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कानपुर किडनी रैकेट: 18 दिन बाद भी कई रहस्य बरकरार, 11 आरोपी जेल में, 50 से ज्यादा अवैध ट्रांसप्लांट का दावा

कानपुर में 29 मार्च की रात उजागर हुए किडनी रैकेट मामले में अब तक डॉक्टर दंपत्ति सहित 11 लोगों को जेल भेजा जा चुका है। शुरुआती जांच में 50 से अधिक अवैध किडनी ट्रांसप्लांट होने की बात सामने आई है, लेकिन घटना के 18 दिन बाद भी कई अहम सवालों के जवाब नहीं मिल पाए हैं। पुलिस की जांच फिलहाल कुछ सीमित आरोपियों और कड़ियों तक ही सिमटी हुई है, जबकि पूरे नेटवर्क का खुलासा अभी बाकी है।

संदिग्ध अस्पतालों पर कार्रवाई अस्पष्ट

जांच के दौरान कुछ निजी अस्पतालों की भूमिका सामने आई थी, जिनमें कई जगहों पर ट्रांसप्लांट होने का दावा किया गया। इसके अलावा अन्य शहरों के अस्पतालों के नाम भी जांच में जुड़े, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका कि इन संस्थानों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई या उन्हें क्लीनचिट दे दी गई है।

बिना विशेषज्ञ सर्जन के ऑपरेशन कैसे हुए?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने बड़े स्तर पर किडनी ट्रांसप्लांट बिना किसी विशेषज्ञ सर्जन के कैसे किए गए। जांच में सामने आया कि गिरोह का सरगना, जो केवल 12वीं पास है, एनेस्थीसिया देता था। टीम में डेंटिस्ट, फिजीशियन और एक ओटी टेक्नीशियन भी शामिल थे, जिसने कथित तौर पर 30 से ज्यादा ट्रांसप्लांट किए। हालांकि ऑपरेशन की गुणवत्ता देखकर विशेषज्ञ डॉक्टर भी हैरान हैं और मानते हैं कि यह काम किसी अनुभवी सर्जन के बिना संभव नहीं।

बाहरी डॉक्टरों की भूमिका पर रहस्य

एक आरोपी ने पूछताछ में बताया कि कुछ डॉक्टर दूसरे शहर से ऑपरेशन के लिए बुलाए जाते थे। बावजूद इसके, पुलिस अभी तक उन डॉक्टरों तक नहीं पहुंच सकी है, जिससे जांच अधूरी बनी हुई है।

विदेशी महिला मरीज का सुराग नहीं

मामले में एक विदेशी महिला का जिक्र सामने आया, जिसका ट्रांसप्लांट कथित तौर पर कानपुर में किया गया था। बाद में उसकी हालत बिगड़ने पर उसे दूसरे शहर ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। पुलिस ने इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जानकारी जुटाने की कोशिश की, लेकिन अब तक उसकी पहचान और पूरे घटनाक्रम की पुष्टि नहीं हो पाई है।

ठगी के मामले में भी कार्रवाई अधूरी

एक मरीज से किडनी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये लेने का मामला भी सामने आया है, लेकिन अभी तक इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई। इससे गिरोह के आर्थिक अपराधों की जांच भी अधूरी रह गई है।

डोनर और रिसीवर का कोई रिकॉर्ड नहीं

पुलिस का दावा है कि 50 से ज्यादा ट्रांसप्लांट हुए, लेकिन अब तक किसी भी डोनर या रिसीवर की पहचान नहीं हो सकी है। यह भी साफ नहीं है कि ये लोग कहां के रहने वाले थे और किन माध्यमों से गिरोह तक पहुंचे।

किंगपिन से पूछताछ अधूरी

गिरोह के मुख्य आरोपी को इस पूरे नेटवर्क का अहम हिस्सा माना जा रहा है, लेकिन उससे अब तक सीमित पूछताछ ही हो सकी है। कई अहम सवालों के जवाब अभी भी बाकी हैं, जिनसे इस पूरे रैकेट की असली तस्वीर सामने आ सकती है।

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