लखनऊ में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत ने शहर के मशहूर खानपान कारोबार को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। चौक के पारंपरिक बाजार से लेकर बड़े मॉल के फूड कोर्ट तक इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। हालात ऐसे हैं कि करीब 80% दुकानदार प्रभावित हैं और कई जगह दुकानें बंद करनी पड़ रही हैं।
शहर के प्रसिद्ध टुंडे कबाबी के ग्रैंडसन अबुबकर ने बताया कि उनके परिवार का यह कारोबार करीब 100 साल पुराना है, लेकिन ऐसा संकट पहले कभी नहीं आया। गैस सिलेंडर न मिलने के कारण उन्हें अब कोयले और भट्ठी पर खाना बनाना पड़ रहा है, जिससे कारीगरों को भी काफी दिक्कत हो रही है।
गैस की कमी का सीधा असर खाने के दामों पर भी पड़ा है। पहले जो कबाब 5 रुपये प्रति पीस मिलते थे, अब उनकी कीमत 10 रुपये हो गई है। वहीं पराठे के दाम भी बढ़ गए हैं।
चौक इलाके में स्थित वेज प्वाइंट की करीब 20 दुकानें पिछले एक हफ्ते से बंद हैं। दुकानदारों के सामने तीन ही विकल्प बचे हैं—या तो दुकान बंद करें, महंगे सिलेंडर खरीदकर दाम बढ़ाएं, या फिर कोयले-भट्ठी पर सीमित मात्रा में सामान तैयार करें।
व्यापारियों का कहना है कि बाजार में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर आसानी से उपलब्ध नहीं है, जबकि कुछ जगहों पर यह करीब 5500 रुपये में मिल रहा है, जो सामान्य कीमत से काफी ज्यादा है। इससे कालाबाजारी की आशंका भी जताई जा रही है।
King George’s Medical University के पास स्थित अमन भोजनालय भी पिछले 4–5 दिनों से बंद है। संचालक आशीष मिश्रा के अनुसार, 25 साल के कारोबार में ऐसा संकट पहली बार देखने को मिला है। दुकान बंद होने से मरीजों के तीमारदारों और डॉक्टरों को भी परेशानी हो रही है।
वहीं, चौक की प्रसिद्ध राजा ठंडाई पर भी असर पड़ा है। दुकान के मालिक ने बताया कि गैस की कमी के चलते केसर दूध और लस्सी जैसे उत्पादों की बिक्री बंद करनी पड़ी है, क्योंकि इन्हें तैयार करने के लिए दूध को उबालना जरूरी होता है। फिलहाल सिर्फ ठंडाई ही बेची जा रही है।
कोयले की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। पत्थर का कोयला 15 रुपये से बढ़कर 25 रुपये प्रति किलो और लकड़ी का कोयला 30 रुपये से बढ़कर 40–45 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।
दुकानदारों का कहना है कि उन्हें दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा है—एक तरफ कर्मचारियों को वेतन देना पड़ रहा है, तो दूसरी तरफ दुकानें बंद होने से आमदनी पूरी तरह ठप हो गई है।
व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि गैस सिलेंडर की आपूर्ति जल्द सामान्य की जाए और कालाबाजारी पर सख्ती से रोक लगाई जाए, ताकि उनका कारोबार दोबारा पटरी पर आ सके।
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