मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच पाकिस्तान खुद को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है। हालांकि वह अपने क्षेत्रीय मुद्दों, खासकर अफगानिस्तान से जुड़े तनावों में उलझा हुआ है, फिर भी ईरान से जुड़े हालात में उसकी सक्रियता ने उसे वैश्विक सुर्खियों में ला दिया है। इसी बीच उसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से करीब 1.2 अरब डॉलर के लोन की मंजूरी भी मिल गई है, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
पाकिस्तान की इस बढ़ती भूमिका को लेकर भारत में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता Jairam Ramesh ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री Narendra Modi पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ऐसा देश, जिसकी आर्थिक हालत कमजोर है और जो बाहरी मदद पर निर्भर है, वह आज वैश्विक मंच पर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है—यह भारत की कूटनीतिक रणनीति पर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने पाकिस्तान की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वहां लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर रही हैं और वह लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय सहायता पर निर्भर रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान की छवि एक ऐसे देश की रही है, जहां से आतंकवाद को समर्थन मिलता रहा है।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि 2008 के मुंबई हमलों के बाद जिस तरह पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग किया गया था, अब वही देश फिर से स्वीकार्यता हासिल करता दिख रहा है। उनके अनुसार, यह स्थिति भारत की मौजूदा विदेश नीति की कमजोरियों को उजागर करती है।
उन्होंने अमेरिका के साथ भारत के संबंधों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री मोदी ने कई मौकों पर अमेरिका के साथ करीबी रिश्तों को प्रमुखता दी, लेकिन इसके बावजूद भारत को अपेक्षित कूटनीतिक लाभ नहीं मिल सका।
Donald Trump का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक राजनीति में कुछ फैसलों ने पाकिस्तान की स्थिति को मजबूत करने में भूमिका निभाई है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि केवल व्यक्तिगत रिश्तों पर आधारित विदेश नीति लंबे समय तक प्रभावी नहीं रह सकती।
पूरे मामले को लेकर देश की राजनीति में बहस तेज हो गई है, जहां एक ओर सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बदलते वैश्विक समीकरणों में भारत की रणनीति को लेकर चर्चा भी तेज हो गई है।
Global Express Live