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‘दिल्ली में घर, केस असम में तो तेलंगाना HC क्यों?’ सुप्रीम कोर्ट में हिमंत सरकार का सवाल, पवन खेड़ा को झटका

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम जमानत पर रोक लगा दी है और उन्हें जमानत के लिए असम की निचली अदालत का रुख करने को कहा है।

यह मामला उस समय शुरू हुआ जब खेड़ा ने गुवाहाटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उनके पास तीन देशों के पासपोर्ट हैं। इस पर रिंकी भुइयां की शिकायत के बाद असम में एफआईआर दर्ज की गई।

जांच के दौरान असम पुलिस खेड़ा के दिल्ली स्थित घर पहुंची, लेकिन वह वहां नहीं मिले। इसके बाद खेड़ा ने तेलंगाना हाई कोर्ट से एक सप्ताह की अग्रिम जमानत ले ली।

इस फैसले के खिलाफ असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। राज्य की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में दलील दी कि खेड़ा ने गलत तरीके से तेलंगाना हाई कोर्ट का रुख किया। उनका कहना था कि न तो घटना तेलंगाना से जुड़ी है और न ही एफआईआर वहां दर्ज हुई है, ऐसे में उस अदालत का हस्तक्षेप उचित नहीं है।

उन्होंने इसे ‘फोरम शॉपिंग’ बताया, यानी अपनी सुविधा के अनुसार कोर्ट चुनने की कोशिश। मेहता ने कहा कि कोई व्यक्ति केवल किसी राज्य में पता दिखाकर अपनी पसंद की अदालत में याचिका नहीं लगा सकता।

सुनवाई के दौरान जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने भी माना कि क्षेत्राधिकार से जुड़े कानूनी सिद्धांतों को नजरअंदाज किया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामला असम से जुड़ा है, इसलिए अग्रिम जमानत के लिए वहीं की अदालत में आवेदन करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय की है। साथ ही कहा कि यदि खेड़ा असम की अदालत में जमानत याचिका दाखिल करते हैं, तो स्थानीय कोर्ट स्वतंत्र रूप से मामले के तथ्यों के आधार पर फैसला लेगा।

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