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परिसीमन पर भ्रम दूर: दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी घटेगी नहीं, बढ़ेगी — अमित शाह

संसद में परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर हुए तीखे हंगामे के बीच केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah ने साफ किया कि प्रस्तावित बदलावों से दक्षिण भारत के राज्यों को नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर गलतफहमियां फैलाई जा रही हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि दक्षिणी राज्यों की लोकसभा में भागीदारी बढ़ेगी।

सीटें बढ़ेंगी, प्रतिनिधित्व भी मजबूत होगा

गृह मंत्री ने बताया कि वर्तमान में Lok Sabha में 543 सीटें हैं, जिन्हें बढ़ाकर लगभग 850 करने की योजना है। इस विस्तार के बाद दक्षिण के राज्यों की सीटें भी संख्या और प्रतिशत—दोनों में बढ़ेंगी।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा:

  • कर्नाटक की सीटें 28 से बढ़कर लगभग 42–43 तक पहुंचेंगी
  • तेलंगाना 17 से बढ़कर 26 सीटों तक जाएगा
  • तमिलनाडु की 39 सीटें बढ़कर करीब 59 हो सकती हैं
  • आंध्र प्रदेश की 25 सीटें बढ़कर 38 तक हो जाएंगी

कुल मिलाकर दक्षिणी राज्यों के सांसदों की संख्या 129 से बढ़कर करीब 195 तक पहुंच सकती है, जिससे उनकी हिस्सेदारी भी थोड़ी बढ़ेगी।

परिसीमन लागू होने की प्रक्रिया स्पष्ट

Amit Shah ने यह भी स्पष्ट किया कि परिसीमन आयोग की सिफारिशें तभी लागू होंगी जब संसद उन्हें मंजूरी देगी और राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलेगी। उन्होंने साफ कहा कि 2029 से पहले इन बदलावों के लागू होने की संभावना नहीं है और तब तक सभी चुनाव मौजूदा सीटों के आधार पर ही होंगे।

जाति जनगणना पर भी दिया जवाब

बहस के दौरान विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए गृहमंत्री ने कहा कि सरकार जाति जनगणना कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में कैबिनेट इस पर निर्णय ले चुकी है और अगली जनगणना में इसे शामिल किया जाएगा।

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