असम सरकार ने राज्य के सभी 35 जिलों के लिए गार्जियन मंत्रियों की नियुक्ति कर प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 16 कैबिनेट मंत्रियों को अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी सौंपते हुए उन्हें विकास कार्यों की निगरानी और समन्वय का दायित्व दिया है।
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक गार्जियन मंत्री अपने आवंटित जिलों में विभिन्न सरकारी विभागों के बीच तालमेल स्थापित करेंगे और विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर नजर रखेंगे। इसके अलावा प्राकृतिक आपदा, बाढ़, भूस्खलन या अन्य आपात स्थितियों में ये मंत्री संबंधित जिलों के लिए प्रमुख संपर्क अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल जिला प्रशासन और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगी, जिससे विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी और आम लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।
किन मंत्रियों को मिली कौन-सी जिम्मेदारी
- रमेश्वर तेली – तिनसुकिया और जोरहाट
- अतुल बोरा – कामरूप (मेट्रो) और धेमाजी
- चरण बोरो – कोकराझार, बक्सा और चिरांग
- अजंता नियोग – मोरीगांव और कामरूप
- अश्विनी राय सरकार – बोंगाईगांव और बरपेटा
- अशोक सिंघल – दरांग और धुबड़ी
- बिमल बोरा – शिवसागर और चराइदेव
- बिस्वजीत दैमारी – नलबाड़ी और सोनितपुर
- जयंत मल्ला बरुआ – तामुलपुर और ग्वालपाड़ा
- कौशिक राय – श्रीभूमि और हैलाकांडी
- केशव महंत – दक्षिण सलमारा-मनकाचर और उत्तर लखीमपुर
- कृष्णेंदु पॉल – दीमा हसाओ और कछार
- नीलिमा देवी – बजाली और उदालगुड़ी
- पीयूष हजारिका – नगांव, होजाई, कार्बी आंगलोंग और पश्चिम कार्बी आंगलोंग
- रणोज पेगू – बिस्वनाथ और गोलाघाट
- सुशांत बोरगोहेन – डिब्रूगढ़ और माजुली
गौरतलब है कि हाल ही में असम मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद सरकार प्रशासनिक जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण की प्रक्रिया में जुटी हुई है। गार्जियन मंत्री व्यवस्था को राज्य के विकास कार्यक्रमों की निगरानी और जिलों में त्वरित निर्णय लेने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे स्थानीय प्रशासन को भी बेहतर मार्गदर्शन और सहयोग मिलने की उम्मीद है।
राज्य सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और जिलों की समस्याओं का समाधान अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।
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