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KGMU के सर्वश्रेष्ठ मेडलिस्ट ने कोलकाता की घटना पर चर्चा की: IAS बनना चाहने वाली डॉ. देवांशी से बातचीत – Lucknow समाचार

 

KGMU के 20वें कॉन्वोकेशन की टॉप मेडलिस्ट MBBS स्टूडेंट डॉ.देवांशी कटियार

KGMU के 20वें कॉन्वोकेशन में 15 मेडल पाने वाली MBBS स्टूडेंट देवांशी कटियार आगे चलकर IAS ऑफिसर बनना चाहती हैं। उनका मानना हैं कि जब वो IAS ऑफिसर बन जाएंगी, तो कोलकाता की घटना के बाद से देशभर के डॉक्टर जिन मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं, ऐसी तमाम मां

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दैनिक भास्कर ने KGMU के सबसे प्रतिष्ठत हेविट गोल्ड मेडल अजर चांसलर गोल्ड मेडल समेत कुल 15 मेडल और अवॉर्ड पाने वाले देवांशी से खास बातचीत कर उनके इस सफर और भावी लक्ष्य के बारे में जाना। आप भी पढ़िए…क्या कहती हैं देवांशी..

सवाल – सबसे पहले और सबसे ज्यादा मेडल पाने पर कैसा लग रहा हैं?

जवाब – बहुत अच्छा लग रहा हैं। बहुत सारा हार्ड वर्क इन्वॉल्व रहा। इसका कोई शॉर्टकट नही था।

सवाल – आपकी मां ने कहा कि जो बेटी नही कर पाई वो आपने कर दिया?

जवाब – मम्मी-पापा ने मुझे हमेशा सपोर्ट किया हैं। उन्होंने मेरी सभी जिद पूरी की हैं। यही कारण हैं कि मेरी सफलता में उनका बड़ा योगदान हैं।

सवाल – राज्यपाल महोदया, ने इसे नारी शक्ति के बेहतरीन उदाहरण का नाम दिया।

जवाब – जी बिल्कुल, क्योंकि ज्यादातर मेडल मुझे और आकांक्षा को मिले हैं। यही कारण हैं कि उन्होंने ऐसा कहा हैं।

15 मेडल पाने वाली डॉ. देवांशी कटियार

सवाल – अब आगे का क्या लक्ष्य हैं? भविष्य में क्या करेंगी?

जवाब – मैं आगे चलकर सिविल सर्विस की तैयारी करना चाहती हूं। ऐसा नही हैं कि मैं डॉक्टर नही बनना चाहती थी, मैं अब डॉक्टर बन चुकी हूं। सिविल सर्विस की तैयारी इसलिए करना चाहती हूं कि बहुत बार ऐसे इशूज होते हैं जिसमें डॉक्टर के तौर पर बदलाव लाने के लिए हमें डिमांड करना पड़ता हैं।

जो कोलकाता केस में अभी के हालात चल रहे हैं, उसे देखते हुए ये लगता हैं कि यदि हम मौजूदा समय में सिविल सर्विस में होते तो जिन पालिसी में बदलाव लाने की डॉक्टर डिमांड कर रहे हैं, उनमें बदलाव जरूर लाते। कुछ इसी मकसद से आगे चलकर सिविल सर्विस में जाने का लक्ष्य बनाया हैं।

अब जान लीजिए बेटी की कामयाबी पर कुछ हैं, माता – पिता का कहना

देवांशी की मां कहती हैं कि आज मेरे लिए बहुत बड़ा दिन हैं। जो हम नही कर पाए, वो बेटी ने कर दिखाया। उसकी बदौलत हमारा मंच पर सम्मान हुआ। ये गौरव के पल हैं।

वहीं, देवांशी के पिता कहते हैं कि बच्चों की सफलता पर माता-पिता हमेशा से गौरवांवित होते हैं। देवांशी के सिविल सर्विस में जाने के निर्णय पर कहते हैं कि वो इनका ही डिसीजन हैं, तो मुझे कोई ऐतराज नही, मैं इन्ही के साथ जाना चाहता हूं।

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