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ईमामत को समझना ज़रूरी है :- मिर्ज़ा नुसरत

ईमामत को समझना ज़रूरी है :- मिर्ज़ा नुसरत 

लखनऊ: महफ़िल ए ईमाम रिज़ा (अ०) हर साल की तरह इमामबाड़ा ग़ुफ़रानमआब चौक लखनऊ में रफ़त अब्बास की वालिदा मरहूमा कौसर जहां बिनते सै० मौ० अख़तर मरहूम के एसाले सवाब के लिए मुनअक़िद की गई, 

जिसमें सुल्तानुल मदारिस व हौज़ा-ए-इल्मिया ग़ुफ़रानमआब के तुल्लाब ने सबसे पहले तिलावते क़ुरआन करीम की फ़िर शोराए किराम ने बारगाहे ईमामत (अस०) में मनज़ूम नज़राना ए अक़ीदत पैश किया ।

महफ़िल को ख़िताब करते हुए मिर्ज़ा नुसरत अली ने ईमाम ए रिज़ा (अ०) की ज़िंदगी से रौशनी हासिल करने वाले आयतुल्लाह इब्राहीम रईसी ,आयतुल्लाह आले हाशिम व हुसैन आमिर अब्दुल्ला हीयान व दीगर शहीदों को ख़िराजे अक़ीदत पैश करते हुए ईमाम अली रिज़ा (अ०) के वाक़िआ को ब्यान करते हुए कहा कि ईमाम अली रिज़ा (अ०) को मामून ने इसलिए वली ए अहद बनाया ताकि अजमी होने से हकुमत पे जो बादल छाए हुए हैं उनको ईमाम के ज़रिये ख़त्म कर और अहलेबैत (अ०) के चाहने वालों को ये बावर करा सकूँ कि हम आले रसूल (स०अ०व०व०) के ख़ैर ख़वाह हैं। मौला ने सब हालात देखकर दीन को आगे लेजाने के लिए इस को क़बूल किया ।

मामून ने इस बात को आम करने के लिए बड़े लोगों को डिनर (शाम का खाना) पे ये कहकर बुलाया की वली ए अहद के एज़ाज़ में ये डिनर रखा गया है और देखिए हम इनकी कीतनी इज़्ज़त करते हैं!

जब सब लोग जमा हो गए तो मामून ने ईमाम (अ०) से कहा आज आप बिस्मिल्लाह करेंगे ,

ईमाम ने देखा की गवर्नरों और बड़े लोगों के पीछे उनके ग़ुलाम अफ़्रीका के काले लोग खड़े हुए हैं फ़िर ईमाम (अ०) ने मामून की तरफ़ देखा और ग़ुलामों की तरफ़ इशारा करके फ़रमाया कि यह सब ?

मामून ने कहा की यह सब ग़ुलाम हैं।

ईमाम (अ०) ने फ़रमाया मामून क्या तू अपने को आज़ाद समझता है?

क्या तूने रसूले इस्लाम (स०अ०व०व०) का फ़रमान नहीं सुना कि अरब को अजम पर और काले पर ग़ौरों को कोई फ़ज़ीलत हासिल नहीं है।

मामून ने सवाल किया ईमाम (अ०) से कि यह कब फ़रमाया? 

ईमाम (अ०) ने मौक़े की नज़ाकत समझते हुए फ़रमाया जब ग़दीर में रसूले इस्लाम ने मेरे बाबा मौला अली (अ०) को अपना जानशीन (ख़लीफ़ा) बनाया और यह आख़िरी हज का आख़िरी ख़िताब था ।

इब्राहीम रईसी ने भी UNO में क़ुरान को लेकर पुरी दुनिया और ख़ासकर शियाओं पर क़ुरआन को लेकर एतराज़ करने वालों के सामने अपने अक़ीदे और क़ुरआन ए करीम के नुक़्ता तक ना बदले जाने और इस की इज़्ज़त में कोई फ़र्क़ ना आने का एलान किया ।

हर बड़े आदमी के पास एक कुर्सि रखी गई और उस के ग़ुलाम ने उसी के साथ बैठकर खाना खाया ।

खाना ख़त्म होकर गवर्नरों ने मामून से ग़ुलामों के साथ खाना खिलाने को लेकर बे इज़्ज़त किए जाने का अहसास दर्ज कराया वहीं ग़ुलामों ने ईमाम के हाथों पर बैयअत कर कलमाह मुकम्मल किया । 

हुसैन आमिर अब्दुल्ला हीयान का वीडियो जिसमें वह दुसरे मुल्क के बड़े हुकमुरान को पानी पिलाते हुए नज़र आ रहे हैं ।

आख़िर में मौलाना मिर्ज़ा नुसरत ने मरहूमा के एसाले सवाब के लिए फ़ातिहा पढ़वाया ।और 1 जून को आग़ाबाक़र इमामबाड़े में मरहूमा के इसाले सवाब के लिए मुनअक़िद होने वाली देसों की मजलिस में  शिरकत की गुज़ारिश का एलान भी किया ।

प्रोग्राम में मौ०, रफ़त अब्बास , मीसम अली, और घर वालों ने तुल्लाब को नज़रे मौला व तबर्रूक पाश किया।

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