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साजिद अनस उस्मानी का बयान: BJP से जुड़ने पर परिवार का हुआ विरोध, 2027 से पहले मुस्लिम समाज तक पहुंचने की तैयारी

कानपुर: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने अल्पसंख्यक मोर्चे के जरिए मुस्लिम समाज तक अपनी पहुंच बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है। कानपुर के साजिद अनस उस्मानी को भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उन्होंने मुस्लिम समाज को पार्टी से जोड़ने की रणनीति, विपक्ष की राजनीति और अपने परिवार के राजनीतिक अनुभवों पर विचार साझा किए।

अनस उस्मानी का कहना है कि भाजपा सरकार की योजनाओं का लाभ सभी समुदायों तक पहुंच रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल मुस्लिम समाज में भाजपा को लेकर डर पैदा करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के साथ जुड़ने के कारण उनके परिवार को सामाजिक विरोध का सामना करना पड़ा था।

मुस्लिम समाज तक पहुंचने के लिए क्या है भाजपा की रणनीति?

प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद अनस उस्मानी के सामने मुस्लिम समाज के बीच संगठन का विस्तार करने की चुनौती है। उनसे जब पूछा गया कि उत्तर प्रदेश की मुस्लिम आबादी को भाजपा से जोड़ने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे, तो उन्होंने कहा कि पार्टी का उद्देश्य सभी समुदायों को साथ लेकर चलना है।

उनके मुताबिक, केंद्र और राज्य सरकार की योजनाएं किसी एक धर्म या जाति तक सीमित नहीं हैं। गरीबों और जरूरतमंदों को सरकारी सुविधाओं का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक मोर्चा इन योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाएगा और उन्हें संगठन से जोड़ने का प्रयास करेगा।

2017 और 2022 के चुनावों में मुस्लिम वोट को लेकर क्या बोले?

उत्तर प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा को मुस्लिम मतदाताओं का कितना समर्थन मिला, इस सवाल पर अनस उस्मानी ने विपक्षी दलों की भूमिका पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कुछ राजनीतिक दल मुस्लिम समाज को भाजपा के नाम पर डराने की कोशिश करते हैं।

उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ मुस्लिम समुदाय के लोगों को भी मिल रहा है। उनके अनुसार, पार्टी लोगों के बीच जाकर योजनाओं के लाभ और सरकार के कामकाज की जानकारी साझा करेगी।

अनस उस्मानी ने दावा किया कि भाजपा की नीतियों में धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता। उन्होंने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी सहित विपक्षी दलों पर मुस्लिम समुदाय के बीच भाजपा को लेकर आशंकाएं पैदा करने का आरोप लगाया।

हालांकि, मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन में बदलाव का आकलन करने के लिए संबंधित चुनावों के आंकड़ों और स्वतंत्र चुनावी अध्ययनों को देखना जरूरी है। किसी पार्टी के नेता के दावे को मतदाताओं की वास्तविक पसंद का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।

ओवैसी की सक्रियता पर अनस उस्मानी ने उठाए सवाल

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले असदुद्दीन ओवैसी की राजनीतिक गतिविधियों और विपक्षी दलों के साथ संभावित गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर अनस उस्मानी ने उनकी राजनीति की आलोचना की।

उन्होंने आरोप लगाया कि ओवैसी मुस्लिम समाज की भावनाओं का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए करते हैं। अनस उस्मानी ने मुस्लिम मतदाताओं से अपील की कि वे भावनाओं के बजाय सरकार के कामकाज और विकास योजनाओं को ध्यान में रखकर अपना निर्णय लें।

उन्होंने कहा कि भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा प्रदेशभर में संपर्क अभियान चलाएगा। इस दौरान लोगों को सरकारी योजनाओं और उनके लाभार्थियों से जुड़े आंकड़ों की जानकारी दी जाएगी। उनका कहना है कि पार्टी का प्रयास मुस्लिम समाज के बीच मौजूद भ्रांतियों को दूर करना और संगठन के प्रति विश्वास बढ़ाना होगा।

ये टिप्पणियां अनस उस्मानी के राजनीतिक विचार हैं। ओवैसी और उनकी पार्टी की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए उनके सार्वजनिक बयानों, नीतियों और चुनावी प्रदर्शन का स्वतंत्र मूल्यांकन जरूरी है।

मस्जिद और मजार से जुड़े मामलों पर क्या कहा?

मस्जिदों या मजारों से संबंधित विवादों और कार्रवाई को लेकर सवाल किए जाने पर अनस उस्मानी ने कानून के समान रूप से लागू होने की बात कही। उनका कहना था कि यदि किसी निर्माण को अवैध पाया जाता है और अदालत की ओर से आदेश जारी किया जाता है, तो संबंधित कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होनी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल ऐसी घटनाओं का उल्लेख करके मुस्लिम समाज के बीच डर का माहौल बनाने का प्रयास करते हैं। उनके मुताबिक, अल्पसंख्यक मोर्चा लोगों के बीच जाकर संबंधित मामलों के तथ्यों और सरकारी आंकड़ों के आधार पर अपनी बात रखेगा।

हालांकि, किसी विशेष मामले में कार्रवाई की वैधता का आकलन संबंधित दस्तावेजों, अदालत के आदेशों और लागू कानून के आधार पर ही किया जा सकता है।

भाजपा से जुड़ने पर परिवार को झेलना पड़ा सामाजिक विरोध

अनस उस्मानी ने अपने परिवार के राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए बताया कि उनके पिता तनवीर हैदर उस्मानी भाजपा की राजनीति में सक्रिय रहे थे। उनके अनुसार, पिता के राजनीतिक फैसलों के कारण परिवार को समाज के कुछ लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ा।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा से जुड़ाव के कारण उनके परिवार को अपमानजनक टिप्पणियां भी सुननी पड़ीं और कुछ लोगों ने संबंध तक समाप्त कर लिए। अनस उस्मानी के मुताबिक, परिवार को काफिर कहे जाने जैसी बातें भी झेलनी पड़ीं।

उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों के बावजूद उनके पिता अपनी राजनीतिक विचारधारा पर कायम रहे। अनस उस्मानी ने बताया कि विद्यार्थी परिषद, भाजपा युवा मोर्चा और अन्य संगठनों में काम करने के दौरान उनकी राजनीतिक सोच और मजबूत हुई।

प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने को उन्होंने पार्टी के विश्वास और सम्मान के रूप में देखा। उनका कहना है कि वह इस भूमिका में संगठन को मजबूत करने और अपने दायित्वों को निभाने का प्रयास करेंगे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर बनी धारणा पर भी रखी बात

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से अपने जुड़ाव और मुस्लिम समाज के एक वर्ग में संघ को लेकर मौजूद धारणाओं के बारे में पूछे जाने पर अनस उस्मानी ने कहा कि संगठन के बारे में कई भ्रांतियां फैली हुई हैं।

उन्होंने संघ की विचारधारा को एकात्म मानववाद, वसुधैव कुटुंबकम और सर्वे भवन्तु सुखिनः की भावना से जोड़ते हुए कहा कि समाज में भाईचारा और सभी के कल्याण का संदेश दिया जाता है।

उनके मुताबिक, अल्पसंख्यक समाज के बीच संवाद के जरिए संघ और भाजपा को लेकर बनी धारणाओं पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए प्रत्यक्ष संपर्क और तथ्यों पर आधारित संवाद को प्राथमिकता दी जाएगी।

2027 के चुनाव से पहले अल्पसंख्यक मोर्चे के सामने चुनौती

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। अनस उस्मानी के बयानों से स्पष्ट है कि संगठन मुस्लिम समाज के बीच सरकारी योजनाओं का प्रचार करने, पार्टी की विचारधारा समझाने और स्थानीय स्तर पर संपर्क बढ़ाने पर जोर देना चाहता है।

हालांकि, इस प्रयास का चुनावी प्रभाव कितना होगा, यह आने वाले समय में संगठन की गतिविधियों, स्थानीय मुद्दों और मतदाताओं की प्रतिक्रिया से स्पष्ट होगा। फिलहाल, प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अनस उस्मानी के सामने पार्टी और मुस्लिम समुदाय के बीच संवाद बढ़ाने की जिम्मेदारी है।

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