आजकल खराब खानपान, कम शारीरिक गतिविधि और बदलती जीवनशैली के कारण कई क्रॉनिक बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। पहले जिन स्वास्थ्य समस्याओं को उम्र बढ़ने से जोड़कर देखा जाता था, उनमें से कई अब कम उम्र के लोगों में भी नजर आने लगी हैं। आंखों से जुड़ी परेशानियां भी इसी में शामिल हैं।
कम उम्र में धुंधला दिखाई देना, चश्मे का नंबर बढ़ना या नजर कमजोर होने जैसी शिकायतें कई कारणों से हो सकती हैं। इनमें कुछ ऐसी बीमारियां भी शामिल हैं, जो शरीर के दूसरे हिस्सों के साथ-साथ आंखों को भी प्रभावित करती हैं। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर ऐसी ही दो प्रमुख स्थितियां हैं।
लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ा रहने से आंख के पीछे मौजूद रेटिना की महीन रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। इससे डायबिटिक रेटिनोपैथी का खतरा बढ़ता है। इसी तरह अनियंत्रित हाई BP भी आंखों की रक्त वाहिकाओं पर असर डाल सकता है।
डायबिटीज में क्यों बढ़ जाता है आंखों का खतरा?
जब लंबे समय तक ब्लड शुगर सामान्य से अधिक रहता है, तो इसका असर शरीर की छोटी रक्त वाहिकाओं पर पड़ सकता है। आंख की रेटिना में मौजूद महीन रक्त वाहिकाएं भी इससे प्रभावित हो सकती हैं। इस स्थिति को डायबिटिक रेटिनोपैथी कहा जाता है।
इस बीमारी की शुरुआत में कई बार कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देता। समय के साथ नजर धुंधली होना, आंखों के सामने धब्बे या फ्लोटर्स दिखाई देना और देखने की क्षमता में बदलाव जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं।
डायबिटीज के कारण मोतियाबिंद और ग्लूकोमा जैसी आंखों की अन्य समस्याओं का जोखिम भी बढ़ सकता है। इसलिए डायबिटीज वाले लोगों के लिए केवल ब्लड शुगर की निगरानी ही नहीं, बल्कि नियमित आंखों की जांच भी महत्वपूर्ण है।
हाई BP भी आंखों को पहुंचा सकता है नुकसान
लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर शरीर की रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव डालता है। आंखों में मौजूद छोटी रक्त वाहिकाएं भी इस दबाव से प्रभावित हो सकती हैं। लंबे समय तक BP नियंत्रित न रहने पर आंखों की रक्त आपूर्ति और रेटिना पर असर पड़ सकता है।
इसलिए हाई BP से पीड़ित लोगों को नियमित रूप से अपना ब्लड प्रेशर जांचते रहना चाहिए और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं व उपचार का पालन करना चाहिए।
अगर अचानक नजर धुंधली हो जाए, आंखों के सामने नए धब्बे दिखाई देने लगें या देखने की क्षमता में अचानक बदलाव महसूस हो, तो इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में जल्द चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
ग्लूकोमा और मोतियाबिंद से भी रहें सावधान
ग्लूकोमा ऐसी स्थिति है जिसमें आंख की ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंच सकता है। समय पर पहचान और उपचार न होने पर इससे नजर को स्थायी नुकसान का खतरा हो सकता है। कई मामलों में शुरुआत में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते।
वहीं मोतियाबिंद में आंख का प्राकृतिक लेंस धीरे-धीरे धुंधला होने लगता है। इसके कारण चीजें साफ दिखाई नहीं देतीं और रोशनी के आसपास चमक या घेरा महसूस हो सकता है।
उम्र बढ़ने के साथ मोतियाबिंद का खतरा सामान्य रूप से बढ़ता है, जबकि डायबिटीज जैसी स्थितियां इसके जोखिम को और प्रभावित कर सकती हैं।
सिर्फ नजर कमजोर होने पर ही न कराएं जांच
आंखों की कुछ बीमारियां शुरुआत में बिना किसी खास लक्षण के आगे बढ़ सकती हैं। डायबिटिक रेटिनोपैथी इसका एक उदाहरण है। इसलिए आंखों की जांच केवल तब कराना पर्याप्त नहीं है, जब नजर कमजोर होने लगे।
डायबिटीज वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित रूप से आंखों की जांच करानी चाहिए। हाई BP वाले लोगों के लिए भी रक्तचाप को नियंत्रण में रखना महत्वपूर्ण है।
आंखों को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
आंखों की सेहत बनाए रखने के लिए कुछ सामान्य सावधानियां मददगार हो सकती हैं। ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को डॉक्टर द्वारा निर्धारित लक्ष्य के भीतर रखने की कोशिश करें। नियमित शारीरिक गतिविधि करें, संतुलित आहार लें और धूम्रपान से बचें।
इसके अलावा, अगर आंखों की रोशनी में अचानक बदलाव, लगातार धुंधलापन, नए फ्लोटर्स, चमक या नजर के किसी हिस्से में कमी महसूस हो, तो आंखों के डॉक्टर से जांच कराना चाहिए।
ध्यान रखें: डायबिटीज या हाई BP को नियंत्रित रखना केवल आंखों के लिए ही नहीं, बल्कि हृदय, किडनी, नसों और शरीर के अन्य अंगों के स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है।
Global Express Live