
ईरान के सुप्रीम लीडर आय्तुल्लाह सैय्यद अली ख़ामनाई के साथ ईरान के राष्ट्रपति डॉक्टर सैय्यद इब्राहिम रईसी

ईरान के राष्ट्रपति रईसी – आइए जानते हैं कि वह कौन थे?
✅ इब्राहिम रईसी, अगस्त, 2021 से राष्ट्रपति हैं।
✅ राष्ट्रपति चुनाव में 62.9% वोट लेकर जीते।
✅ सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई के सहयोगी माने जाते हैं।
✅ सर्वोच्च नेता के रूप में सुप्रीम लीडर आय्तुल्लाह सैय्यद अली ख़ामनाई के संभावित उत्तराधिकारी माने जाते हैं।
✅ आज एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में शहीद हो गए।

ईरान के राष्ट्रपति रईसी के निधन के बाद ईरान में 5 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित.
राष्ट्रपति रईसी की दुखद मौत के बाद कई देशों ने राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है।
•सीरिया 3 दिन,
•लेबनान 3 दिन,
•इराक 1 दिन,
•पाकिस्तान 1 दिन,
•भारत 1 दिन,

ईरान के राष्ट्रपति डॉक्टर सैय्यद इब्राहिम रईसी और विदेश मंत्री हुसैन आमिर अब्दुल्लहैम की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु पर दुनिया भर से शोक संदेश देने वालों में हर ख़ास-आम नज़र आ रहा है। भारत में भी देश के प्रधानमंत्री से लेकर आम आदमी भी इस दुख की घड़ी में ईरान के साथ खड़ा होने की बात कर रहा है।भारत और ईरान का सदयों से अटूट रिश्ता है।जिस का ज़िक्र भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने ट्विट में किया है।

भारत ने ईरान के राष्ट्रपति डॉक्टर सैय्यद इब्राहिम रईसी और विदेश मंत्री हुसैन आमिर अब्दुल्लहैम की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु पर कल एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है।कल देश भर में उन सभी इमारतों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा जहां यह नियमित रूप से लहराता रहता है।कल कोई भी आधिकारिक मनोरंजन कार्यक्रम नहीं होगा।

रूस के राष्ट्रपति पुतिन तदफ़ीन में हो सकते हैं शामिल, पुतिन ने कहा कि आज हमने एक अच्छा दोस्त खो दिया है।ईरान के लोगों और शहीदों के घर वालों के साथ इस दुख की घड़ी में खड़ा हूँ।

🔸#ईरान के सर्वोच्च नेता #अयातुल्ला_अली_खामेनेई ने उपराष्ट्रपति #मोहम्मद_मोखबर को कार्यवाहक राष्ट्रपति नियुक्त किया है।
🔸हेलीकॉप्टर दुर्घटना में राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की मृत्यु के बाद यह फैसला किया गया है। रईसी 2021 में देश के राष्ट्रपति बने थे।
इस पर भारत के लोगों का किया रुख़ है आईए जानते हैं…

इजरायली ज़ुल्म के खिलाफ आंख में आंख डाल कर अगर किसी ने जवाब दिया तो वो ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी थें।
हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मरने की खबर बेहद दुखद है।
:-पूजा माथुर (पत्रकार)

उनकी धूल भरी पगड़ी और कपड़े इस बात के सबूत हैं कि वह आम अवाम के लीडर थे, एक ऐसे लीडर जो अवाम के बीच ख़ुद पहुँच कर लोगों की सेवा करते थे।

राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी का जाना सिर्फ ईरान का ही नही बल्कि मानवता का बड़ा नुक़सन है। ईरान के सुप्रीम लीडर आय्तुल्लाह सैय्यद अली ख़ामनाई और ईरान के लोगों को दिल से तज़ियत पेश करते हैं।
सैय्यद मोहम्मद इसहाक़ रिज़वी –प्रिंसिपल (जामिया सु्लतानिया)

राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी का जाना सिर्फ़ ईरान का ही नही बल्कि दुनिया के मज़लूमीन और ख़ासतौर से शियाओं का बड़ा नुक़सान है।जिस की एक मु्स्कुराहट से इज़राइल रोने लगता था।यह वह लोग हैं कि जो यह नहीं कहते की हमें किताब काफ़ी है बल्कि क़ुरआन को हाथ में लेकर पूरी दुनिया के हुकमुरानों के सामने युनाइटिड नेशन में उसकी हक़्क़ानियत और उस में किसी भी तरह के न बदले (तहरीफ़) जाने का एलान करते हैं।यह बहुत बड़ा और दिल हिला देने वाला हादसा है। ईमाम-ए-ज़माना (अज०त०फ़०श०) की ख़िदमत में ताज़ियत पेश करता हूँ और दुनियाभर के शियाओं व ईरान के लोगों के साथ-साथ ख़ासकर इन शहीदों के वारिसों की ख़िदमत में ताज़ियत पेश करता हूँ।
यासूब अब्बास- शिया धर्म गुरू, लखनऊ (उ०प्र०)

एक तरफ फिलिस्तीन में इज़राइली नस्लकुशी के खिलाफ जहाँ दुनिया के ताक़तवर मुल्क खामोश तमाशाई बने रहे वहीं दूसरी तरफ डॉ सैय्यद इब्राहिम रईसी की सदारत में ईरान ने घुटने नहीं टेके, अपने मुवाफ़िक़ को वाज़ेह करते हुए हक़ के साथ खड़े होकर मज़लूम फिलिस्तीन का साथ दिया।हम ईरान के सदर डॉ० सैय्यद इब्राहिम रईसी की रेहलत पर बेहद अफ़सोस ज़ाहिर करते है और अल्लाह सुब्हानहु-त’आला से दुआ-गो है की उनके दरजात बुलंद हो।
:-अबू आसिम आज़मी-प्रदेश अध्यक्ष सपा (महाराष्ट्र)

हैलीकॉप्टर हादसे में इंतिक़ाल पाने वाले ईरानी राष्ट्रपति मोहतरम इब्राहिम रईसी और ईरान के कई आला ओहदेदारों के इंतिक़ाल पुर मलाल पर आज भारत में स्थित ईरान के राजदूत आलीजनाब ईराज़ इलाही से मुलाक़ात कर ताज़ियत पेश की और ग़म का इज़हार किया!
आले मोहम्मद इक़बाल (एम.सी.डी.)

🇮🇳 भारत चाहता है 🇮🇷 ईरान के साथ संबंधों में रईसी की विरासत का विस्तार
🗣 पूर्व भारतीय राजदूतों ने पत्रिका को बताया है कि दिवंगत ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के तहत द्विपक्षीय और बहुपक्षीय दोनों प्रारूपों में भारत-ईरान संबंधों में उछाल एक पोषित विरासत है जिसे नई दिल्ली आने वाले महीनों और वर्षों में विकसित करने की उम्मीद करेगी।
💭 “भारत के साथ मजबूत संबंधों के लिए राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की प्रतिबद्धता संदेह से परे थी। उन्होंने बढ़ते भारत के महत्व की सराहना की, कश्मीर मुद्दे को सही नज़रिए से देखा, चाबहार में भारत की बढ़ती भागीदारी का समर्थन किया और ब्रिक्स में ईरान के प्रवेश के लिए नई दिल्ली के समर्थन का स्वागत किया,” राजदूत (सेवानिवृत्त) राजीव भाटिया ने टिप्पणी की, जो वर्तमान में मुंबई स्थित थिंक टैंक गेटवे हाउस में एक प्रतिष्ठित फे़लो हैं।
भाटिया ने कहा कि इस “विरासत को आपसी हित में संरक्षित और विस्तारित करने की ज़रूरत है।”
नई दिल्ली स्थित थिंक टैंक विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन (VIF) के प्रतिष्ठित फे़लो, राजदूत (सेवानिवृत्त) अनिल त्रिगुणायत ने पत्रिका को बताया कि चीन और भारत दोनों के साथ संबंधों को मज़बूत करने की रईसी की नीति ने “अच्छे लाभांश दिए हैं।” उन्होंने कहा कि रईसी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों अमेरिकी प्रतिबंधों के बढ़ते ख़तरे के बावजूद अपने देशों के बीच “अधिक विश्वास” स्थापित करने में सक्षम थे।

भारत ने ईरान के राष्ट्रपति शहीद रईसी साहब की शक्ल में हमारा बहुत अच्छा दोस्त खो दिया, जिनके कोऑर्डिनेशन से हमने ईरान में #चाबहार_पोर्ट बनाया और भारत-ईरान के रिश्ते बहुत मज़बूत हुए और इंशाल्लाह भारत-ईरान के रिश्ते हमेशा मज़बूत रहेंगे।
चाबहार पोर्ट हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है और हमने बिना अमेरिका की परवाह किए ईरान के साथ मिलकर यह क़दम उठाया, आपको हमेशा आपकी जांबाजी़ और बेबाकी के लिए याद किया जाएगा। अल्लाह आपको जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए,आपका दुनिया से जाना बेशक हमारे लिए निजी तौर पर बहुत दुखद है, अल्लाह आपके परिवार वालों को भी सबर ए जमील अता फरमाए।
अल्लाह उम्मत के रहनुमाओं की हिफ़ाज़त फ़रमा और उनको ताक़त अता फ़रमा इंसाफ और अमन क़ायम करने की।
शादाब चौहान- मुख्य प्रवक्ता (पीस पार्टी)

अयातुल्लाह रईसी और उनके साथियों की शहादत पर मजलिस-ए-उलेमा-ए-हिंद का शोक संदेश
ईरान के राष्ट्रपति अयातुल्लाह सैय्यद इब्राहिम रईसी और उनके साथियों के साथ जो दुखद हादसा हुआ, इस ग़म में मजलिस-ए-उलेमा-ए-हिंद सोगवार है। ये इतना बड़ा हादसा है जिसने पूरी दुनिया को शोक में डाल दिया है। उनकी अचानक मृत्यु ने हमारे दिलों को तोड़ दिया है और इस्लामी जगत एक ऐसे सदमे से जूझ रहा है जिसे बयान नहीं किया जा सकता है।
मौलाना कल्बे जवाद नकवी ने अपने शोक संदेश में कहा कि अयातुल्लाह रईसी इमाम रज़ा (अ.स.) के एक ग़ैरतमंद ख़ादिम थे और इमाम रज़ा (अ.स.) के शुभ जन्मदिवस के अवसर पर वह इमाम की ख़िदमत में बरियाब हो गए। उनकी ख़िदमात को हमेशा याद रखा जायेगा। यह एक ऐसा हादसा है जिसको भुलाना आसान नहीं होगा। उनकी शहादत न केवल ईरान के लिए बल्कि इस्लामी जगत के लिए भी एक बड़ी क्षति है। मौलाना ने कहा कि अयातुल्लाह रईसी और उनके साथ शहीद हुए सभी लोग मिल्लते इस्लामिया का अज़ीम सरमाया थे। उनकी शहादत ने पूरी मिल्लत को सोगवार किया है। हम इस हादसे को कभी भुला नहीं पाएंगे। उन्होंने कहा कि ईरान ने इससे पहले भी गंभीर दुर्घटनाओं का सामना हुआ है, ख़ुदा ने चाहा तो ईरान इससे भी उभरेगा और निरंतर विकास के पथ पर आगे बढ़ता रहेगा।
मजलिस-ए-उलेमा-ए-हिंद के महासचिव ने कहा कि हम इस कठिन और दुखद मौक़े पर इमामे ज़माना (अ.स.) ,अयातुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनई, मिल्लते शहीद परवर ईरान, उनके परिवार के सभी सदस्यों और इस्लामी जगत के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं। हम दुआ करते हैं की अल्लाह मुहम्मद व आले मुहम्मद के सदक़े में रहबरे मोअज़्ज़म, मिल्लते ईरान और शहीदों के परिवार को सब्र अता फरमाए।
:-मौलाना कल्बे जवाद नकवी
महासचिव (मजलिस-ए-उलेमा-ए-हिंद)
अगर ईरान को इस बात का एक भी सबूत मिल जाता है कि इस घटना के पीछे इजरायल का हाथ है, तो हम एक नाटकीय भू-राजनीतिक बदलाव देखने वाले हैं, जो पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख देगा। :-हादी नसरुल्लाह (लेबनान)

एक तरफ फिलिस्तीन में इज़राइली नस्लकुशी के खिलाफ जहाँ दुनिया के ताक़तवर मुल्क खामोश तमाशाई बने रहे वहीं दूसरी तरफ डॉ सैय्यद इब्राहिम रईसी की सदारत में ईरान ने घुटने नहीं टेके, अपने मुवाफ़िक़ को वाज़ेह करते हुए हक़ के साथ खड़े होकर मज़लूम फिलिस्तीन का साथ दिया।हम ईरान के सदर डॉ सैय्यद इब्राहिम रईसी की रेहलत पर बेहद अफ़सोस ज़ाहिर करते है और अल्लाह सुब्हानहु-त’आला से दुआ-गो है की उनके दरजात बुलंद हों।
जमाल ख़ान -प्रदेश अध्यक्ष (एआईएम -राजस्थान)

ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी कोई हादसे का शिकार नहीं हुए बल्कि अमेरिका और इज़राइल ने प्लानिंग कर के हत्या की है।ये हादसा नहीं सीधा मर्डर है।इसकी जाँच होना ज़रूरी है।
नक़ी रज़ा (समाजवादी नेता)

ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार,राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी रविवार (19 मई) को अज़रबैजान में किज़ कलासी और खोदाफरिन बांध का उद्घाटन करने गए थे. ये हादसा समारोह से लौटते समय हुआ.
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