पाकिस्तान में आवश्यक दवाओं की भारी कमी ने स्वास्थ्य सेवाओं को गंभीर चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, देश में 100 से अधिक जरूरी दवाओं की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिनमें कैंसर, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि दवाओं की नई कीमतों को मंजूरी मिलने में देरी और उत्पादन लागत में लगातार बढ़ोतरी के कारण कई दवा कंपनियों ने इन दवाओं का उत्पादन कम कर दिया या रोक दिया। इससे बाजार में दवाओं की उपलब्धता प्रभावित हुई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दवा नियामक प्राधिकरण ने पहले कई आवश्यक दवाओं की कीमतों में संशोधन की सिफारिश की थी, लेकिन प्रक्रिया लंबी खिंचने के कारण समस्या बनी रही। इस बीच आयातित कच्चे माल, बिजली, ईंधन, पैकेजिंग, परिवहन, श्रम और वित्तीय खर्च बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय मुद्रा के कमजोर होने से उत्पादन लागत में काफी इजाफा हुआ है।
फार्मा कंपनियों का कहना है कि मौजूदा मूल्य निर्धारण व्यवस्था के तहत उत्पादन लागत निकालना मुश्किल हो गया है। इसी वजह से कई दवाओं के निर्माण में कटौती की गई है, जिसका असर मरीजों पर पड़ रहा है।
पाकिस्तान के केमिस्ट्स और ड्रगिस्ट्स से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी चेतावनी दी है कि आवश्यक दवाओं की कमी से नकली और निम्न गुणवत्ता वाली दवाओं का कारोबार बढ़ सकता है, जो मरीजों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
इधर, दवाओं की कमी और अन्य समस्याओं को लेकर स्वास्थ्य क्षेत्र में भी असंतोष बढ़ रहा है। कराची के एक सरकारी अस्पताल के हाउस ऑफिसर्स ने बकाया स्टाइपेंड, सुरक्षा व्यवस्था और दवाओं की कमी जैसे मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने मांगें पूरी न होने पर बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) की सेवाएं प्रभावित करने की चेतावनी भी दी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दवाओं की आपूर्ति और मूल्य निर्धारण से जुड़ी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो पाकिस्तान की स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव और बढ़ सकता है तथा मरीजों को आवश्यक इलाज मिलने में और कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
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