अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत और चीन पर टैरिफ लगाए जाने के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में सुधार देखने को मिला है। गलवान संघर्ष के बाद ऐसा पहली बार हुआ है, जब चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत आए और उन्होंने एस. जयशंकर, एनएसए अजीत डोभाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, वांग यी की इस यात्रा के दौरान भारत और चीन के बीच 10 अहम बिंदुओं पर सहमति बनी है, जिनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा का विस्तार, वीजा बहाली, डायरेक्ट फ्लाइट, ट्रेड और सीमा पर शांति जैसे मुद्दे शामिल हैं।
भारत-चीन के बीच 10 बिंदुओं पर सहमति
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दोनों देश स्थिर और दूरदर्शी द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने की दिशा में काम करेंगे और सहमत हुए बिंदुओं को गंभीरता से लागू करेंगे ताकि विकास को बढ़ावा मिल सके।
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चीन ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के लिए भारतीय प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया। भारत ने भी सम्मेलन के सफल आयोजन की उम्मीद जताई।
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दोनों देश एक-दूसरे के साथ बड़े राजनयिक आयोजनों में सहयोग करेंगे। चीन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की भारत द्वारा मेजबानी में समर्थन देगा और भारत चीन की मेजबानी में ऐसा ही करेगा।
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मतभेदों को द्विपक्षीय वार्ता से सुलझाने और उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित करने पर सहमति बनी।
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राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मनाने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
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भारत और चीन के बीच जल्द से जल्द सीधी उड़ानें बहाल करने और नए एयर सर्विस एग्रीमेंट पर सहमति बनी। साथ ही टूरिस्ट, बिजनेस और मीडिया वीजा की सुविधा भी बहाल की जाएगी।
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कैलाश मानसरोवर यात्रा जारी रखने और इसका विस्तार करने पर सहमति बनी।
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दोनों देशों ने ट्रेड और इन्वेस्टमेंट को और आसान बनाने के उपायों पर सहमति जताई।
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सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द बनाए रखने का निर्णय लिया गया।
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अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर संवाद बढ़ाने, WTO के तहत नियम-आधारित मल्टीलेटरल ट्रेडिंग सिस्टम बनाए रखने और विकासशील देशों के हितों की रक्षा करने वाले मल्टीपोलर वर्ल्ड को बढ़ावा देने पर सहमति बनी।
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