इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और देश के प्रमुख समाचार पत्रों में शामिल हॉरेट्ज के बीच विवाद अब कानूनी लड़ाई में बदलता नजर आ रहा है। नेतन्याहू ने अखबार और उससे जुड़े पत्रकारों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा करने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री ने अपने वकीलों को इस मामले में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में अखबार की रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों को पूरी तरह गलत और मनगढ़ंत बताया गया है। बयान के मुताबिक, नेतन्याहू ने अपने वकीलों से हॉरेट्ज, पत्रकार श्लोमी एल्डर और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ मानहानि की कार्रवाई शुरू करने को कहा है।
UAE के राष्ट्रपति से बातचीत के दावे को बताया गलत
विवाद के केंद्र में संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद और नेतन्याहू के बीच कथित फोन बातचीत का दावा है।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा है कि सितंबर 2023 की शुरुआत से लेकर 7 अक्टूबर के हमास हमले तक नेतन्याहू और UAE के राष्ट्रपति के बीच ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई थी, जैसा कि रिपोर्ट में दावा किया गया है।
बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और सैन्य सचिव ने उस अवधि के दौरान प्रधानमंत्री के कॉल रिकॉर्ड की जांच की। इस जांच में कथित बातचीत से संबंधित कोई प्रमाण नहीं मिला।
PMO ने रिकॉर्ड की जांच का किया दावा
प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, इजरायल और UAE के बीच उच्चस्तरीय राजनयिक बातचीत एक निर्धारित प्रक्रिया के जरिए होती है। इसके लिए अमीराती प्रतिनिधि प्रधानमंत्री कार्यालय में एक सुरक्षित संचार उपकरण के साथ पहुंचते हैं और बातचीत का रिकॉर्ड भी रखा जाता है।
PMO का कहना है कि संबंधित अवधि में प्रधानमंत्री कार्यालय में आने-जाने वाले लोगों के रिकॉर्ड की भी जांच की गई, लेकिन UAE के किसी प्रतिनिधि के प्रधानमंत्री कार्यालय आने की कोई प्रविष्टि नहीं मिली।
इजरायली पक्ष ने दावा किया कि सुरक्षा व्यवस्था के चलते प्रधानमंत्री कार्यालय में इस तरह की मुलाकात बिना आधिकारिक रिकॉर्ड और सुरक्षा प्रक्रिया के संभव नहीं है।
मिस्र की चेतावनी से जुड़े दावे पर भी सवाल
प्रधानमंत्री कार्यालय ने रिपोर्ट में मिस्र की ओर से संभावित हमले की चेतावनी दिए जाने से जुड़े दावे को भी गलत बताया है। बयान में कहा गया कि इस तरह के दावे पहले भी सामने आए थे, लेकिन बाद में उन्हें सही नहीं पाया गया।
नेतन्याहू के कार्यालय ने पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक उद्देश्य से तैयार की गई कहानी बताया है। साथ ही यह आरोप लगाया कि इस तरह के दावों का इस्तेमाल राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने और जनता का ध्यान दूसरे मुद्दों से हटाने के लिए किया जा रहा है।
7 अक्टूबर हमले को लेकर PMO ने उठाए सवाल
बयान में 7 अक्टूबर 2023 के हमले से पहले सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कहा गया कि हमले से पहले कुछ सुरक्षा अधिकारियों को संभावित खतरे के संकेत मिल चुके थे।
PMO ने दावा किया कि यदि संबंधित सुरक्षा एजेंसियां समय रहते सेना, खुफिया एजेंसी और अन्य सुरक्षा इकाइयों को कार्रवाई के निर्देश देतीं और प्रधानमंत्री को समय पर जानकारी उपलब्ध कराई जाती, तो स्थिति अलग हो सकती थी।
अखबार ने भी भेजे कानूनी नोटिस का जिक्र
दूसरी ओर, हॉरेट्ज की ओर से कहा गया कि अखबार और उससे जुड़े पत्रकारों श्लोमी एल्डर तथा रूथ युवाल के खिलाफ मानहानि की कार्रवाई से पहले चेतावनी वाला कानूनी पत्र भेजा गया है।
इससे स्पष्ट है कि दोनों पक्ष अब इस विवाद को कानूनी स्तर पर आगे ले जाने की तैयारी में हैं।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, पूरा मामला 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले से पहले इजरायली नेतृत्व को कथित तौर पर मिले चेतावनी संकेतों से जुड़ा है।
हॉरेट्ज की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद ने सितंबर 2023 के अंतिम दिनों में नेतन्याहू से फोन पर लंबी बातचीत की थी। रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत करीब 45 मिनट चली थी और इसमें हमास की ओर से संभावित बड़े हमले की चेतावनी दिए जाने का दावा किया गया।
नेतन्याहू कार्यालय ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि उपलब्ध कॉल रिकॉर्ड और कार्यालय से जुड़े दस्तावेजों में ऐसी बातचीत का कोई प्रमाण नहीं मिला है।
अब इस विवाद में मानहानि की संभावित कानूनी कार्रवाई के बाद मामला और गंभीर हो गया है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की ओर से इस दावे और उसके समर्थन में पेश किए जाने वाले रिकॉर्ड पर नजर रहेगी।
Global Express Live