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निधि जारी होने में देरी पर लखनऊ हाईकोर्ट ने नाराज़गी जताई; इंटीग्रेटेड चाइल्ड प्रोटेक्शन स्कीम के तहत केंद्र सरकार से जवाब तलब किया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने इंटीग्रेटेड चाइल्ड प्रोटेक्शन स्कीम (ICPS) के तहत निधि जारी होने में देरी पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने केंद्र सरकार से इस संबंध में जवाब मांगा है। कोर्ट ने अपने आदेश में नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि अप्रैल से शुरू हुए वित्त वर्ष की आंशिक निधि अक्टूबर में जारी की गई।

 

न्यायालय ने सवाल उठाया कि इस तरह से हो रही देरी से बाल गृह के बच्चों की जरूरतों को समय समय से कैसे पूरा किया जा सकेगा और न्यायालय ने यह भी कहा है कि क्या यह रवैया बच्चों के हितों से समझौता नहीं है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 दिसंबर की तारीख तय की गई है।

कोर्ट ने केंद्र सरकार के संबंधित जिम्मेदार अधिकारी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित होने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश वर्ष 2008 में अनूप गुप्ता द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। यह याचिका बाल गृहों के बच्चों के हितों से संबंधित है।

 

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