Diabetes के मरीजों को पैरों में होने वाले हल्के दर्द या असहजता को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या नसों के नुकसान, खराब ब्लड सर्कुलेशन या गंभीर संक्रमण का शुरुआती संकेत हो सकती है।
नर्व डैमेज का संकेत हो सकता है दर्द
लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ा रहने से शरीर की नसें प्रभावित होने लगती हैं। इस स्थिति को Diabetic Neuropathy कहा जाता है। इसमें पैरों में झुनझुनी, जलन, सुन्नपन या हल्का दर्द महसूस हो सकता है।
शुरुआत में ये लक्षण सामान्य लग सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे पैरों की संवेदनशीलता कम होने लगती है। कई मामलों में मरीज को चोट लगने या घाव होने का एहसास तक नहीं होता।
खराब ब्लड सर्कुलेशन भी बन सकता है वजह
डायबिटीज का असर रक्त वाहिकाओं पर भी पड़ता है, जिससे पैरों में खून का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। इसे Peripheral Artery Disease या PAD कहा जाता है।
इस स्थिति में:
- चलते समय पैरों में दर्द हो सकता है
- पैरों में कमजोरी या सुन्नपन महसूस हो सकता है
- पैर ठंडे रहने लगते हैं
- घाव भरने में ज्यादा समय लग सकता है
अगर समय रहते इलाज न किया जाए तो यह स्थिति गंभीर रूप ले सकती है।
छोटे घाव भी बन सकते हैं खतरनाक
डायबिटीज के मरीजों में पैरों पर छोटे कट, छाले या त्वचा फटना भी संक्रमण का कारण बन सकता है। खराब ब्लड सर्कुलेशन और नर्व डैमेज की वजह से घाव जल्दी नहीं भरते। इससे अल्सर, टिश्यू डैमेज या गैंग्रीन जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें?
अगर पैरों में ये लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:
- लगातार दर्द या जलन
- सूजन या लालिमा
- सुन्नपन
- घाव या छाले
- रात में बढ़ने वाला दर्द
- पैरों का ठंडा पड़ना
पैरों की देखभाल कैसे करें?
डायबिटीज के मरीजों को रोजाना अपने पैरों की जांच करनी चाहिए। इसके अलावा:
- आरामदायक और सही फुटवियर पहनें
- नंगे पैर चलने से बचें
- ब्लड शुगर कंट्रोल में रखें
- नियमित व्यायाम करें
- पैरों को साफ और सूखा रखें
समय पर सावधानी और नियमित जांच से पैरों से जुड़ी गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
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