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अलास्का में बैठक से पहले पुतिन ने कैसे बिछाया जाल, और डोनाल्ड ट्रंप उसमें कैसे फंस गए? जानें, यह रूस के लिए कैसे फायदेमंद बना

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात 15 अगस्त 2025 को अलास्का में होने वाली है, जो कभी रूस का हिस्सा रहा है। यह बैठक सभी के लिए चौंकाने वाली है क्योंकि पिछले हफ्ते तक ट्रंप चेतावनी दे रहे थे कि यदि मास्को 8 अगस्त तक यूक्रेन युद्ध खत्म नहीं करता, तो उस पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जाएंगे।

पुतिन के लिए कूटनीतिक जीत
इन धमकियों के बावजूद ट्रंप का पुतिन से आमने-सामने मिलना रूस के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बहिष्कार की स्थिति में भी ट्रंप ने उन्हें अमेरिकी धरती पर आमंत्रित किया है, जो रूस के लिए प्रतीकात्मक रूप से बड़ी बात है।

जेलेंस्की बैठक से बाहर
ट्रंप ने यह बैठक यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की की गैरमौजूदगी में करने पर सहमति जताई है। इसका मतलब है कि यूक्रेन सीजफायर प्रस्ताव पर अमेरिका और रूस के बीच चर्चा बिना यूक्रेनी प्रतिनिधित्व के होगी। इसे पुतिन के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है, क्योंकि जेलेंस्की पहले ही कह चुके हैं कि यदि बैठक में यूक्रेन का प्रतिनिधि शामिल नहीं होगा, तो वे उस मीटिंग में लिए गए फैसले को मान्य नहीं करेंगे। बैठक की जगह का चयन भी पुतिन ने खुद किया है।

वारंट के बावजूद अमेरिका यात्रा
पुतिन ऐसे समय में अमेरिका आ रहे हैं जब अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया हुआ है। वारंट के बाद यह उनका पहला विदेश दौरा होगा, जिससे अलास्का यात्रा का महत्व और बढ़ गया है।

पुतिन अलास्का की यात्रा करने वाले पहले रूसी राष्ट्रपति बनेंगे। अलास्का उत्तरी अमेरिकी महाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी छोर पर स्थित है और यह अमेरिका का सबसे बड़ा राज्य है, जो देश के कुल क्षेत्रफल का लगभग 18% है। रूस और अलास्का के बीच सबसे कम दूरी लगभग 55 मील (88 किमी) है।

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