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आले सऊद और दहशतगर्दी के ख़िलाफ़ ‘मुर्दाबाद’ के नारे लगाये गए, साथ ही जन्नत-उल-बक़ी के पुनः निर्माण की मांग भी की गई।

जन्नत-उल-बक़ी के पुनः निर्माण के लिए आसिफी मस्जिद में हुआ विरोध प्रदर्शन, उलेमा ने कहा कि बाक़ी के निर्माण की अनुमंती दे सऊदी सरकार

लखनऊ 19 अप्रैल: जन्नत-उल-बक़ी के विध्वंस के खिलाफ और पवित्र मज़ारों के पुनः निर्माण के लिए आज जुमे की नमाज़ के बाद आसिफी मस्जिद में सऊदी अरब सरकार के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया गया। मजलिस-ए-उलमा-ए-हिंद की ओर से आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में आले सऊद और तकफ़ीरी दहशतगर्दी के ख़िलाफ़ ‘मुर्दाबाद’ के नारे लगाये गए, साथ ही जन्नत-उल-बक़ी के पुनः निर्माण की मांग भी की गई।

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए नायब इमामे जुमा मौलाना सरताज हैदर ज़ैदी ने कहा कि जन्नत-उल-बक़ी में तन्हा रसूल अल्लाह की बेटी की क़ब्र नहीं है बल्कि औलादे रसूल, अइम्मा ए मासूमीन, अस्हाबे रसूल और अज़्वाजे पैग़म्बर की भी क़ब्रें हैं, जिन्हें एक सदी पहले आले सऊद ने ध्वस्त कर दिया था, इसलिए सभी मुसलमानों को मिलकर बक़ी के पुनः निर्माण की मांग करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब आले सऊद की हुकूमत ख़त्म हो जाएगी और जन्नत-उल-बकी का पुनः निर्माण होगा।


मौलाना सईदउल-हसन नक़वी ने अपने संबोधन में कहा कि बक़ी में पैग़म्बर के परिवार, साथियों और पत्नियों की कब्रों को आले सऊद ने ध्वस्त कर दिया था ये कहते हुए कि जो लोग इन कब्रों पर जाते हैं वे उनकी इबादत करते हैं। यह केवल मुस्लिम दुनिया को धोखा देने के लिए था, क्योंकि कोई भी मुसलमान किसी कब्र की इबादत नहीं करता, बल्कि इन कब्रों का सम्मान करता है। दुनिया के हर धर्म में कब्रों का सम्मान करना मौजूद है। इसलिए मुसलमानों को तकफ़ीरी विचारों से धोखा न खाए और उनके इस्लाम विरोधी विचारों को समझने की कोशिश करें। मौलाना ने कहा कि हमारी मांग है कि हमारी धार्मिक आज़ादी का सम्मान करते हुए बक़ी के पुनः निर्माण की इजाज़त दी जाए।

मौलाना इस्तफा रजा ने संबोधन के दौरान कहा कि तकफीरी विचारों ने मुस्लिम दुनिया को बहुत नुकसान पहुंचाया है, उन्होंने यह कहकर कब्रों को ध्वस्त कर दिया कि यह तौहीद के खिलाफ है। इस ज़ुल्म का न सिर्फ शियों ने विरोध किया, बल्कि दुनिया भर के मुसलमानों ने भी इस विरोध में हिस्सा लिया। मौलाना ने कहा कि विरोध इसलिए किया जाता है ताकि ज़ालिमों को ज़ुल्म से रोका जाये। अगर ये एहतेजाज न हो तो ज़ालिम के हौसले बढ़ते जाएंगे और इसकी हिम्मतों में इज़ाफ़ा होता रहेगा। इसलिए ज्यादा से ज्यादा विरोध प्रदर्शन होना चाहिए ताकि ज़ालिम को और ज़ुल्म करने से रोका जा सके।

मौलाना शबाहत हुसैन और डॉ हैदर मेहंदी ने भी सऊदी हुकूमत से जन्नत-उल-बक़ी के पुनः निर्माण की मांग की और कहा कि हम ज़ालिमों के ख़िलाफ़ एहतेजाज कर रहे हैं ताकि उन्हें अधिक ज़ुल्म करने ने रोका जाये।

मौलाना आदिल फ़राज़ ने कहा कि जन्नत-उल-बक़ी की तामीर और बैतउल-मुक़द्दस की आज़ादी का मसला एक दूसरे से अलग नहीं है। याद रखना चाहिए जब तक क़ुद्स आज़ाद नहीं होगा जन्नत-उल-बक़ी का निर्माण भी मुमकिन नहीं है। क्योंकि ज़ायोनी क़ुद्स पर क़ब्ज़ा किये हुए हैं और यहूदियों की औलादे बक़ी पर कब्ज़ा किये हुए हैं।

अंत में मौलाना फ़िरोज़ हुसैन ज़ैदी ने दुआ कराई। विरोध प्रदर्शन में ग़ाज़ा में जारी इज़रायली बर्बरता के खिलाफ भी नारे लगाए गए और तत्काल युद्धविराम की मांग की गई।

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