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“‘अपनी जिम्मेदारियों पर ध्यान दें, ममदानी’, उमर खालिद के समर्थन को लेकर भारत का सख्त जवाब”

 

Umar Khalid Case: 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के आरोपी उमर खालिद से जुड़े कानूनी मामले में न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी की टिप्पणी अब उनके लिए विवाद का कारण बन गई है. भारत सरकार ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ शब्दों में कहा है कि उन्हें न्यूयॉर्क की जनता ने जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में पूर्वाग्रह के आधार पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए.

दरअसल, न्यूयॉर्क के मेयर पद का कार्यभार संभालने के बाद जोहरान ममदानी की एक पुरानी चिट्ठी सार्वजनिक हुई, जिसमें उन्होंने उमर खालिद के प्रति सहानुभूति जताते हुए भारत की न्यायपालिका पर सवाल उठाने की कोशिश की थी. इस पत्र में खालिद पर लगे गंभीर आरोपों को नजरअंदाज करते हुए न्यायिक प्रक्रिया पर टिप्पणी की गई थी, जिसे लेकर भारत में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई.

‘न्यायपालिका की स्वतंत्रता का सम्मान करें’
शुक्रवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बिना नाम लिए न्यूयॉर्क के मेयर पर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘हम जनप्रतिनिधियों से उम्मीद करते हैं कि वे दूसरे देशों के लोकतंत्रों में न्यायपालिका की स्वतंत्रता का सम्मान करें.’ उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस तरह की टिप्पणियां अनुचित हैं और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को संयम बरतना चाहिए. गौरतलब है कि पिछले साल दिसंबर में उमर खालिद के पिता ने न्यूयॉर्क में ममदानी से मुलाकात की थी, इसी दौरान उन्हें एक नोट दिया गया था, जिस पर पहले भी विवाद हो चुका है.

‘मिली जिम्मेदारियों पर फोकस करें’
विदेश मंत्रालय ने सख्त लहजे में कहा कि जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों को अपने व्यक्तिगत पूर्वाग्रह सार्वजनिक नहीं करने चाहिए. मंत्रालय के अनुसार, ऐसी टिप्पणियों के बजाय बेहतर होगा कि वे उन जिम्मेदारियों पर ध्यान दें, जो उन्हें सौंपी गई हैं.

उमर खालिद के लिए लिखा था नोट
बताया जाता है कि जोहरान ममदानी का जो नोट वायरल हुआ था, उसमें उन्होंने दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद उमर खालिद के प्रति सहानुभूति जताते हुए लिखा था, ‘हम सब आपके बारे में सोच रहे हैं.’ यह टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई, जब उमर खालिद पर दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े गंभीर आरोप हैं. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें जमानत देने से साफ इनकार कर दिया था. हालांकि, दिल्ली दंगों के अन्य पांच आरोपियों को पांच साल बाद कठोर शर्तों के साथ जमानत दी गई है, लेकिन उमर खालिद और उसके कथित सहयोगी शरजील इमाम को जेल से बाहर रखने को देश की सर्वोच्च अदालत ने उचित नहीं माना है.

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