हिंदी सिनेमा के चर्चित विवादों में शामिल रेखा और बिस्वजीत चटर्जी का पुराना किसिंग सीन एक बार फिर चर्चा में है। फिल्म ‘दो शिकारी’ के इस दृश्य को लेकर वर्षों पहले काफी विवाद हुआ था। अब बिस्वजीत चटर्जी की बेटी और अभिनेत्री पल्लवी चटर्जी ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि किसी भी अंतरंग दृश्य में सहमति बेहद जरूरी है, लेकिन उस समय सेट पर क्या हुआ था, इसकी जानकारी उनके पास नहीं है।
एक पॉडकास्ट बातचीत के दौरान पल्लवी से इस पुराने विवाद के बारे में सवाल पूछा गया। उन्होंने इस विषय पर विस्तार से बोलने में असहजता जताई और कहा कि किसी कलाकार के बच्चों के लिए अपने माता-पिता से जुड़े ऐसे सवालों का जवाब देना मुश्किल हो सकता है।
‘बच्चों के लिए ऐसे सवालों का जवाब देना असहज होता है’
पल्लवी चटर्जी ने कहा कि माता-पिता के पुराने निजी या विवादित प्रसंगों के बारे में उनके बच्चों से सवाल करना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, इस घटना के समय वह वहां मौजूद नहीं थीं, इसलिए इस बारे में कोई निश्चित राय देना उनके लिए सही नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि इस मामले से जुड़े सवाल उन लोगों से पूछे जाने चाहिए, जो उस समय सेट पर मौजूद थे। पल्लवी ने रेखा और उनके पिता बिस्वजीत चटर्जी का जिक्र करते हुए कहा कि घटना के प्रत्यक्ष गवाह ही इस बारे में बेहतर जानकारी दे सकते हैं।
अभिनेत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने पिता के बारे में किसी ऐसी घटना पर टिप्पणी नहीं करना चाहतीं, जिसके बारे में उन्हें व्यक्तिगत रूप से पूरी जानकारी नहीं है।
सहमति के मुद्दे पर क्या बोलीं पल्लवी चटर्जी?
किसिंग सीन को लेकर अपने पहले के बयान पर सफाई देते हुए पल्लवी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के साथ उसकी सहमति के बिना ऐसा व्यवहार करना गलत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरंग दृश्य फिल्माने से पहले संबंधित कलाकार की अनुमति लेना जरूरी है।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह रेखा और बिस्वजीत के मामले में यह तय नहीं कर सकतीं कि वास्तव में क्या हुआ था। उनके मुताबिक, वह उस समय वहां मौजूद नहीं थीं और उन्होंने खुद इस घटना को नहीं देखा था।
पल्लवी ने कहा कि यदि किसी कलाकार के साथ उसकी सहमति के बिना ऐसा हुआ था, तो यह गलत था। लेकिन केवल सुनी-सुनाई बातों के आधार पर किसी घटना के बारे में अंतिम निष्कर्ष देना उचित नहीं है।
पुराने विवाद को बार-बार उठाने पर भी जताई नाराजगी
पल्लवी चटर्जी ने इतने वर्षों बाद इस घटना को लेकर बार-बार सवाल पूछे जाने पर भी अपनी असहजता जाहिर की। उन्होंने कहा कि इंटरव्यू में सनसनीखेज पहलुओं को प्रमुखता देने के बजाय घटनाओं को सही संदर्भ में पेश किया जाना चाहिए।
उनका मानना था कि किसी विवादित घटना पर चर्चा करते समय उन लोगों का पक्ष जानना जरूरी है, जो वास्तव में उस समय मौजूद थे। उन्होंने कहा कि जहां किसी व्यक्ति की प्रत्यक्ष जानकारी नहीं है, वहां उसके बयान को घटना की पुष्टि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
क्या था रेखा और बिस्वजीत का चर्चित किसिंग सीन?
यह विवाद फिल्म ‘दो शिकारी’ से जुड़ा है, जिसे शुरुआत में ‘अनजाना सफर’ नाम से बनाया गया था। फिल्म में रेखा और बिस्वजीत चटर्जी के बीच एक लंबा किसिंग सीन फिल्माया गया था। उस समय रेखा काफी कम उम्र की थीं और यह उनकी शुरुआती फिल्मों में से एक थी।
रेखा की जीवनी Rekha: The Untold Story, जिसे यासिर उस्मान ने लिखा है, में इस दृश्य का उल्लेख किया गया है। पुस्तक में वर्णित घटनाक्रम के अनुसार, फिल्म की शूटिंग के दौरान रेखा को पहले से इस दृश्य की पूरी जानकारी नहीं थी और बिस्वजीत ने उन्हें अचानक किस किया था।
जीवनी में दावा किया गया है कि यह दृश्य कई मिनट तक चलता रहा और रेखा ने खुद को छुड़ाने की कोशिश की। पुस्तक के विवरण के मुताबिक, घटना के बाद वह भावुक हो गई थीं, जबकि सेट पर मौजूद कुछ लोग तालियां बजा रहे थे। हालांकि, यह विवरण जीवनी में प्रस्तुत घटनाक्रम पर आधारित है।
सेंसर बोर्ड की आपत्तियों के कारण देर से रिलीज हुई फिल्म
‘दो शिकारी’ का निर्देशन कुलजीत पाल ने किया था। फिल्म को बोल्ड और अंतरंग दृश्यों के कारण सेंसर संबंधी आपत्तियों का सामना करना पड़ा। शुरुआती दौर में इसे ‘अनजाना सफर’ नाम से बनाया गया था, लेकिन सेंसर बोर्ड की आपत्तियों के बाद फिल्म में बदलाव किए गए और इसका नाम ‘दो शिकारी’ रखा गया।
बताया जाता है कि इन अड़चनों के चलते फिल्म अपनी शूटिंग के काफी समय बाद सिनेमाघरों तक पहुंच सकी। इस देरी और रेखा-बिस्वजीत के किसिंग सीन से जुड़े विवाद ने फिल्म को लंबे समय तक चर्चा में बनाए रखा।
पुरानी घटना पर फिर शुरू हुई चर्चा
पल्लवी चटर्जी के बयान ने एक बार फिर इस पुराने विवाद को चर्चा में ला दिया है। उन्होंने एक तरफ अंतरंग दृश्यों में सहमति की अहमियत पर जोर दिया, तो दूसरी तरफ स्पष्ट किया कि वह उस घटना की प्रत्यक्ष गवाह नहीं थीं।
उनकी प्रतिक्रिया का मुख्य संदेश यही रहा कि किसी भी विवाद पर राय बनाने से पहले तथ्यों और संबंधित लोगों के बयानों को समझना जरूरी है। साथ ही, कलाकारों की सहमति और व्यक्तिगत सीमाओं का सम्मान करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
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