हकीम मिर्ज़ा अरशद अब्बास और निःशुल्क सेवा
ज़िला मुज़फ़्फ़रनगर में शहर से लगभग दस किलोमीटर दूर एक क़स्बा “बघरा” के नाम से मशहूर है। इस छोटे से क़स्बे का नाम उर्दू/हिंदी ज़बान में वहाँ – वहाँ तक है की जहां तक ज़िला मुज़फ़्फ़रनगर का नाम भी नहीं पोंहच पाया है। इस का मुख्य कारण है कि यहाँ पर हज़रत ईमाम हुसैन (अ०) के भाई मौला हज़रत अब्बास (अ०) के रोज़ा की शबीह बनी हुयी है, जिस को दरगाह मौला अब्बास (अ०) के नाम से भी जाना जाता है।

यहां सालाना मजालिस का प्रोग्राम गर्मी में होता चला आ रहा है।जिस में हज़ारों की संख्या में लोग जमा होते हैं।

पंदरह सालों से लगभग यहाँ निःशुल्क ख़िदमत अंजाम दे रहे थे हकीम मिर्ज़ा अरशद अब्बास मरहूम ,

✅हकीम मिर्ज़ा अरशद अब्बास लखनौती ज़िला सहारनपुर के रहने वाले थे।
✅हकीम मिर्ज़ा अरशद अब्बास स्व०मिर्ज़ा अज़हर अब्बास के सबसे छोटे भाई थे।
✅हौमयोपैथिक व एक्यूप्रेशर से फ़्री ईलाज करते थे और चार दिन के लिए बघरा दरगाह पर २४ घंटे अपनी टीम के साथ निःशुल्क मेडिकल सेवा देते थे।
✅कोरोना काल में भी किसी जात पात व धर्म को देखे बिना सत्तावन दिनों तक सिर्फ़ राशन का ही प्रबंध नहीं कराया बल्कि पका कर हर आदमी के घर तक खाना पोंहचाया।
✅नुसरत ट्रस्ट की मीटिंग में हकीम मिर्ज़ा अरशद अब्बास को ख़िराजे अक़ीदत पैश किया गया।
आईए आपको बताते हैं कि हकीम मिर्ज़ा अरशद अब्बास के कैसे नुस्ख़े सीखे और उसको आम लोगों तक कैसे पोंहचाया।

कहते हैं कि जब इंसान के जीवन में परेशानी आती है तो बता कर नहीं आती। हकीम जी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। दरअसल उन्हें पेट और कमर दर्द की गंभीर समस्या हो गयी। इस समस्या के कारण वे परेशान रहने लगे। कहा जाता है कि परेशानी कभी भी बता कर नहीं आती। इस समय में इंसान काफी परेशान हो जाता है। उस समय कुछ समझ नहीं आता कि हमारे लिए क्या सही है और क्या नहीं? ऐसा ही कुछ हुआ हकीम जी के साथ। क्योंकि उनका ये वक्त सेहत को लेकर काफी बुरा चल रहा था।

पेट से हमारे सारे शरीर का संचालन होता है। अगर इंसान का पेट ही स्वस्थ नहीं रहेगा तो फिर उसका शरीर कैसे सही ढंग से काम कर पायेगा। हकीम जी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उन्हें पेट की समस्या तो थी ही साथ ही कमर में दर्द की समस्या भी हो गयी। उन्होंने अपनी समस्या से राहत पाने के लिए कई अस्पतालों का चक्कर काटा। लेकिन अफसोस उन्हें अपनी समस्या में कोई फायदा होते हुए नजर नहीं आया। इससे उनकी परेशानी और बढ़ने लगी। वो चाहते थे कि उन्हें कोई ऐसी औषधि मिले जिससे उनकी समस्या में राहत मिल सकें। और वो पहले की तरह ही स्वस्थ और सेहतमंद हो जाएं। हकीम जी बताते हैं कि उनके लिए सबसे अच्छी बात ये थी कि वे साल 2019 में ही आयुर्वेद में मशहूर हकीमों से मिल चुके हैं।एक हकीम जी ही उनके जीवन में आशा की एक किरण लेकर आये।

दरअसल हकीम जी से एक मेडिकल कैंप प्रोग्राम के जरिये जुड़े थे। जब उन्होंने हकीम जी का नुस्ख़ा देखा तो उन्होंने हकीम जी की औषधि को अपनाने का मन बनाया। इन नुस्ख़ों को काफी लोग अपना रहे थे। तो उनके मन में भी आया कि जब इतने लोग हकीम जी की जड़ी बूटी से स्वस्थ हो रहे हैं तो क्यों ना मैं भी अपनाकर देखूं। बस फिर क्या था उन्होंने हकीम जी के दिये हुए नंबर पर कॉल किया और अपनी समस्या के बारे में सब कुछ बता दिया। हकीम जी ने उनकी समस्या को देखते हुए पेट की समस्या के लिए तो अपनी सबसे मशहूर छः चीजों की घर के मसालों वाली जड़ी बूटी बतायी और कमर दर्द के लिए सबसे कारगर औषधि गोंद सियाह के सेवन करने की सलाह दी। हकीम जी ने बिल्कुल वैसा ही किया। उन्होंने हकीम जी के निर्देश अनुसार अत्तार से गोंद सियाह मंगाया और उसका इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। गोंद सियाह के इस्तेमाल के कुछ समय बाद ही उन्हें कमर दर्द में काफी आराम हुआ। कमर दर्द में आराम पाने के बाद हकीम मिर्ज़ा अरशद अब्बास जी को हकीम जी की यूनानी औषधियों पर पूरा भरोसा हो गया। गोंद सियाह ने हकीम जी के कमर दर्द में काफी ज्यादा आराम पहुँचाया।

हकीम जी की यूनानी औषधि को अपनाकर हकीम जी खुद तो स्वस्थ हुए ही साथ ही अब लोगों की भी सहायता कर रहे हैं। अब अगर उनके घर में कोई भी सदस्य बीमार होता है तो वे सबसे पहले हकीम जी की औषधि ही बनाते हैं। जिससे उन्हें जल्द ही राहत मिल जाती है। हकीम जी का कहना है कि जिसको भी घुटनों में दर्द की समस्या थी। उनके लिए भी उन्होंने हकीम जी का गोंद सियाह ही मंगाकर दिया है। उसके इस्तेमाल से उन्हें काफी आराम है। हकीम जी अब तक कई लोगों को हकीम जी की यूनानी औषधि बता चुके हैं। जिन लोगों ने हकीम जी की औषधि को अपनाया है उन सभी लोगों को अपनी-अपनी समस्या में काफी फायदा हुआ है। वह सभी लोग हकीम जी के लिए लंबी उम्र की दुआएं मांगते हैं। कि वह इसी तरह स्वस्थ और सेहतमंद रहें।
लेकिन उनको किया मालूम कि निःशुल्क सेवा करने वाले हकीम मिर्ज़ा अरशद अब्बास मरहूम अब इस दुनिया में नहीं हैं। 28 अक्टूबर 2023को वह हमेशा के लिए चले गए।
मिर्ज़ा अरशद अब्बास मरहूम के लिए नुसरत ट्रस्टीज़ ने सुराए फ़ातिहा की अपील की है।
Global Express Live