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ED की बड़ी कार्रवाई: एक साल में ₹81,422 करोड़ की संपत्ति जब्त, नए तरह के अपराधों पर बढ़ा फोकस

Enforcement Directorate (ED) के निदेशक Rahul Navin ने एजेंसी की हालिया उपलब्धियों और बदलते कार्यक्षेत्र को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि अब एजेंसी पारंपरिक वित्तीय अपराधों से आगे बढ़कर नए जमाने के अपराधों जैसे क्रिप्टोकरेंसी फ्रॉड, साइबर अपराध, आतंकवाद फंडिंग और ड्रग्स तस्करी पर अधिक ध्यान दे रही है।

बदलता अपराध परिदृश्य

निदेशक के अनुसार, पहले जहां जांच का फोकस बैंक धोखाधड़ी, बड़े कॉर्पोरेट घोटालों और रियल एस्टेट फ्रॉड पर होता था, वहीं अब अपराध का स्वरूप बदल चुका है। नई तकनीकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के चलते आर्थिक अपराध भी जटिल और वैश्विक होते जा रहे हैं, जिनसे निपटने के लिए ED ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है।

जांच और कार्रवाई में तेजी

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ED ने

  • कुल 812 अभियोजन शिकायतें दर्ज कीं
  • इनमें 155 पूरक शिकायतें Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत शामिल हैं
  • यह संख्या पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुनी है

दिलचस्प बात यह है कि अब तक दर्ज कुल मामलों में से 41% से अधिक पिछले दो वर्षों में ही दर्ज किए गए हैं, जो जांच की गति और तीव्रता को दर्शाता है।

संपत्ति जब्ती में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

ED ने पिछले वित्त वर्ष में ₹81,422 करोड़ की संपत्ति जब्त की, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 170% अधिक है।
अब तक एजेंसी द्वारा कुल ₹2,36,017 करोड़ की संपत्तियों की अस्थायी कुर्की की जा चुकी है।

उच्च सजा दर और लंबित मामले

ED की कन्विक्शन रेट लगभग 94% बताई गई है। एजेंसी को उम्मीद है कि निचली अदालतों में लंबित 2,400 से ज्यादा मामलों में भी अधिकांश आरोपियों को सजा मिलेगी। हालांकि, मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की सुनवाई को मूल अपराध के साथ जोड़ने या अलग चलाने को लेकर कानूनी चुनौतियां बनी हुई हैं।

पीड़ितों को मुआवजा

2019 में PMLA में संशोधन के बाद, कुछ मामलों में ट्रायल के दौरान ही संपत्ति जब्त कर पीड़ितों को मुआवजा देने की व्यवस्था लागू की गई।
इस प्रावधान के तहत अब तक ₹63,142 करोड़ की राशि बैंकों, निवेशकों और घर खरीदारों जैसे वास्तविक हकदारों को लौटाई जा चुकी है।

भगोड़े आर्थिक अपराधियों पर शिकंजा

Fugitive Economic Offenders Act (FEOA) के तहत:

  • 54 लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई
  • 21 को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया
  • ₹2,178 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई

वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका

भारत की भागीदारी अंतरराष्ट्रीय एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग प्रयासों में भी बढ़ रही है। ED अब विभिन्न वैश्विक नेटवर्क्स में सक्रिय भूमिका निभा रहा है, जिससे वित्तीय अपराधों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत हो रहा है।

निष्कर्ष

ED का कहना है कि उसका उद्देश्य सिर्फ अपराधियों को सजा दिलाना नहीं, बल्कि अपराध से अर्जित संपत्ति को जब्त कर यह सुनिश्चित करना भी है कि अपराधी उसका फायदा न उठा सकें। लगातार बढ़ती कार्रवाई और नई रणनीतियां इस दिशा में एजेंसी के मजबूत कदम को दर्शाती हैं।

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