Breaking News

‘गवाहों के बयान के आधार पर केस टालना सही नहीं, संवेदनशील मामलों की सुनवाई रोज हो’ : सुप्रीम कोर्ट

ChatGPT said:

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि विशेष रूप से संवेदनशील मामलों में दिन-प्रतिदिन सुनवाई की प्रथा फिर से अपनाई जानी चाहिए। अदालत ने त्वरित सुनवाई के अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 21 में अंतर्निहित मानते हुए कहा कि सभी हाई कोर्ट संबंधित जिला कोर्ट के लाभ के लिए इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा के लिए समिति गठित करें।

जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि दिन-प्रतिदिन सुनवाई की पुरानी प्रथा को पुनः लागू करने के लिए पुलिस के कामकाज सहित वर्तमान सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक परिदृश्य को समझना आवश्यक है।

पीठ ने बताया कि तीस साल पुरानी यह प्रथा विशेष रूप से महत्वपूर्ण या संवेदनशील मामलों में पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और अब इसे फिर से अपनाने का समय आ गया है। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश CBI की याचिका पर आया, जिसमें पिछले साल एक बलात्कार मामले में आरोपी को जमानत देने के हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी।

पीठ ने कहा कि गवाहों के बयान के बाद भी कोर्ट अक्सर ‘टुकड़ों में’ मामलों पर विचार करती है, जिससे मुकदमे महीनों या वर्षों तक चलते रहते हैं। कानूनी स्थिति यह है कि गवाहों के बयान के बाद संबंधित कोर्ट को दिन-प्रतिदिन सुनवाई जारी रखनी चाहिए, जब तक सभी गवाहों के बयान नहीं हो जाते, सिवाय उन गवाहों के जिन्हें सरकारी वकील ने छोड़ दिया हो।

पीठ ने निर्देश दिया कि हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जिला न्यायालयों को परिपत्र जारी करें, जिसमें मामलों की शीघ्र सुनवाई को सुनिश्चित करने के उपाय शामिल हों। सुनवाई 31 दिसंबर तक पूरी की जानी चाहिए।

About GE-Live

Check Also

CM विजय को हिंदू धर्म अपनाने के लिए नहीं कहा गया, मंदिर में आस्था जताना ही काफी: मद्रास हाई कोर्ट

मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु के आगमिक मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर महत्वपूर्ण …