लखनऊ: राजधानी लखनऊ में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बच्चों की शिक्षा और बेहतर समाज के निर्माण पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में संगठन के राष्ट्रीय संयोजक शाहिद अख्तर ने अभिभावकों से अपील की कि वे आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अपने बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और समाज की तरक्की का मजबूत आधार है।
यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ प्रचारक, अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संरक्षक डॉ. इंद्रेश कुमार के नेतृत्व में आयोजित किया गया। इसमें संगठन से जुड़े पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
बच्चों की शिक्षा को बनाएं पहली प्राथमिकता
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाहिद अख्तर ने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों की शिक्षा के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए। उन्होंने शिक्षा के महत्व को समझाते हुए कहा, “आप एक रोटी में आधी खुद खाइए और आधी अपने बच्चों को खिलाइए, लेकिन अपने बच्चों को जरूर शिक्षित करिए।”
उनके इस संदेश का उद्देश्य अभिभावकों को यह समझाना था कि सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद बच्चों की पढ़ाई से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाना परिवार की जिम्मेदारी के साथ-साथ समाज के बेहतर भविष्य के लिए भी आवश्यक है।
शिक्षित बच्चों से होगा बेहतर समाज का निर्माण
शाहिद अख्तर ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। पढ़ाई के जरिए बच्चे ज्ञान प्राप्त करते हैं, अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को समझते हैं और भविष्य में बेहतर अवसर हासिल करने के योग्य बनते हैं।
उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दें और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें। उनके अनुसार, शिक्षित युवा समाज और राष्ट्र के विकास में अहम योगदान दे सकते हैं। इसलिए बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए परिवारों को गंभीरता से प्रयास करना चाहिए।
कार्यक्रम में संगठन के पदाधिकारी रहे मौजूद
लखनऊ में आयोजित इस कार्यक्रम में ठाकुर राजा रईस, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के लखनऊ नगर संयोजक अब्दुल हन्नान समेत संगठन के अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान बच्चों की शिक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने और अभिभावकों को पढ़ाई के प्रति प्रेरित करने के संदेश पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम का प्रमुख संदेश यही रहा कि बच्चों को शिक्षित करना उनके व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ पूरे समाज की प्रगति के लिए जरूरी है। अभिभावक यदि कठिन परिस्थितियों में भी बच्चों की पढ़ाई जारी रखने का प्रयास करें, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर संभावनाएं तैयार की जा सकती हैं।
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