शारीरिक सेहत के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना भी उतना ही जरूरी है, लेकिन अक्सर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। आज के समय में बढ़ते काम के दबाव, सोशल मीडिया पर तुलना, असुरक्षा की भावना और अकेलेपन के कारण स्ट्रेस और एंग्जायटी की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। कई बार यह चिंता इतनी ज्यादा हो जाती है कि व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी—जैसे पढ़ाई, नौकरी और रिश्ते—पर बुरा असर पड़ने लगता है।
इसी तरह की एक मानसिक समस्या है Social Anxiety Disorder (SAD), जिसे आमतौर पर लोग शर्मीलापन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन जब यह समस्या बढ़ जाती है, तो व्यक्ति के लिए सामान्य सामाजिक परिस्थितियों का सामना करना भी मुश्किल हो जाता है।
क्या है सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर?
यह एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को लोगों के बीच जाने, नई जगहों पर जाने या अजनबियों से बातचीत करने में अत्यधिक डर और घबराहट महसूस होती है। ऐसे लोगों को हमेशा यह डर बना रहता है कि लोग उन्हें जज करेंगे या उनका मजाक उड़ाएंगे। यदि यह स्थिति लंबे समय (लगभग 6 महीने या उससे ज्यादा) तक बनी रहती है और दैनिक जीवन को प्रभावित करने लगती है, तो इसे डिसऑर्डर माना जाता है।
इसके प्रमुख लक्षण
- सामाजिक परिस्थितियों में जाने से डर लगना
- अजनबियों से बातचीत करने में घबराहट होना
- शर्मिंदा या अपमानित होने का डर बना रहना
- यह चिंता कि लोग आपकी घबराहट को नोटिस कर लेंगे
- लोगों के सामने बोलते समय पसीना आना, कांपना या आवाज लड़खड़ाना
- ऐसी स्थितियों से बचना, जहां सबका ध्यान आप पर हो
इसके कारण क्या हो सकते हैं?
- परिवार में किसी को पहले से यह समस्या होना
- बचपन में बुलींग या मजाक का शिकार होना
- सामाजिक रूप से नकारात्मक अनुभव
- आत्मविश्वास की कमी और नकारात्मक सोच
क्या करें अगर ये समस्या हो?
सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर का इलाज संभव है। इसके लिए विशेषज्ञ आमतौर पर काउंसलिंग या टॉक थेरेपी की सलाह देते हैं। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर दवाओं के जरिए दिमाग के केमिकल असंतुलन को भी नियंत्रित किया जा सकता है। सही समय पर पहचान और इलाज से व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है।
नोट: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। अगर आपको ऐसे लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो किसी योग्य डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
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