पौराणिक कथा में सावित्री द्वारा सत्यवान के प्राण वापस लाने की कहानी मशहूर है। कुछ ऐसा ही साहसिक उदाहरण ओडिशा के Mayurbhanj district में देखने को मिला, जहां एक महिला ने अपनी जान की परवाह किए बिना भालुओं के झुंड से मुकाबला कर अपने पति को बचा लिया।
17 फरवरी को हुआ हमला
यह घटना 17 फरवरी की बताई जा रही है। जिले के करंजिया इलाके में मालदे सोरेन अपनी पत्नी लिली सोरेन के साथ जंगल में पत्ते लेने गए थे। तभी जंगली भालुओं के झुंड ने अचानक उन पर हमला कर दिया। हमले में मालदे गंभीर रूप से घायल हो गए।
हिम्मत दिखाकर किया मुकाबला
स्थिति बेहद खतरनाक थी, लेकिन लिली ने घबराने के बजाय साहस दिखाया। उन्होंने अपने पास मौजूद लकड़ी काटने के औजार से भालू पर पलटवार किया। उनके जवाबी हमले से भालू घायल हो गया और जंगल की ओर भाग गया। इस बहादुरी की बदौलत उनके पति की जान बच सकी।
गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती
हमले में मालदे के सिर पर गहरे घाव आए हैं। उन्हें पहले स्थानीय स्तर पर उपचार दिया गया, बाद में बेहतर इलाज के लिए Keonjhar district के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
जंगली जानवरों के हमलों में बढ़ोतरी
हाल के दिनों में देश के कई हिस्सों से जंगली जानवरों के हमलों की घटनाएं सामने आई हैं। Hazaribagh में 13 फरवरी को जंगली हाथियों के झुंड ने एक परिवार पर हमला कर दिया था, जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी और एक बच्ची गंभीर रूप से घायल हुई थी।
यह घटना एक बार फिर जंगल से सटे इलाकों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की ओर इशारा करती है।
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