संघ और ब्रह्माकुमारीज का उद्देश्य एक, रास्ते अलग – विश्व शांति सरोवर का 7वां वर्धापन दिवस
ब्रह्माकुमारीज नागपुर के विश्व शांति सरोवर का शुक्रवार को सातवां वर्धापन दिवस मनाया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारीज का कार्य मानव कल्याण और संपूर्ण दुनिया को सुख-शांति प्रदान करना है।
डॉ. भागवत ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज शील और चरित्र जगाते हैं और यह चरित्र जागरण शरीर, मन और बुद्धि के परे जाकर अपने अंतर की यात्रा से होता है। संघ भी यही मानता है कि बदलना है तो अंदर से बदलो। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी कार्यकर्ता अपने-अपने तरीके से काम कर सकते हैं, लेकिन उद्देश्य एक ही होना चाहिए – अंदर को जागृत करना।
दुनिया में झगड़े की जड़
भागवत ने कहा कि दुनिया में झगड़े की जड़ स्वार्थ है। जब केवल “मैं और मेरा” की भावना होती है, तो दूसरों के हित का ध्यान नहीं रखा जाता। उन्होंने कहा कि यदि हम इसे बदलकर “हम और हमारा” समझें, तो कई समस्याओं का समाधान संभव है।
भारत की भूमिका और अपनापन
डॉ. भागवत ने बताया कि भारत अपनी परंपरा और ज्ञान के माध्यम से विश्व को मार्गदर्शन देने की शक्ति रखता है। ब्रह्माकुमारीज जैसे संगठन समाज में प्रेम, शांति और संतोष की भावना को फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत में अपनापन और संतोषधन की भावना अधिक है, जिससे लोग सुखपूर्वक जीवन जी सकते हैं।
कार्यक्रम की मुख्य बातें
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शांतिवन मुख्यालय से प्रतिनिधि मंडल ने हिस्सा लिया।
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अतिरिक्त महासचिव और वरिष्ठ राजयोग शिक्षिकाओं ने शांति, प्रेम और सद्भाव की आवश्यकता पर जोर दिया।
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मोहन भागवत का स्वागत शॉल पहनाकर और स्मृति चिन्ह देकर किया गया।
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संस्थान की वार्षिक सेवा रिपोर्ट और सामाजिक योगदान की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारीज के विभिन्न सदस्य और अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने शांति और सेवा के संदेश को साझा किया।
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