Breaking News

बेसमेंट खुदाई से पहले, आपको ‘ग्राउंड वाटर लेवल’ को देखना होगा: DM ने नोएडा प्रशासन को पत्र लिखा; “भूजल आयोग” की रिपोर्ट की जांच की जरूरत है— Gautambudh Nagar, Noida से समाचार

 

ये पुरानी 2020 की है, जिसमें बेसमेंट में पानी साफ करता हुआ युवक दिखाई दे रहा है।

नोएडा में हर साल एक से डेढ़ मीटर ग्राउंड वाटर लेवल गिर रहा है। यही हाल रहा तो आने वाले कुछ सालों में यहां जल की समस्या हो जाएगी। इसकी बड़ी बेसमैंट की खुदाई है। नोएडा प्राधिकरण में अधिकतम 12 मीटर तक बेसमैंट खोद सकते है।

.

लेकिन, अब खुदाई के लिए पहले वाटर लेवल मापा जाएगा इसके बाद ही बेसमैंट कितने फ्लोर का बनेगा इसकी अनुमति मिलेगी। डीएम की ओर से इसका एक पत्र तीनों प्राधिकरण (नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना विकास ) को दिया। नोएडा प्राधिकरण ने सीईओ के आदेश के बाद नियोजन विभाग इसे प्रत्येक श्रेणी के प्रॉपर्टी पर लागू करने जा रहा है।

रूफ वाटर हार्वेस्टिंग लगाने का आदेश

बारिश के जल संचन को लेकर हाल ही में प्राधिकरण में बैठक की गई थी

डीएम ने प्राधिकरण को पत्र लिखकर बेसमैंट की अनुमति जारी करने से पहले नियमों में बदलाव का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि किसी प्रोजेक्ट में बेसमैंट बनाने की अनुमति से पहले वहां पर ग्राउंड वाटर लेवल का अध्ययन कराना होगा।

ग्राउंड वाटर लेवल की रिपोर्ट के आधार पर ही बेसमैंट की गहराई की अनुमति दी जाएगी। अगर किसी का प्रोजेक्ट के लिए अनुमति मिल गई है वहां अध्ययन के बाद अनुमति में बदलाव किया जाए। नोएडा प्राधिकरण इस सुझाव को अपने बिल्डिंग बॉयलाज में शामिल करने जा रहा है।

इसके लिए मिनट्स बनाए जा रहे है जिसे अगली बोर्ड बैठक में प्रस्ताव के रूप में रखा जाएगा। प्राधिकरण किसी भी निर्माण और बेसमैंट निर्माण की अनुमति से पहले भूजल आयोग की रिपोर्ट का अध्ययन कराएगा। बता दे नोएडा में कई सेक्टरों और गांवों में भूजल का स्तर लगातार गिर रहा है। जिसको बढ़ाने के लिए रेन वाटर और रूफ वाटर हार्वेस्टिंग लगाने का आदेश दिया गया है।

नोएडा के डी पार्क में बनाई गई है झील।

कॉमर्शियल और ग्रुप हाउसिंग में होगी दिक्कत

नोएडा नियोजन विभाग के अधिकारी ने बताया कि डीएम की ओर से जो भी सुझाव आए है उसको अमल में लाने के लिए नोएडा प्राधिकरण की ओर से पत्र जारी कर दिया गया है। अधिकतर दिक्कत कॉमर्शियल और ग्रुप हाउसिंग प्रॉपर्टी में आएगी।

क्योंकि, इनको ही पार्किंग के लिए दो या तीन बेसमैंट बनाने पड़ते है। मॉल में ग्राउंड फ्लोर ही आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में वहां तीन बेसमेंट तक बनाया जाता है। नोएडा में कई मॉल है जहां तीन बेसमैंट तक पार्किंग है।

अब जानते है नोएडा का जल स्तर
नोएडा हाइराइज इमारतों का शहर है। यहां वाटर लेवल तेजी से गिर रहा है। आगामी 10 साल में ग्राउंड वाटर लेवल की स्थिति खराब हो सकती है। औसतन सालाना डेढ़ से दो मीटर तक वाटर लेवल गिर रहा है। जिससे यहां पीने योग्य पानी नहीं बचेगा।

इसे कंट्रोल करने के लिए भवन नियमावली के तहत 300 वर्गमीटर और बड़े प्लाट में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य है। ये सिस्टम यहां बनी रिहाइशी इमारत, कॉमर्शियल मॉल, होटल, स्कूल, सरकारी इमारतों में एक्टिव है या नहीं इसकी पड़ताल भी की जा रही है।

नोएडा के सेक्टर-54 में बना वैटलैंड, जिससे जरिए बढ़ेगा वाटर लेवल।

एओए और आरडब्ल्यूए स्वता करे जांच
नोएडा प्राधिकरण में पर्यावरण सेल के सलाहकार गुंजन मिश्रा ने बताया कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग की जांच के लिए आदेश मिल गया है। इसकी प्रति प्राधिकरण के सभी वर्क सर्किल और सभी आरडब्ल्यूए और एओए को जारी कर दी गई है। एओए और सेक्टर के आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों से कहा गया है कि वे अपने यहां स्वयं रेन वाटर हार्वेस्टिंग की जांच कराकर रिपोर्ट सब्मिट करे।

नोएडा का ग्राउंड वाटर लेवल

साल नोएडा
2017 19.56
2018 18.88
2019 18.96
2020 20.15
2021 23.54
2022 23.68

About GE-Live

Check Also

गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर शराब से भरे दो लावारिस बैग बरामद, RPF ने 132 टेट्रा पैक किए जब्त

Gorakhpur News: गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और अपराध आसूचना शाखा की …