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‘बप्पा बुलाते हैं तो आना ही पड़ता है’, खराब तबीयत के बावजूद गणपति दर्शन के लिए पहुंचे जितेंद्र

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता जितेंद्र गणपति उत्सव के मौके पर पुणे पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान गणेश के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। तबीयत ठीक नहीं होने के बावजूद उन्होंने गणपति बप्पा के दर्शन करने का कार्यक्रम नहीं टाला। इस दौरान उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जिसमें वह गणपति मंडल में दर्शन करते हुए नजर आ रहे हैं।

जितेंद्र ने इस मौके पर कहा कि जब बप्पा खुद बुलाते हैं तो फिर किसी भी परिस्थिति में उनके दर्शन के लिए जाना जरूरी हो जाता है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के बावजूद वह खुद को रोक नहीं पाए।

तबीयत खराब थी, फिर भी पहुंचे गणपति मंडल

जितेंद्र पुणे के राजाराम गणपति मंडल में पहुंचे थे। इस दौरान वह पारंपरिक कुर्ता-पायजामा पहने हुए नजर आए। वहां मौजूद लोगों से बातचीत के दौरान उन्होंने भगवान गणेश के प्रति अपनी आस्था और लगाव के बारे में बात की।

अभिनेता ने कहा कि उनके लिए बप्पा का बुलावा खास मायने रखता है। उनके मुताबिक, गणपति मंडल से जुड़े लोगों का स्नेह भी उनके साथ लंबे समय से रहा है और इसी वजह से वह तबीयत खराब होने के बावजूद यहां आने से खुद को रोक नहीं सके।

उन्होंने कहा कि अगर बप्पा बुलाते हैं तो फिर परिस्थितियां चाहे जैसी हों, उनके दर्शन के लिए पहुंचना ही होता है।

आखिरी समय तक अपने पैरों पर चलने की इच्छा

जब जितेंद्र से पूछा गया कि वह भगवान गणेश से क्या प्रार्थना करते हैं, तो उन्होंने अपनी एक खास इच्छा साझा की। अभिनेता ने कहा कि वह जीवन के अंतिम समय तक शारीरिक रूप से स्वतंत्र रहना चाहते हैं और अपने पैरों पर चलकर बप्पा के दर्शन करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि जब तक जीवन है, वह खुद चलकर भगवान गणेश के दर्शन करते रहें। उन्होंने मजाकिया अंदाज में यह भी कहा कि अगर कभी ऐसा संभव न हो तो वह स्ट्रेचर पर भी बप्पा के दर्शन करने पहुंचेंगे।

जितेंद्र ने भगवान गणेश से अपने परिवार के लिए सुख-शांति, आपसी प्रेम और अच्छे स्वास्थ्य की कामना भी की।

गणपति उत्सव से बचपन से जुड़ा है रिश्ता

जितेंद्र ने बातचीत के दौरान गणेश उत्सव से जुड़ी अपनी पुरानी यादों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि गणपति उत्सव उनके परिवार और जीवन का लंबे समय से हिस्सा रहा है।

अभिनेता के मुताबिक, मुंबई स्थित उनके घर में करीब 52 वर्षों से गणेश उत्सव मनाया जा रहा है। उन्होंने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि जिस बिल्डिंग में वह रहते थे, वहां बड़ी संख्या में परिवार रहते थे।

उस इमारत में कई मंजिलें थीं और हर मंजिल पर बड़ी संख्या में कमरे थे। ज्यादातर परिवार महाराष्ट्रियन और कोंकणी थे, जबकि उनका परिवार वहां अलग पृष्ठभूमि से था। इसके बावजूद घर का माहौल पूरी तरह स्थानीय संस्कृति से जुड़ा हुआ था।

एक पंखे वाले घर से बॉलीवुड तक का सफर

जितेंद्र ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि उनका परिवार साधारण परिस्थितियों में रहता था। उन्होंने कहा कि उस दौर में उनके घर में सिर्फ एक पंखा हुआ करता था, जबकि आज के समय में मुंबई के छोटे से फ्लैट में भी एसी जैसी सुविधाएं आम हो गई हैं।

उन्होंने बताया कि करीब 17 साल तक उन्होंने उसी साधारण माहौल में जीवन बिताया। इसके बाद किस्मत बदली और उन्हें फिल्मों में काम करने का मौका मिला। धीरे-धीरे उनका फिल्मी करियर आगे बढ़ा और वह बॉलीवुड के लोकप्रिय अभिनेताओं में शामिल हो गए।

जितेंद्र के लिए गणपति उत्सव आज भी सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उनके बचपन, परिवार और पुराने जीवन से जुड़ी भावनाओं का हिस्सा है। यही वजह है कि खराब स्वास्थ्य के बावजूद उन्होंने पुणे पहुंचकर बप्पा के दर्शन किए।

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