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राहुल गांधी के आरोपों पर किरेन रिजिजू का पलटवार, बोले- कांग्रेस शासन में कई आंदोलनों पर हुई थी पुलिस कार्रवाई

नई दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर राहुल गांधी की ओर से लगाए गए आरोपों पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस के पुराने शासनकाल की घटनाओं का हवाला देते हुए जवाब दिया है। रिजिजू ने कहा कि मौजूदा सरकार के लिए नागरिकों की सुरक्षा और उनकी जान सबसे महत्वपूर्ण है।

उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कांग्रेस सरकारों के दौरान हुए कई आंदोलनों और पुलिस कार्रवाई का उल्लेख किया। रिजिजू ने दावा किया कि अलग-अलग दौर में प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग और गोलीबारी की घटनाएं हुईं, जिनमें कई लोगों की जान गई।

मिजोरम में वायुसेना के इस्तेमाल का किया जिक्र

रिजिजू ने कांग्रेस शासनकाल के दौरान मिजोरम में नागरिकों के खिलाफ वायुसेना के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे राहुल गांधी के मौजूदा आरोपों के संदर्भ में रखते हुए कहा कि आज की सरकार प्रदर्शन और असहमति से निपटने के दौरान संयम को प्राथमिकता देती है।

उन्होंने कहा कि छात्रों के प्रदर्शन के दौरान भी सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना रही कि किसी की जान न जाए।

तेलंगाना आंदोलन का भी किया जिक्र

केंद्रीय मंत्री ने 1969 के तेलंगाना आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौर में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार आंदोलन के दौरान 369 लोगों की मौत हुई थी और मृतकों में बड़ी संख्या छात्रों की थी।

रिजिजू ने आरोप लगाया कि उस समय पुलिस फायरिंग में भी कई लोगों की जान गई थी।

तुर्कमान गेट घटना का हवाला

रिजिजू ने 1976 की तुर्कमान गेट घटना को भी अपने तर्क का हिस्सा बनाया। आपातकाल के दौरान दिल्ली में हुई इस घटना में बड़े पैमाने पर विरोध और पुलिस कार्रवाई की बात सामने आई थी।

इस घटना में मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे मिलते हैं। सरकारी स्तर पर कम संख्या बताई गई, जबकि अन्य ऐतिहासिक विवरणों में इससे अधिक लोगों के मारे जाने का उल्लेख किया गया है।

मुजफ्फरनगर नसबंदी विरोधी प्रदर्शन का उल्लेख

रिजिजू ने 1976 में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में नसबंदी अभियान के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन का भी जिक्र किया। प्रदर्शन के दौरान स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस फायरिंग की घटना सामने आई थी।

उन्होंने दावा किया कि इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी। हालांकि, इस घटना से जुड़े अलग-अलग ऐतिहासिक स्रोतों में मृतकों की संख्या अलग-अलग बताई जाती है।

मोगा आंदोलन और गुजरात नवनिर्माण आंदोलन का जिक्र

केंद्रीय मंत्री ने पंजाब के 1972 के मोगा आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि एक स्थानीय मुद्दे से शुरू हुआ विरोध बाद में हिंसक झड़प में बदल गया और पुलिस फायरिंग में छात्रों तथा राहगीरों समेत चार लोगों की मौत हुई।

इसके अलावा उन्होंने 1973-74 के गुजरात नवनिर्माण आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि यह छात्रों के नेतृत्व में शुरू हुआ बड़ा आंदोलन था। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों में इस आंदोलन के दौरान 100 से अधिक लोगों की मौत का उल्लेख मिलता है।

मुलताई किसान आंदोलन की घटना भी गिनाई

रिजिजू ने मध्य प्रदेश के मुलताई में 1998 के किसान आंदोलन का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे किसानों पर पुलिस फायरिंग हुई थी और इसमें कई किसानों की मौत हुई।

इस घटना में मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। शुरुआती रिपोर्टों में 17 मौतों का उल्लेख था, जबकि बाद के आंकड़ों में मृतकों की संख्या 24 तक बताई गई। बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए थे।

रिजिजू बोले- हमारी सरकार ने बरता संयम

केंद्रीय मंत्री ने इन घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में ऐसे कई आंदोलन हुए, जिनमें पुलिस कार्रवाई के दौरान लोगों की जान गई। उनका तर्क था कि मौजूदा सरकार ने विरोध प्रदर्शनों से निपटने के दौरान अधिक संयम बरतने की नीति अपनाई है।

राहुल गांधी की ओर से लगाए गए आरोपों पर रिजिजू का यह जवाब अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के जरिए सरकार और पिछली सरकारों की कार्यशैली की तुलना कर रहे हैं।

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