तेलंगाना की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। धर्मपुरी अरविंद ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर गंभीर आरोप लगाते हुए एक विवादित टिप्पणी की है।
अरविंद ने दावा किया कि सोमवार को होने वाली कैबिनेट बैठक से पहले मुख्यमंत्री टोपी पहनकर ‘कलमा’ पढ़ेंगे और उसी के बाद बैठक की शुरुआत करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की कांग्रेस सरकार अपनी सत्ता बचाने के लिए AIMIM के दबाव में काम कर रही है।
तुष्टीकरण का आरोप
भाजपा सांसद ने कहा कि यदि सरकार किसी विशेष दल या समुदाय के दबाव में फैसले लेती है, तो वह पूरे राज्य के हितों की अनदेखी कर सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व विकास के मुद्दों से हटकर वोट बैंक की राजनीति में उलझ गया है।
अरविंद ने ‘निज़ाम संस्कृति’ के संदर्भ में भी टिप्पणी करते हुए कहा कि भाजपा ऐसे किसी भी राजनीतिक समझौते का विरोध करेगी, जिसे वह तुष्टीकरण की राजनीति मानती है। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को सड़क से संसद तक उठाएगी।
राजनीतिक माहौल में बढ़ा तनाव
यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच ध्रुवीकरण को लेकर पहले से ही तीखी बहस चल रही है। भाजपा लगातार कांग्रेस सरकार के कुछ फैसलों को अल्पसंख्यक तुष्टीकरण से जोड़कर सवाल उठा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में तेलंगाना की राजनीति में ‘हिंदुत्व’ बनाम ‘तुष्टीकरण’ जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं।
फिलहाल, मुख्यमंत्री कार्यालय या कांग्रेस की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस टिप्पणी ने राज्य की सियासत में नई बहस को जन्म दे दिया है।
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