नई दिल्ली: महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। संसद का मानसून सत्र समाप्त होने के बाद भी औपचारिक सत्रावसान की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि सरकार आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर संसद में आगे बढ़ सकती है।
इस बीच बीजेपी की ओर से महिला आरक्षण से जुड़े कानून को संसद से पारित कराने की मांग दोहराई गई है। पार्टी का कहना है कि यदि महिला सशक्तिकरण को लेकर राजनीतिक दल गंभीर हैं, तो उन्हें महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले प्रावधान का समर्थन करना चाहिए।
स्मृति ईरानी ने विपक्ष से मांगा समर्थन
बीजेपी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्षी दलों के नेताओं से महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार का सहयोग करने की अपील की है।
यह बयान राहुल गांधी के पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण और भारतीय समाज में मौजूद पितृसत्तात्मक सोच को लेकर दिए गए वक्तव्य के बाद सामने आया। स्मृति ईरानी ने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के लिए प्रस्तावित 33 प्रतिशत आरक्षण को लागू करने की दिशा में संसद को आगे बढ़ना चाहिए।
बीजेपी की इस अपील के बाद महिला आरक्षण के साथ परिसीमन को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
संसद का सत्रावसान नहीं होने से बढ़ी अटकलें
मानसून सत्र को 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था। हालांकि, इसके बाद औपचारिक सत्रावसान की प्रक्रिया को लेकर देरी ने राजनीतिक अटकलों को हवा दी है।
इसी वजह से यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार मौजूदा संसदीय प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर किसी समय महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित प्रस्ताव सदन में ला सकती है। हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से इन बिलों को लेकर कोई आधिकारिक कार्यक्रम या निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है।
राजनीतिक सूत्रों और विपक्षी नेताओं के बीच यह चर्चा भी है कि आने वाले कुछ हफ्तों में इन मुद्दों को लेकर सरकार कोई बड़ा कदम उठा सकती है।
कांग्रेस ने सत्रावसान में देरी पर उठाए सवाल
संसद के औपचारिक सत्रावसान में देरी को लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि संसद को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने और औपचारिक सत्रावसान के बीच आम तौर पर बहुत ज्यादा अंतर नहीं होता।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर इस देरी को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने पुराने उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि कुछ वर्षों में स्थगन और सत्रावसान के बीच काफी अंतर रहा है, लेकिन मौजूदा स्थिति में देरी का कारण स्पष्ट नहीं किया गया है।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या सरकार परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन को पारित कराने के लिए जरूरी राजनीतिक समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है।
महिला आरक्षण और परिसीमन का क्या है संबंध?
महिला आरक्षण से जुड़े प्रावधानों का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करना है। इसके लागू होने की प्रक्रिया परिसीमन से जुड़ी हुई है। यही वजह है कि महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
परिसीमन के जरिए लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं तथा सीटों के पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया होती है। ऐसे में परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ महिला आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन का रास्ता भी साफ हो सकता है।
फिलहाल क्या स्थिति है?
अभी महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े नए विधेयकों को संसद में पेश किए जाने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सरकार की ओर से अंतिम फैसला और संभावित समयसीमा सामने आना बाकी है।
फिलहाल बीजेपी के बयानों और विपक्ष की प्रतिक्रियाओं के बीच यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है। यदि सरकार इस दिशा में आगे बढ़ती है, तो संसद में इसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक बार फिर जोरदार बहस देखने को मिल सकती है।
Global Express Live