कानपुर: शहर के धनकुट्टी स्थित रंजीतपुरवा की संकरी गलियां इन दिनों फिल्मी गतिविधियों का केंद्र बनी हुई हैं। यहां निर्देशक सुधीर मिश्रा की फिल्म ‘गांधी एंड माय मदर’ की शूटिंग के लिए खास सेट तैयार किया गया। फिल्म में पश्चिम बंगाल की गलियों का माहौल दिखाने के लिए दुकानों, चाय के स्टॉल और बंगाली भाषा में लिखे बोर्डों का इस्तेमाल किया गया। शूटिंग की तैयारियों का जायजा लेने के लिए निर्देशक सुधीर मिश्रा खुद करीब तीन घंटे तक गलियों में घूमते रहे। इस दौरान उन्होंने कलाकारों को उनके संवाद समझाए और दृश्यों को बेहतर बनाने के लिए टीम के साथ चर्चा की।
रंजीतपुरवा की गलियों को दिया बंगाल का रूप
फिल्म की शूटिंग के लिए धनकुट्टी के रंजीतपुरवा इलाके को खास अंदाज में सजाया गया। संकरी गलियों में बंगाली भाषा में लिखे साइनबोर्ड लगाए गए, जबकि चाय के स्टॉल और सब्जियों की दुकानें बनाकर पश्चिम बंगाल जैसा माहौल तैयार किया गया। फिल्म में दंगों से प्रभावित इलाकों की स्थिति और वहां उजड़ चुके जीवन को पर्दे पर दिखाने की तैयारी की गई।
निर्देशक सुधीर मिश्रा ने लोकेशन पर पहुंचकर सेट का बारीकी से निरीक्षण किया। वह असिस्टेंट डायरेक्टर के साथ चर्चा करते नजर आए। इसके अलावा उन्होंने कलाकारों को संवाद बोलने के तरीके और दृश्यों के अनुसार अभिनय करने की जानकारी भी दी। एक दृश्य की तैयारी में लगभग तीन घंटे लगे।
दंगे और आगजनी के दृश्यों के लिए विशेष इंतजाम
फिल्म में दंगों और आगजनी से जुड़े दृश्य फिल्माने के लिए सेट पर विशेष व्यवस्था की गई। चाय के स्टॉल के पास गैस सिलेंडर से पाइप जोड़कर आग से संबंधित दृश्य तैयार करने की व्यवस्था की गई। फिल्म की कहानी के मुताबिक इलाके में अशांति और तबाही के बाद के हालात दिखाने के लिए दुकानों और गलियों को उसी रूप में सजाया गया।
शूटिंग के दौरान सेट पर महिलाएं और अन्य कलाकार भी अपने दृश्यों के लिए तैयार नजर आए। रात करीब एक बजे के बाद रंजीतपुरवा की गलियों में फिल्मांकन शुरू हुआ। पूरी टीम ने देर रात से लेकर सुबह तक अलग-अलग दृश्यों को कैमरे में कैद किया।
कत्था वाला धर्मशाला में फिल्माए गए प्रदर्शन के दृश्य
कानपुर में फिल्म की शूटिंग के दौरान धनकुट्टी स्थित कत्था वाला धर्मशाला में भी एक महत्वपूर्ण दृश्य फिल्माया गया। इसमें प्रदर्शनकारियों को हाथों में काले झंडे लेकर विरोध करते हुए दिखाया गया। वहीं, अंग्रेज पुलिसकर्मियों के रूप में मौजूद कलाकार प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश करते नजर आए।
शुक्रवार शाम करीब छह बजे धनकुट्टी इलाके में शूटिंग शुरू हुई, जो शनिवार सुबह छह बजे तक चली। इस दौरान फिल्म के कई दृश्यों को पूरा किया गया। हालांकि, शूटिंग के तीसरे दिन अभिनेता मनोज बाजपेयी सेट पर नहीं पहुंचे। शूटिंग से जुड़े लोगों के मुताबिक, उनका एक दृश्य पहले दिन ही फिल्माया जाना प्रस्तावित था। फिल्म के लिए आनंद बाग में भी एक दृश्य तैयार किया जाना था।
इस बार सुधीर मिश्रा नहीं चख सके शुक्ला का मलाई-मक्खन
कानपुर में शूटिंग के दौरान फिल्मी टीम के लिए काम के साथ-साथ शहर के खानपान का भी खास महत्व रहा। निर्देशक सुधीर मिश्रा को कानपुर के लाठी मोहल स्थित शुक्ला की मलाई-मक्खन काफी पसंद है। पिछली बार शहर में शूटिंग के दौरान उन्होंने इसका भरपूर स्वाद लिया था, लेकिन इस बार उनकी यह पसंद पूरी नहीं हो सकी।
दरअसल, यहां मिलने वाला मलाई-मक्खन मुख्य रूप से सर्दियों में उपलब्ध होता है। मौसम अनुकूल नहीं होने के कारण इस बार निर्देशक इसका स्वाद नहीं चख पाए। कानपुर में शूटिंग के लिए दोबारा आने के बावजूद उनका पसंदीदा व्यंजन इस बार उनसे दूर रहा।
शहर के होटल का खाना भी है निर्देशक की पसंद
सुधीर मिश्रा को कानपुर के सिविल लाइंस इलाके के एक होटल का खाना भी पसंद है। शूटिंग के दौरान फिल्म की टीम के लिए इसी होटल से भोजन मंगाया जाता रहा है। हालांकि, इस बार निर्देशक ने वहां से केवल सलाद खाया।
तीन दिनों के भीतर शूटिंग का काम पूरा करना टीम के लिए बड़ी चुनौती रहा। कम समय में अलग-अलग लोकेशन पर दृश्यों को फिल्माना और रात के समय लगातार काम करना कलाकारों तथा तकनीकी टीम के लिए व्यस्तता भरा अनुभव रहा।
तीन दिनों में 400 से अधिक जूनियर कलाकारों ने किया काम
कानपुर में तीन दिनों तक चली शूटिंग में 400 से अधिक जूनियर कलाकारों ने हिस्सा लिया। इनमें कानपुर के अलावा लखनऊ और उन्नाव के कलाकार भी शामिल थे। फिल्म के दृश्यों को वास्तविक रूप देने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को अलग-अलग भूमिकाओं में शामिल किया गया।
फिल्म की शूटिंग देखने और उसमें काम करने के लिए कुछ लोग अपने शौक के कारण भी पहुंचे। स्थानीय कलाकारों के लिए यह फिल्मी दुनिया को करीब से देखने और पर्दे के पीछे होने वाली तैयारियों को समझने का अवसर रहा।
कानपुर में अब तक 38 फिल्मों की शूटिंग करा चुके हैं रिजवान अख्तर
फिल्म के लाइन प्रोड्यूसर मोहम्मद रिजवान अख्तर मूल रूप से उन्नाव के रहने वाले हैं। वह कानपुर में करीब 27 फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग करा चुके हैं। उनके मुताबिक, अब तक वह कुल 38 फिल्मों की शूटिंग से जुड़े काम संभाल चुके हैं। इस दौरान उन्होंने कई बड़े अभिनेताओं की फिल्मों के लिए स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाएं भी कराई हैं।
वहीं, कानपुर के कमलाटावर क्षेत्र के रहने वाले नवल अग्रवाल भी फिल्म शूटिंग से जुड़े काम में सक्रिय हैं। वह अब तक करीब 18 फिल्मों की शूटिंग कानपुर में करा चुके हैं। इस दौरान उन्हें वरुण धवन और अनिल कपूर जैसे अभिनेताओं के साथ काम करने का अवसर मिला है।
नवाजुद्दीन सिद्दीकी के हमशक्ल शाहिद नवाज भी पहुंचे
शूटिंग के दौरान शाहिद नवाज भी वहां पहुंचे, जो फिल्मों में अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी के हमशक्ल के रूप में काम करते हैं। शाहिद कानपुर के बेकनगंज इलाके में रहते हैं। उन्होंने बताया कि वह शूटिंग देखने और पुराने परिचितों से मुलाकात करने के लिए आए थे।
इससे पहले कानपुर में फिल्माई गई फिल्म ‘रात अकेली है’ की शूटिंग के दौरान भी शाहिद नवाज चर्चा में रहे थे। स्थानीय फिल्म गतिविधियों में उनकी मौजूदगी ने एक बार फिर लोगों का ध्यान खींचा।
कानपुर में ‘गांधी एंड माय मदर’ की शूटिंग ने शहर की गलियों को फिल्मी सेट में बदल दिया। स्थानीय कलाकारों की भागीदारी, ऐतिहासिक माहौल तैयार करने की कोशिश और सीमित समय में शूटिंग पूरी करने की चुनौती इस फिल्मांकन की प्रमुख विशेषताएं रहीं।
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