भगवान जगन्नाथ की 34वीं रथयात्रा मथुरा में गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ संपन्न हुई। देर रात तक चली इस भव्य यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और भगवान जगन्नाथ, प्रभु बलभद्र तथा माता सुभद्रा के दिव्य रथ के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
रथयात्रा का शुभारंभ लक्ष्मीनगर स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर से हुआ। जैसे ही सुसज्जित रथ मंदिर परिसर से रवाना हुआ, पूरा क्षेत्र “जय जगन्नाथ” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और आस्था के साथ रथ की रस्सी खींची, जिसे धार्मिक परंपरा में अत्यंत शुभ माना जाता है।
यात्रा निर्धारित मार्ग से होते हुए जन्मभूमि लिंक रोड और हनुमान मंदिर के समीप से गुजरकर रामनगर स्थित श्री कामाख्या देवी मंदिर पहुंची। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर को भगवान जगन्नाथ की मौसी गुंडिचा का निवास माना जाता है, जहां रथयात्रा के बाद भगवान कुछ दिनों तक विराजमान रहते हैं।
रथयात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं, सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया। पूरे मार्ग में भजन-कीर्तन, हरिनाम संकीर्तन और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।
मंदिर से जुड़े सेवायतों के अनुसार यह रथयात्रा कई वर्षों से निरंतर आयोजित की जा रही है। परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ अब अगले आठ दिनों तक मौसी गुंडिचा मंदिर में विराजमान रहेंगे। इस दौरान प्रतिदिन फूल बंगला, छप्पन भोग, भजन संध्या, संकीर्तन और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल होकर भगवान के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे।
पूरी रथयात्रा के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया, जिससे श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्ण और व्यवस्थित वातावरण में धार्मिक आयोजन का आनंद लिया। इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर मथुरा की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत रूप से प्रस्तुत किया।
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