बहराइच में ‘ऑपरेशन भेड़िया’ में अब तक 5 भेड़ियों को पकड़ा जा चुका है। इनमें 2 भेड़ियों को गोरखपुर और 2 को लखनऊ के जू में रखा गया है। वहीं, 1 भेड़िए की पकड़े जाने के बाद मौत हो गई। इन भेड़ियों ने नौ बच्चों समेत 10 लोगों की जान ली हैं।
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दोनों जू में भेड़ियों को क्वारंटाइन (बाकी जानवरों से अलग) रखा गया है। शुरू में ये भेड़िए मेडिकल टीम और केयर टेकर को देखते ही पिंजड़े के अंदर से हमला करने लगते थे। भेड़ियों को हर दिन 2 से 2.5 किलो बकरे और भैंस का मांस दिया जा रहा है। दोनों जू के एक्सपर्ट मान रहे हैं कि पेट पूरी तरह से भरने के बाद भेड़ियों के स्वभाव में काफी हद तक बदलाव दिखा है। वह अब पहले की तरह खूंखार नहीं हैं।
1. भेड़िए आखिर जंगल से भटककर आबादी की तरफ क्यों आए?
2. भेड़िए इतने हिंसक क्यों हो गए?
3. अब भेड़ियों का स्वभाव क्या है, उनकी डाइट कैसी चल रही है?
गोरखपुर के शहीद अशफाक उल्लाह खां प्राणी उद्यान के पशु चिकित्सक और वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने भेड़ियों को लेकर राय रखी…
भेड़िए भटके या उनके इलाके में भोजन खत्म हुआ होगा डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने कहा- भेड़ियों के जंगल से आबादी की तरफ आने के पीछे यह वजह हो सकती है कि जहां इनका इलाका है, अब वहां इन्हें भोजन नहीं मिल पा रहा होगा। दूसरी बड़ी वजह यह हो सकती है कि ये भेड़िए जंगल से भटककर बहराइच के तराई इलाके में आए थे।
चूंकि, बारिश का मौसम है और इलाका भी तराई है, तो इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है कि भेड़ियों के इलाके में बारिश और बाढ़ की वजह से पानी भर गया हो। इससे उन्हें अपना इलाका छोड़कर भोजन की तलाश में आबादी की तरफ आना पड़ा हो।
भूखे होने से जानवर और इंसान के बच्चों पर करने लगे हमला उन्होंने बताया- अमूमन भेड़िए इंसानों या बड़े जानवर को देखकर डरते हैं। लेकिन, यह भेड़िए काफी भूखे हैं। ऐसे में वे भोजन के लिए किसी छोटे जानवर को शिकार बना रहे थे या फिर भेड़ियों का झुंड मिलकर इंसानों पर भी अटैक कर रहा था। छोटे बच्चों पर अटैक आसान होता है। क्योंकि, जंगल में भी वह जानवरों के बच्चों को ही निशाना बनाते हैं। यही इनका पसंदीदा भोजन होता है।
डॉ. योगेश प्रताप ने कहा- जंगल में भेड़ियों को कई बार शिकार नहीं मिलता। वह दिनभर भूखे रह जाते हैं। कई दिनों तक पेट न भरने की वजह से ही वह आबादी की तरफ मूव करते हैं। बहराइच में भी ऐसा हो सकता है। यह थ्योरी इसलिए भी पुष्ट होती है, क्योंकि जब बाड़े में समय पर उन्हें मांस और पानी मिला, तब वे पूरी तरह से शांत हो गए। स्वभाव को देखकर अनुमान है कि 4-5 दिन में वे पूरी तरह से सामान्य हो जाएंगे।
हर रोज 2 किलो बकरे का मीट दिया जा रहा डॉ. योगेश प्रताप ने कहा- भेड़िए को देखने से लगता है कि पकड़े जाने से कुछ देर पहले उन्होंने किसी जानवर का शिकार किया है। भेड़िए को टीम ने शिकार का लालच देकर ही फंसाया था। मादा भेड़िया काफी भूखी थी। यहां लाने के बाद उसे पेट भर भोजन दिया जा रहा है। रोजाना एक भेड़िए को 2 किलो बकरे का गोश्त खाने में दिया जा रहा है।
डॉ. योगेश ने बताया- भेड़ियों के बाड़े के सामने वन विभाग या जू की टीम नहीं जाती। सिर्फ एक व्यक्ति भोजन देने के लिए जाता है, तब भेड़िया उसे देख नहीं पाता। केयर टेकर दूसरे केज में भोजन रखने के बाद दोनों के बीच लगे शटर को उठा देता है। ताकि, उसके जाने के बाद भेड़िए को भोजन मिल जाए।
अब कम हमला कर रहे भेड़िए पहले जब भेड़ियों का मेडिकल परीक्षण करने टीम गई। तब वह पिंजड़े के अंदर से ही अटैक करते थे। केयर टेकर पर भी हमला किया। अब वह शांत रहते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि उन्हें पर्याप्त और मनपसंद भोजन मिल रहा है।
क्वारंटाइन करने की क्या वजह है डॉ. योगेश बताते हैं- 14 दिनों तक क्वारंटाइन रखने की बड़ी वजह यह है कि अगर उसे किसी तरह की बीमारी हो, तो पता चल सके। दोनों भेड़ियों को अलग-अलग केज में रखा गया है। क्योंकि, साथ रहने पर दोनों में लड़ाई भी हो सकती है।
गोरखपुर में 11 सितंबर को लाया गया भेड़िया काफी हद तक शांत दिख रहा था।
अब बात लखनऊ के प्राणि उद्यान की…
दोनों भेड़ियों को जू हॉस्पिटल के अलग-अलग बाड़े में रखा गया बहराइच से लखनऊ जू में लाए गए दोनों भेड़ियों को अभी दूसरे भेड़ियों से अलग रखा गया है। एक भेड़िया नर है, दूसरी मादा। इन्हें जू में बने हॉस्पिटल में रखा गया है। यहां दोनों अलग-अलग पिंजड़े में हैं। पिंजड़े एक-दूसरे से 5 फीट की दूरी पर रखे गए हैं।
इन दोनों भेड़ियों के पिंजड़े साफ करने वाले रतन से हमने पूछा कि इनके लिए क्या अलग व्यवस्था करनी पड़ रही है? रतन कहते हैं- सुबह इनके बाड़ों की सफाई करनी होती है। ये बाड़े एक-दूसरे से कनेक्टेड होते हैं। भेड़िए को दूसरे बाड़े में भेजने के बाद शटर लगाकर सफाई की जाती है। फिर उन्हें खाने में 2Kg भैसे का मीट दिया जाता है।
ऐसा माना जाता है कि इंसानों पर हमला करने वाला भेड़िया अपने ग्रुप से निष्कासित होता है, इसलिए वह हिंसक हो जाता है। हमने इसी सवाल को एक अन्य कर्मचारी से पूछा। यह जानने की कोशिश की कि क्या भेड़िए के स्वाभाव में कुछ अंतर दिखा है क्या? वह कहते हैं- ऐसा अंतर नजर नहीं आया। यहां तो अभी तक एकदम शांत नजर आए। कभी हमला करने जैसी कोशिश नहीं की।
वह कहते हैं, दोनों भेड़िए एक-दूसरे को देखते रहते हैं। शुरुआत में एक भेड़िया पिंजड़े पर दांत व पंजे से काटने की कोशिश करता था। ऐसा लगता था कि वह दूसरे वाले भेड़िए के पास जाना चाहता है।
बहराइच में जब भेड़िया पकड़ा गया, तब वह पिंजरे में भी हिंसक था। अटैक करने की कोशिश कर रहा था।
DFO ने कहा- जंगल में छोड़े जा सकते हैं भेड़िए गोरखपुर के DFO विकास यादव ने कहा – पकड़े गए भेड़ियों का डॉक्टर के पैनल ने परीक्षण किया है। मादा भेड़िया की उम्र करीब 4 साल है। इन भेड़ियों को जंगल में छोड़ा जा सकता है। शासन की गाइडलाइन से यह सब तय होगा। हो सकता है कि इन्हें चिड़ियाघर में ही रखा जाए। हालांकि, शासन की जो भी गाइडलाइन होगी, उसके अनुसार फैसला लिया जाएगा।
भेड़ियों के हमले से अब तक 10 की मौत, 43 घायल दरअसल, बहराइच के तराई इलाके में भेड़िए 50 से ज्यादा गांवों में आतंक का पर्याय बने हुए थे। इनके हमले में 10 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि, 43 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। वन विभाग की टीम ने अब तक 5 भेड़ियों को पकड़ा है। जिसमें एक की मौत हो गई। वहीं, 2 भेड़ियों को गोरखपुर और 2 को लखनऊ चिड़ियाघर भेज दिया गया है।
भेड़िए पर दैनिक भास्कर की कवरेज भी पढ़िए…
बहराइच में भेड़िए ‘आदमखोर’ क्यों हुए:अल्फा भेड़िए के इशारे पर चलता है झुंड; इंसानों से 100 गुना ज्यादा सूंघ सकते हैं
5 सितंबर 2024 की रात करीब 9 बजे थे। बहराइच के लोधन पुरवा गांव में एक आदमखोर भेड़िए ने 10 साल के बच्चे पर हमला कर दिया। भेड़िए ने बच्चे पर पीछे से हमला किया और उसे खींचने की कोशिश की। बच्चे की चीख सुनकर घर के लोग बाहर निकल आए। भेड़िया बच्चे को वहीं छोड़कर भाग गया। उत्तर प्रदेश के बहराइच में भेड़िए का ये पहला हमला नहीं है। बीते 20 दिनों में आदमखोर भेड़िया 9 लोगों की जान ले चुका है। 40 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
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