बारिश हो सकती है।
पुराने रिकॉर्ड क्या बताते हैं?
पिछले करीब 120 वर्षों के वर्षा आंकड़ों पर नजर डालें तो अगस्त महीने में बारिश का पैटर्न लगातार बदलता रहा है। हाल के वर्षों में सामान्य से कम बारिश वाले वर्षों की संख्या बढ़ी है और वर्षा का वितरण पहले की तुलना में अधिक अनिश्चित दिखाई देता है। यही वजह है कि इस बार के कमजोर मॉनसून के अनुमान को गंभीर माना जा रहा है।
बढ़ सकती है गर्मी और उमस
बारिश में कमी का असर तापमान पर भी देखने को मिल सकता है। अगस्त के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, जिससे लोगों को गर्मी और उमस का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत, मध्य भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य या उससे कम रह सकता है। वहीं रात के तापमान में भी अधिकांश क्षेत्रों में सामान्य या उससे अधिक रहने के संकेत हैं।
अल नीनो का असर पड़ सकता है
प्रशांत महासागर में बनी अल नीनो जैसी मौसमी परिस्थितियां भारतीय मॉनसून को प्रभावित कर सकती हैं। यदि आने वाले हफ्तों में यह स्थिति और मजबूत होती है तो कई इलाकों में वर्षा सामान्य से कम रह सकती है। मौसम विशेषज्ञ लगातार इस पर नजर बनाए हुए हैं।
हिंद महासागर की स्थिति भी अहम
फिलहाल हिंद महासागर में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति सामान्य बनी हुई है। कुछ अंतरराष्ट्रीय मौसम मॉडल सितंबर के दौरान सकारात्मक IOD बनने के संकेत दे रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो कुछ क्षेत्रों में वर्षा को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है, हालांकि अभी इस पर निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
आगे भी जारी होंगे मौसम अपडेट
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार सितंबर के लिए विस्तृत वर्षा पूर्वानुमान अगस्त के अंत में जारी किया जाएगा। इसके अलावा साप्ताहिक और दैनिक मौसम बुलेटिन के माध्यम से राज्यों और आम लोगों को समय-समय पर मौसम की ताजा जानकारी उपलब्ध कराई जाती रहेगी।
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