Kanpur के GSVM Medical College में मानसिक रोग विभाग की नई बिल्डिंग लगभग बनकर तैयार हो चुकी है, लेकिन जरूरी सुविधाओं और बजट की कमी के कारण अब तक इसे शुरू नहीं किया जा सका है। करीब दो साल से निर्माणाधीन इस परियोजना की तय समयसीमा भी खत्म हो चुकी है, फिर भी भवन का हैंडओवर मेडिकल कॉलेज प्रशासन को नहीं मिला है।
फर्नीचर और मशीनों के लिए मांगे गए अतिरिक्त करोड़ों रुपए
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने नई बिल्डिंग को पूरी तरह संचालित करने के लिए शासन से लगभग 3 करोड़ रुपए के अतिरिक्त बजट की मांग की है। यह राशि फर्नीचर, एसी, मेडिकल मशीनों और अन्य जरूरी सुविधाओं के लिए मांगी गई है।
प्रिंसिपल Dr. Sanjay Kala की ओर से करीब 2.91 करोड़ रुपए फर्नीचर और मशीनों के लिए, जबकि 4.34 लाख रुपए साज-सज्जा के लिए प्रस्तावित किए गए हैं। कुल मिलाकर 2 करोड़ 95 लाख 49 हजार 572 रुपए की अतिरिक्त जरूरत बताई गई है।
मरीजों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
नई तीन मंजिला बिल्डिंग मानसिक रोगियों के बेहतर इलाज और सुविधाओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। यहां चिड़चिड़ापन, अवसाद, आत्महत्या के विचार, बार-बार एक ही व्यवहार दोहराने की समस्या और नशे की लत जैसी मानसिक बीमारियों का इलाज किया जाएगा।
इसके अलावा बच्चों की काउंसलिंग और भर्ती के लिए अलग निजी कमरे भी बनाए गए हैं। बिल्डिंग में 10 पुरुष वार्ड, 10 महिला वार्ड और 10 डी-एडिक्शन बेड तैयार किए गए हैं।
डॉक्टरों और छात्रों के लिए भी विशेष व्यवस्था
नई बिल्डिंग में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के लिए अलग कमरे, योगा रूम, कॉन्फ्रेंस हॉल, मीटिंग रूम और छात्रों के लिए क्लासरूम भी बनाए गए हैं। इसके अलावा दो लिफ्ट और हर मंजिल पर तीन कॉमन वॉशरूम की सुविधा भी दी गई है।
डेडलाइन खत्म, फिर भी जारी है निर्माण कार्य
निर्माण एजेंसी को 12 मार्च 2026 तक काम पूरा करना था, लेकिन दो महीने बाद भी भवन पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया है। फिलहाल एसी इंस्टॉलेशन और सर्वर रूम तैयार करने का काम जारी है।
इस परियोजना के लिए शासन पहले ही 21 करोड़ 17 लाख 35 हजार रुपए का बजट जारी कर चुका है। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी कानपुर की मै. गंगा इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड को दी गई थी।
शासन को भेजा गया प्रस्ताव
मानसिक रोग विभाग के एचओडी Dr. Dhananjay Chaudhary की अध्यक्षता में तैयार प्रस्ताव को मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने शासन के पास भेज दिया है। शासन से मंजूरी और बजट जारी होने के बाद ही बाकी सुविधाओं का काम पूरा हो सकेगा।
डॉ. धनंजय चौधरी के मुताबिक भवन का निर्माण तय समय से पहले लगभग पूरा करा लिया गया था, लेकिन अब फर्नीचर और अन्य संसाधनों की उपलब्धता का इंतजार है। फिलहाल अस्थायी व्यवस्था करने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि मरीजों को जल्द सुविधा मिल सके।
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