सहारनपुर के प्रसिद्ध देवबंदी उलेमा और जमीयत दावतुल मुस्लिमीन के संरक्षक मौलाना कारी इसहाक गोरा ने युवाओं में नाच-गाने और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने वीडियो संदेश के जरिए युवाओं से आत्ममंथन करने और सही दिशा में आगे बढ़ने की अपील की।
मौलाना ने कहा कि पहले नाच-गाने को समाज में गलत और शर्म की बात माना जाता था, लेकिन अब इसे सोशल मीडिया पर लोकप्रियता, लाइक और फॉलोअर्स पाने का माध्यम बना दिया गया है। कुछ मामलों में मजहब और धार्मिक बातें भी मजाक का हिस्सा बन रही हैं, जिसे लोग मनोरंजन समझकर साझा करते हैं।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल बुरा नहीं है, लेकिन इसका गलत उपयोग समाज के लिए नुकसानदेह हो सकता है। मौलाना ने युवाओं से आग्रह किया कि वे क्षणिक लोकप्रियता के बजाय अपने चरित्र, शिक्षा और अच्छे संस्कार को प्राथमिकता दें। उनका कहना है कि किसी भी समाज की असली पहचान उसके तहजीब, अच्छे व्यवहार और जिम्मेदाराना रवैये से होती है, न कि वायरल वीडियो से।
इसके साथ ही, उन्होंने माता-पिता, शिक्षक और समाज के जिम्मेदार लोगों से अपील की कि वे नई पीढ़ी को सही मार्गदर्शन दें और उन्हें अच्छे संस्कार, अनुशासन और तहजीब की शिक्षा दें।
मौलाना का यह संदेश इस्लामी शिक्षा और सामाजिक सुधार के परंपरागत दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसमें समाज को संतुलित और बेहतर बनाने की बात कही गई है।
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