Iran और United States के बीच करीब छह हफ्तों तक चले तनाव के बाद हालात भले ही फिलहाल शांत नजर आ रहे हों, लेकिन स्थायी समाधान अभी दूर दिखाई दे रहा है। Masoud Pezeshkian के नेतृत्व वाले ईरान और Donald Trump के बीच टकराव नए रूप में सामने आ रहा है। इस्लामाबाद में हुई बातचीत भी बेनतीजा रही, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए सख्त रुख अपनाया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि Strait of Hormuz को नहीं खोला गया, तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई कर सकता है, जिसमें नौसैनिक नाकेबंदी तक शामिल हो सकती है। यह जलमार्ग बेहद अहम है, क्योंकि दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है।
ईरान भी अब जवाबी रणनीति के तहत इसी जलडमरूमध्य को अपना सबसे बड़ा दबाव का हथियार बना रहा है। जिस तरह China ने पहले अमेरिकी टैरिफ के जवाब में रेयर अर्थ मिनरल्स के निर्यात को हथियार बनाया था, उसी तरह ईरान अब तेल सप्लाई को प्रभावित कर वैश्विक बाजारों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
पहले यह मार्ग अंतरराष्ट्रीय आवाजाही के लिए खुला रहता था, जहां ईरान केवल निगरानी करता था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। ईरान जहाजों की आवाजाही पर ज्यादा नियंत्रण दिखा रहा है और सुरक्षित मार्ग के बदले शुल्क लेने की भी कोशिश कर रहा है। इससे खाड़ी देशों और वैश्विक व्यापार पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
इस तनाव का असर अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में साफ दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है और ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है। अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे आम लोगों पर महंगाई का बोझ बढ़ेगा।
ईरान रोजाना लाखों बैरल तेल का निर्यात करता है। यदि इसमें किसी तरह की रुकावट आती है, तो वैश्विक सप्लाई पर सीधा असर पड़ेगा और कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।
ईरानी नेताओं ने साफ संकेत दिए हैं कि वे पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। Mohammad Bagher Ghalibaf ने चेतावनी देते हुए कहा कि आने वाले समय में पेट्रोल की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे मौजूदा दरें लोगों को कम लगने लगेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह टकराव लंबा चला, तो तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर जा सकती हैं। इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, महंगाई और ब्याज दरों पर पड़ेगा।
कुल मिलाकर, Strait of Hormuz को लेकर बढ़ता तनाव आने वाले समय में पूरी दुनिया के लिए आर्थिक चुनौती बन सकता है और Iran–United States के बीच यह टकराव लंबे समय तक जारी रहने की आशंका है।
Global Express Live