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बिहार विधानसभा चुनाव: मतगणना से पहले सुरक्षा कड़ी, NDA और महागठबंधन की नजरें परिणाम पर टिकीं

बिहार विधानसभा चुनाव के दोनों चरणों में हुई बंपर वोटिंग के बाद राज्य की निगाहें अब मतगणना पर टिकी हुई हैं। एनडीए, महागठबंधन और प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी सरकार बनाने की तैयारी में जुटी हैं। राज्य के 38 जिलों में बनाए गए 46 काउंटिंग सेंटरों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। 6 और 11 नवंबर को हुए चुनाव में लगभग 7.45 करोड़ मतदाताओं ने 2,616 उम्मीदवारों का भाग्य तय किया।

चुनाव आयोग के अनुसार, ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को अत्यंत सुरक्षित रखा गया है और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जा रही है। मतगणना केंद्रों पर दो-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू है—भीतरी सुरक्षा केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और बाहरी सुरक्षा राज्य पुलिस के जिम्मे है। सभी मजबूत कमरे परिसरों में नियंत्रण कक्ष बनाए गए हैं, जिनमें वरिष्ठ जिला अधिकारी तैनात रहेंगे। संबंधित जिलों के सभी जिला चुनाव पदाधिकारियों और रिटर्निंग अधिकारियों को बार-बार निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।

महागठबंधन में आरजेडी, कांग्रेस, वाम दल, विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) और इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (आईआईपी) शामिल हैं। एनडीए में जेडीयू, बीजेपी, एलजेपी (रामविलास), हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) शामिल हैं। प्रमुख उम्मीदवारों में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा, आरजेडी के तेजस्वी यादव, जेडीयू के अनंत सिंह और बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार शामिल हैं।

मतगणना प्रक्रिया की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए राज्य के 38 जिलों में 46 केंद्रों पर कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। 243 विधानसभा क्षेत्रों में मतगणना रिटर्निंग अधिकारियों की देखरेख में होगी, उनके साथ 243 पर्यवेक्षक और उम्मीदवारों के एजेंट मौजूद रहेंगे। कुल 4,372 मतगणना टेबल लगाए गए हैं, प्रत्येक पर एक सुपरवाइजर, एक गणना सहायक और एक माइक्रो ऑब्जर्वर तैनात रहेंगे। इसके अलावा उम्मीदवारों की ओर से नियुक्त 18,000 से अधिक गणना एजेंट भी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।

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