चलो एक काम करते हैं
मुहब्बत आम करते हैं
ये जो नफ़रत की साज़िश है
इसे नाकाम करते हैं
चलो एक काम करते हैं
मुहब्बत आम करते हैं
चलो नफ़रत के सर पर
अम्न की दस्तार रखते हैं
चलो पौधे लगाते हैं
परिंदों को बुलाते हैं
गुलों को तितलियां देते हैं
जुगनू को जगाते हैं
बड़े पेड़ों की शाखों पर
नए पत्ते उगाते हैं
चलो सबके लिए सांसों का
एक एक जाम भरते हैं
चलो एक काम करते हैं
मुहब्बत आम करते हैं
चलो मज़हब की हम सारी
दुकाने बन्द करते हैं
जो भूखा है वो भूखा है
उसे खाना खिलाते हैं
जो प्यास है वो प्यास है
उसे पानी पिलाते हैं
ना पूछे ज़ात हम उसकी
ना उसका धर्म हम जाने
चलो इंसानियत के नाम पर
ये काम करते है
मुहब्बत आम करते हैं
चलो एक काम करते हैं
मुहब्बत आम करते हैं
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:-नज़र बिजनोरी(मुम्बई)
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